नई दिल्ली : ऑनलाइन ठगी के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं. कभी सेक्सटॉर्शन तो कभी वर्क फ्रॉम होम और दूसरे तरीकों से स्कैमर्स लोगों को निशाना बनाते हैं. कुछ स्कैम ऐसे भी हैं, जिसमें फ्रॉड्स के पास आपका अच्छा-खासा डेटा मौजूद होता है. मसलन उन्हें यूजर का नाम, पता और दूसरी डिटेल्स पता होती हैं.
इन डिटेल्स के आधार पर ये स्कैमर कई तरह से ठगी करते हैं. ऐसा ही एक मामला है आधार के नाम पर ठगी वाला. इस तरह के फ्रॉड में स्कैमर्स पुलिस अधिकारी बनकर कॉल करते हैं और टार्गेट को कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर अपने जाल में फंसाते हैं. इस तरह के स्कैम को देखते हुए एक सवाल मन में आता है कि स्कैमर्स को हमारी डिटेल्स कहां से मिलती है.
कहां से मिलता है स्कैमर्स को आपका डेटा?
आपने कभी सोचा है कि एक सामान्य आदमी के बारे में स्कैमर्स के पास इतनी डिटेल्स कहां से आती हैं. आप अपने घर में बैठे शायद टीवी देख रहे हों और कोई शख्स आपको कॉल करके बताए कि आपके आधार कार्ड की डिटेल्स के साथ एक पार्सल पकड़ा गया है. इस पार्सल को अवैध तरीके से विदेश भेजा जा रहा था.
इससे पहले की आप कोई जवाब सोचे, अगला शख्स किसी अधिकारी के नाम से आपको धमकाने लगता है. स्कैमर्स कानूनी कार्रवाई की धमकी तक देते हैं. इसके बाद आपको शायद किसी सीनियर से बातचीत भी कराए. इन सबका मकसद आपको डरा धमाका कर पैसे इकट्ठा करना होता है, लेकिन फिर सवाल आता है कि स्कैमर को आपकी डिटेल्स मिली कहां से.
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आपकी डिटेल्स के लिए स्कैमर्स पूरा होमवर्क करते हैं. तमाम तरीकों से स्कैमर्स आपके बारे में डिटेल्स इकट्ठा करते हैं. ऐसे ही कुछ तरीकों और संभावनाओं पर हम चर्चा करेंगे, जो आपकी डिटेल लीक की जिम्मेदार हो सकती हैं.
डेटा लीक
सबसे पहली वजह हो सकती है कोई डेटा लीक. डार्क वेब पर तमाम यूजर्स के डेटा को बेचा जाता है. ये डेटा किसी प्लेटफॉर्म से लीक हो सकता है. इसमें यूजर्स की तमाम डिटेल्स होती हैं. मसलन आपका फोन नंबर, आधार कार्ड नंबर, पता और दूसरी डिटेल्स. इन डिटेल्स के आधार पर स्कैमर्स असली अधिकारी की तरह एक्ट करते हैं और आपको धमकाते हैं.
ये डेटा लीक कई तरह का हो सकता है. संभव है कि आपने किसी शॉपिंग मॉल में अपना नंबर रजिस्टर किया हो, जिसकी वजह से आपको प्रमोशनल मैसेज और कॉल्स आते हैं. अगर स्कैमर्स के हाथ ये डेटा लग जाए, तो उन्हें कई यूजर्स के नाम, नंबर और दूसरी डिटेल्स मिल जाएंगी.
फिशिंग ईमेल या वेबसाइट
ये सबसे कॉमन तरीकों में से एक है. इसमें स्कैमर्स यूजर्स को ईमेल या फिर SMS के जरिए फिशिंग लिंक भेजते हैं. जैसे ही कोई इन लिंक्स को क्लिक करता है, तो ये किसी फेक वेबसाइट पर रिडायरेक्ट हो जाते हैं. यहां से स्कैमर्स यूजर्स के तमाम डिटेल्स को चुरा लेते हैं. ये भी हो सकता है कि स्कैमर्स इन लिंक्स की मदद से कोई स्पाईवेयर आपके फोन में इंस्टॉल कर दें.
इसी तरह से अगर आप किसी फेक वेबसाइट पर विजिट करते हैं, तो वहां से भी स्कैमर्स आपकी तमाम डिटेल्स को चुरा लेते हैं. ये वेबसाइट्स देखने में बिलकुल असली जैसी होती हैं, लेकिन इनका काम यूजर्स का डेटा चुराना होता है.
फोन कॉल स्कैम
यूजर्स की डिटेल्स को हासिल करने के लिए स्कैमर्स कई बार किसी बैंक कर्मचारी या फिर किसी दूसरी सर्विस के एक्जीक्यूटिव बनकर कॉल करते हैं. फिर यूजर्स को अपनी बातों में फंसाकर स्कैमर्स उनकी तमाम डिटेल्स को हासिल करते हैं.
सोशल इंजीनियरिंग
इस तरीके का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है. चूंकि लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी तमाम फोटोज और वीडियोज शेयर करते हैं. इन फोटो और वीडियो की मदद से स्कैमर्स आपकी तमाम डिटेल्स को चुराते हैं. मसलन आपका जन्मदिन कब है, आपकी उम्र क्या है और आप कहां रहते हैं. ऐसी तमाम डिटेल्स की मदद से आपसे जुड़ी दूसरी जानकारियों को हासिल किया जाता है.
कैसे बच सकते हैं आप?
अगर आपकी पर्सनल डिटेल्स किसी डेटा लीक का शिकार हुई हैं, तो स्कैमर के पास आपकी तमाम जानकारी हो सकती है. इसलिए सलाह दी जाती है कि आपको दो से तीन महीने के अंतराल पर अपने पासवर्ड्स को बदलते रहना चाहिए. इसके अलावा सोशल मीडिया पर फोटोज और दूसरी डिटेल्स को शेयर करते हुए थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए.
जैसे जन्मदिन कब है इसे प्राइवेट रखें ना कि पब्लिक डोमेन में इसकी जानकारी दी जाए. इसके अलावा फोटोज में आपका आधार कार्ड या क्रेडिट कार्ड नजर ना आ रहा हो और दूसरी बातों का भी ध्यान रखें. किसी भी वेबसाइट पर विजिट करते हुए उसका URL चेक जरूर करें. कहीं ऐसा ना हो कि आप किसी फेक वेबसाइट पर अपनी तमाम डिटेल्स शेयर कर दें.इसके अलावा अगर कोई आपको कॉल करके किसी अधिकारी के नाम पर धमका रहा है, तो ठंडे दिमाग से काम लें. आनन-फानन में आपको गलती करने से बचना चाहिए. किसी भी अनजान शख्स को पेमेंट ट्रांसफर ना करें. ना ही किसी तरह का OTP शेयर करें
