दीपशिखा गुसाईं l कभी अंत नहीं होता इनका। जितना है उससे अधिक पाने की चाहत और तड़प हमेशा बरकरार रहती है। ये भी तो सपनों का ही प्रतिरूप है। पर कुछ…