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भारत-रूस की दोस्ती अमेरिका को रास क्यों नहीं आती, बस इस एक बयान में छिपा राज

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
22/07/24
in अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, समाचार
भारत-रूस की दोस्ती अमेरिका को रास क्यों नहीं आती, बस इस एक बयान में छिपा राज
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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन (Jack Sullivan) ने भारत से जुड़े कई मुद्दों पर बेबाक बयानबाजी की है. NSA जैक ने खालिस्तानी गुरुपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) के मैटर से लेकर चीन समेत कई दिशाओं में दिमाग के घोड़े दौड़ाए. हाल ही में PM मोदी की रूस यात्रा पर भी उनका बयान आया. अमेरिकी NSA ने कहा- ‘चीन के साथ बढ़ती निकटता के कारण, मॉस्को आगे चलकर नई दिल्ली का ‘भरोसेमंद दोस्त’ नहीं रहेगा.’ ऐसे में लगता है जैक भारत-रूस की 77 साल पुरानी दोस्ती (India Russia Friendship) को ठीक से समझ नहीं पाए हैं.

अमेरिकी अफसर ने क्या कह दिया?

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन ने कहा है कि इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि भारत रूस के साथ सैन्य और प्रौद्योगिकी संबंध मजबूत कर रहा है. ऐसे में अमेरिकी अफसर को ये भी जान लेना चाहिए कि रूस ने भारत को लेटेस्ट एक बड़ा प्रस्ताव दिया है. रूस भारत के साथ मिलकर एयर डिफेंस सिस्टम S-500 बनाना चाहता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी के रूस दौरे के दौरान इस मुद्दे पर दोनों देशों में बातचीत हुई है. हालांकि इस ऑफर को लेकर फिलहाल भारत का क्या स्टैंड है इसकी जानकारी सामने नहीं आई है. S-500 केवल 4 से 5 सेकेंड में दुश्मन के मिसाइल और जहाजों को ट्रैक कर तबाह कर सकता है और एक बार में 10 टारगेट पर निशाना लगा सकता है. और हां मिस्टर एनएसए ये सिर्फ एक बानगी भर है, दोस्ती और सैन्य रिश्ते तो तब से गहरे हैं जब आप पाकिस्तान को लड़ाकू विमान और टैंक बांटा करते थे.

‘आखिर कहना क्या चाहते हो’

सुलिवन ने कहा कि चीन के लिए ‘कनिष्ठ सहयोगी’ बन चुका रूस जरूरी नहीं कि भविष्य में भारत का ‘विश्वसनीय मित्र’ रहे.

सिक्योरिटी फोरम में वैश्विक सुरक्षा की चिंता

सुलिवन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की रूस यात्रा के बारे में पूछे गए प्रश्नों पर यह टिप्पणी की. सुलिवन कोलोराडो में ‘एस्पेन सिक्योरिटी फोरम’ में सवालों का जवाब दे रहे थे.

कितने सबूत चाहिए? गूगल कर लो….

अमेरिकी NSA ने कहा, ‘सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हमें इस बात के ठोस प्रमाण मिले हैं कि भारत, रूस के साथ अपने सैन्य और प्रौद्योगिकी संबंधों को गहरा कर रहा है? मुझे उस यात्रा में इस बात के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं कि यह संबंध गहरा हो रहा है, मुझे उस क्षेत्र में कोई परिणाम देखने को नहीं मिला.’

सुलिवन से पूछा गया सवाल

सुलिवन से पूछा गया कि ‘आप उस समय क्या चिंतित थे जब प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की, जबकि यह मुलाकात उसी समय हुई थी जब राष्ट्रपति जो बाइडन वाशिंगटन में नाटो के नेताओं की मेजबानी कर रहे थे?’

भारत-रूस की सदाबहार दोस्ती

पुतिन और मोदी के गर्मजोशी से एक दूसरे को गले लगाने के बारे में पूछे जाने पर सुलिवन ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी का विश्व नेताओं का अभिवादन करने का एक खास तरीका है. मैंने इसे करीब से और व्यक्तिगत रूप से देखा है. हम भारत से अपने रिश्ते को, समानता के आधार पर गहरा करना चाहते हैं. हम जानते हैं कि भारत का रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध है जिसे वे खत्म नहीं करने जा रहे हैं.’

भारत-रूस की दोस्ती से अमेरिका को चिढ़ क्यों?

उन्होंने यह भी कहा कि जो बाइडेन प्रशासन कभी नहीं चाहता कि अमेरिका जिन देशों की परवाह करता है, जो उसके साझेदार और मित्र हैं, वे मॉस्को जाकर पुतिन को गले लगाएं. सुलिवन ने कहा, ‘लेकिन भारत के साथ हमारे संबंधों के संदर्भ में, आप जानते हैं, हम प्रौद्योगिकी, अर्थशास्त्र और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति में अपार अवसर देखते हैं. हम भारत के साथ इस संबंध की प्रकृति और विशेषताओं के बारे में गहन बातचीत जारी रखना चाहते हैं. आगे ये पूछने पर कि क्या ये रिश्ता आगे बढ़ेगा, क्योंकि रूस चीन के और अधिक निकट होता जा रहा है? इसके जवाब में जैक ने कहा, ‘चीन का कनिष्ठ साझेदार होने के नाते, ये जरूरी नहीं है कि भविष्य में किसी आकस्मिक स्थिति या संकट के समय रूस भारत के लिए वफादार साथी साबित हो.’

मोदी ने समझाया दोस्ती का मतलब

हर NSA को अपनी बात रखने का अधिकार है. लेकिन सुलिवन का ये कहना कि चीन का जूनियर पार्टनर बन चुका रूस जरूरी नहीं कि भारत का ‘भरोसेमंद दोस्त’ रहे और भारत-रूस के बीच सैन्य संबंध मजबूत करने के सबूत नहीं हैं, ऐसा बोलने से पहले उन्हें पता होना चाहिए कि रूस तब से भारत का सहयोगी है जब अमेरिका, पाकिस्तान को भारत से लड़ने के लिए अरबों रुपए की खैरात, पैटन टैंक और जंगी जेट बांटता था. आज भारत सुपरपावर बनने की राह पर है. कोविड काल में भारत ने वैश्विक अगुवाई की और कई देशों में वैक्सीन और दवाएं भेजीं. रक्षा क्षेत्र में भी भारत मजबूत हुआ. रूसी S-400 का मेंटिनेंस भारत में होने जा रहा है. PM मोदी ने मास्को में कहा था कि भारत-रूस कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं. एक अनोखा रिश्ता है दोनों देशों की दोस्ती सदा बरकरार रहेगी. हर बार हमारी दोस्ती और मजबूत होकर उभरी है. रूसी भाषा में druzhba को मतलब हिंदी में दोस्ती है. यही शब्द दोनों देशों के संबंधों का परिचायक है.

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