Friday, May 16, 2025
नेशनल फ्रंटियर, आवाज राष्ट्रहित की
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
No Result
View All Result
नेशनल फ्रंटियर
Home उत्तराखंड

एम्स-ऋषिकेश में दुनिया की पहली ‘मिनिमली इनवेसिव ऑटोप्सी’ शुरू, बगैर चीर-फाड़ के होगा शव का पोस्टमार्टम

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
20/04/25
in उत्तराखंड, राज्य, समाचार
एम्स-ऋषिकेश में दुनिया की पहली ‘मिनिमली इनवेसिव ऑटोप्सी’ शुरू, बगैर चीर-फाड़ के होगा शव का पोस्टमार्टम
Share on FacebookShare on WhatsappShare on Twitter

ऋषिकेश: पारंपरिक विधि से पोस्टमार्टम के लिए शव को गले से पेट तक चीरना पड़ता है। साथ ही सिर वाले हिस्से में भी चीर-फाड़ करनी पड़ती है। पोस्टमार्टम के लिए मृत शरीर की चीर-फाड़ से परिजनों की भावनाएं आहत होती हैं। जिससे कई बार परिजन पोस्टमार्टम के लिए इंकार भी करते हैं।

इन सब बातों को देखते हुए एम्स के विशेषज्ञों ने पोस्टमार्टम की एक नई विधि ईजाद की है, जिसे मिनिमली इनवेसिव ऑटोप्सी का नाम दिया गया है। एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के डाॅ. आशीष बताते हैं कि काफी समय से ऐसी कोशिशें चल रही थी कि पोस्टमार्टम के दौरान कम से कम चीर-फाड़ की जाए।

कई चिकित्सा संस्थानों में सीटी स्कैन के माध्यम से पोस्टमार्टम किया जा रहा है। लेकिन कुछ मामलों में सीटी स्कैनर के बावजूद भी अंदरूनी जांच, विसरा और बाॅयोप्सी के लिए चीर-फाड़ करनी पड़ती है। ऐसे में विचार आया कि सीटी स्कैन के साथ लेप्रोस्कोपी और एंडोस्कोपी के माध्यम से पोस्टमार्टम कर सकते हैं। जिससे बिना चीर-फाड़ के आंतरिक अंगों का परीक्षण तथा बाॅयोप्सी की जा सकती है। इस विधि की शुरुआत करने के लिए विभागाध्यक्ष डॉ. बिनय बस्तियां और संस्थान की डायरेक्टर प्रोफेसर मीनू सिंह का पूरा सहयोग रहा।

क्या है मिनिमली इनवेसिव ऑटोप्सी

डाॅ. आशिष भूते बताते हैं कि इस तकनीक में सीटी स्कैन करने के बाद शव के आंतरिक अंगों की जांच के लिए मृत शरीर पर कुछ जगहों पर करीब दो-दो सेंटीमीटर के छिद्र किए जाते हैं। इन छेदों से लेप्रोस्कोपिक या एंंडोस्कोपिक दूरबीन डाली जाती है। पेट के अंदर के अंगों का परीक्षण कर सकते हैं। एंडोस्कोपी से अंगों की कैविटी को देखा जा सकता है। यौन संबंधी मामलों में गुप्तांगों के भीतर देखा जा सकता है। पहले इन अंगों के भीतरी भाग को देखने के लिए इन्हें काटना पड़ता था।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About

नेशनल फ्रंटियर

नेशनल फ्रंटियर, राष्ट्रहित की आवाज उठाने वाली प्रमुख वेबसाइट है।

Follow us

  • About us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Sitemap

© 2021 नेशनल फ्रंटियर - राष्ट्रहित की प्रमुख आवाज NationaFrontier.

  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार

© 2021 नेशनल फ्रंटियर - राष्ट्रहित की प्रमुख आवाज NationaFrontier.