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लाकडाउन के समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए योगाभ्यास

योगीराज प्रदीप कुमार तिवारी हरिद्वार से योग एवं नैदानिक चिकित्सा में परास्नातक है। ये देश के कई हिस्सों में योग के द्वारा कई जटिल बीमारियों का इलाज करते हैं। इसके साथ ही अपने लेखों के माध्यम से लोगों को योग के प्रति जागरूक करते रहते हैं

Health Desk by Health Desk
17/04/20
in मुख्य खबर
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वर्तमान समय में पूरी दुनिया में कोरोना जैसी महामारी का सामना कर रहा है ऐसे में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का होना बहुत आवश्यक है।क्योंकि यह जितनी ज्यादा रहेगी शरीर उतना ही ज्यादा मजबूत होगा । और शरीर विभिन्न प्रकार के रोगों लड़ने में मदद करेगा और कोरोना से भी लड़ने के लिए तैयार रहेगा। हालांकि आजकल के खानपान और गलत जीवनशैली के कारण हमारा इम्यून सिस्टम इतना मजबूत नहीं हो पाता है जिससे वह विभिन्न प्रकार के संक्रमित रोगों से लड़ सकते जिसके कारण हमारा शरीर विभिन्न प्रकार के रोगों से संक्रमित हो जाता है इसलिए आवश्यक है कि हमारा इम्यून सिस्टम बहुत मजबूत होना चाहिए जिससे हम जल्दी बीमार ना पड़े आधुनिक जीवन शैली में हमारा शरीर हमारा खान-पान और रहन सहन जिस तरह से प्रभावित हुआ है उसका सबसे घातक असर हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर ही पड़ता है हमारे शरीर का कमजोर प्रतिरोधक क्षमता की स्थिति होने पर हमारा शरीर विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। योगाभ्यास के नियमित प्रयोग से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का विकास किया जाता है के योगासन करना बहुत ही महत्वपूर्ण है इनके अभ्यास से हमारा शरीर 10 से 15 दिनों में धीरे धीरे मजबूती की ओर अग्रसर होने लगता है।

आइए जानते हैं कुछ योगाभ्यास जिनसे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।

ताड़ासन
ताड़ का मतलब होता है ताड़ी का पेड़ इस आसन को करने के लिए सबसे पहले हम सीधे खड़े हो जाते हैं दोनों पैर के बीच में कंधे के बराबर लेते हैं दोनों हाथों को लाक करते हैं और सांस भरते हुए ऊपर की ओर खींचते हैं और थोड़ी देर तक रुकते है इस आसान को 5-10 बार करते हैं जिससे हमारा पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर व मन में एकग्रता आती है पैर मजबूत होते है मन शांत वह स्थिर रहता है।

सर्वांगासन
पीठ के बल लेट जाइए दोनों पैरों को मिला लीजिए हाथों को कमर के पीछे ले जाइए धीरे-धीरे दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाते हैं और एक सीध में रखते हैं जिससे शरीर का सारा वजन दोनों कंधों तथा गर्दन पर आ जाएगा इस स्थिति में सिर और गर्दन एक सीध में रखें दाएं या बाएं मोड़ने का प्रयास बिल्कुल ना करें इस आसन को 2 से 3 मिनट तक प्रतिदिन अभ्यास करें जिससे कंधे गर्दन और पैर मजबूत होते है ।सर में खून का बहाव होगा मन में स्थिरता आती है।

हलासन
हलासन के लिए पीठ के बल लेट जाइए अब दोनों पैरों को धीरे धीरे 9 डिग्री में ले जाकर रोक ले इस स्थिति में आप अपने पैरों को जितनी देर रोक सकते हैं रोकने का प्रयास करें इस आसन से हमारे पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं जिससे हमें पेट संबंधित कई बीमारियों से लाभ मिलता है ।

पश्चिमोत्तानासन
पश्चिमोत्तानासन करने के लिए आप बैठ जाइए दोनों पैरों को सामने की ओर दंडासन में ले जाइए अब दोनों हाथों को ऊपर की ओर खींचते हुए लंबी गहरी श्वास भरेंगे और श्वास छोड़ते हुए धीरे धीरे सामने की ओर झुकते जाएंगे और पैर के अंगूठे को पकड़ कर सिर को घुटने से टच करा देंगे इस आसन से हमारे रीड की हड्डी मजबूत होती है हमारी जाघ की मसल्स मजबूत होती है पेट पर प्रभाव पड़ता है ।

धनुरासन
धनुरासन करने लिए आप पेट के बल लेट जाइए अब धीरे से दोनों पैरों को मोड़ लीजिए अब दोनों हाथों से पैरों के पंजों को पकड़ लीजिए आप दोनों हाथों को और दोनों पैरों को ऊपर की ओर खींच आएंगे जिससे हमारे रीड की हड्डी पर वह कंधों पर व पैरों की मसल्स पर खिंचाव में ही होगा इस आसन से हमारी रीड की हड्डी लचीली होती है वह पीठ दर्द में आराम मिलता है किसी व्यक्ति को इसी प्रकार का ऑपरेशन हो तो यह आसन ना करें।

उष्ट्रासन
उष्ट्रासन करने के लिए सबसे पहले आप ब्रज आसन में बैठ जाइए अब दोनों घुटनों के ऊपर खड़े हो जाइए अब दोनों हाथों को ऊपर की ओर खींचते हुए धीरे धीरे पीछे की ओर जाएंगे और दोनों हाथों को पैर के पंजे को पकड़ कर शरीर को रोक ले इससे हमारे रीड की हड्डी पर प्रभाव पड़ता है अगर किसी को घुटने की प्रॉब्लम हो या चक्कर आते हैं तो यह आसन ना करें ।

सर्वांगपुष्टि आसन
इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों के बीच में 2 फुट का फासला ले अब दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाकर पकड़ ले अब धीरे-धीरे शरीर को घूर्णन करते हुए आगे से बगल से घूमते हुए पीछे की ओर जाते हुए एक पूरा चक्कर बनाए इसी तरह शरीर को 10 बार सीधा वह 10 बार उल्टी तरफ पूरा गोलाकार चक्कर बनाए यह आसन हमारे शरीर के पैर की उंगलियों से लेकर सिरके अग्रभाग तक सभी अंगों को मजबूती प्रदान करता है ध्यान रखें कि किसी को चक्कर आ रहे हैं या स्पाइन में किसी प्रकार की प्रॉब्लम तो यह आसन ना करें ।

उत्कटासन
उत्कटासन करने के लिए दोनों पैरों के बीच में कंधे के बराबर दूरी में खड़े होते हैं अब दोनों हाथों को सामने की ओर ले जाते धीरे धीरे दोनों पैरों को घुटने से मोड़ते हुए नीचे की ओर बैठने का प्रयास करते हैं जिस तरह से हम कुर्सी पर बैठते उसी अवस्था में आ जाते हैं और कुछ देर तक उस अवस्था में शरीर को रोक कर रखते हैं इस आसन से हमारी पैर की हड्डियां मजबूत होती हैं और हमारे शरीर में एकाग्रता आती है याददाश्त तेज होती है घुटने से संबंधित किसी प्रकार के रोग होने पर इस आसन को ना करें ।

कपालभाति प्राणायाम
कपालभाति करने के लिए सबसे पहले आप सुखासन या पद्मासन पर बैठ जाएं लंबी गहरी श्वास भरें अब पूरी श्वास को बाहर निकाल दो अब आप नाक से सोना स्कोर ज्यादा से ज्यादा बाहर की ओर छोड़ते जाएं जिससे आपका पूरा प्रेशर आपके पेट पर पड़ेगा पेट अंदर की ओर होगा और बाहर की ओर हो इस अभ्यास को 15 से 20 बार करें इससे आपका इम्यूनिटी सिस्टम बहुत ज्यादा मजबूत होता है

भस्त्रिका प्राणायाम
इस प्राणायाम में श्वास को तीव्र गति से अंदर और बाहर की ओर करना होता है जिसमें हमारी छाती पूरी तरह से फूलती है और खाली होती इस प्राणायाम से हमारी छाती पूरी तरह से शुद्ध होती हैं और काफी ज्यादा मजबूत होते हैं और शरीर से कफ भी दूर होता है हाई बीपी वालों प्राणायाम नहीं करना चाहिए। 

उज्जायी प्राणायाम

उज्जायी प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले पद्मासन या सुखासन बैठ जाइए अब लंबी गहरी श्वास भरेंगे स्वास इस प्रकार से भरेंगे किस वंश भरते समय नाक से जाते हुए गले पर घर्षण करते हुए अंदर की ओर श्वास भरे कुछ देर श्वास को रोके फिर धीरे-धीरे दोनों नाक से श्वास को बाहर क्यों निकाल दे इससे हमारी थायराइड ग्लैंड मजबूत होती है गले से संबंधित रोगों के लिए बहुत ही लाभदायक है ।

नोट – आप कोई भी योगाभ्यास करने के लिए अपने आसपास के किसी प्रशिक्षित योगा टीचर की सलाह जरूर ले ।

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