दिल्ली में बैठकर सात समंदर पार फंसाते हैं शिकार, बुजुर्गों के बैंक अकाउंट यूं खाली कर रहा गैंग

नई दिल्ली: दिल्ली में बैठे-बैठे सात समंदर पार लाखों रुपये की ठगी करने का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने दिल्ली पुलिस को उन लोगों के एक गिरोह के बारे में सतर्क किया है जो न्यू जर्सी और अन्य अमेरिकी शहरों में वृद्ध लोगों को टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ठग रहे हैं। एफबीआई के टेक्निकल सर्विलांस और खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी से दिल्ली पुलिस ने छह संदिग्धों का पता लगाया है। पुलिस ने इन लोगों की लोकेशन को पश्चिमी दिल्ली के इलाके में ट्रैक किया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस गिरोह को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है।

दिल्ली में बैठकर फंसाते हैं शिकार

एफबीआई ने ठगी का शिकार हुए एक शख्स के कंप्यूटर की जांच करके पता लगाया कि गिरोग ने उनके सिस्टम में एक बग इंस्टाल किया था। इसके लिए ठगों ने रिमोट डेस्कटॉप प्रोग्राम का इस्तेमाल किया। इस बग को दूर करने के लिए हैकर्स ने शख्स से पैसे मांगे। पूछताछ में पता चला है कि गिरोह पश्चिमी दिल्ली और कुछ अन्य जगहों से एक अवैध कॉल सेंटर संचालित कर रहा था। यहीं से ठगी के पैसे निकालने के लिए अमेरिका के नागरिकों को फोन किया जाता था। अपने सिस्टम पर कंट्रोल करने के बाद लोगों से गिफ्ट कार्ड या अपने ऑनलाइन वॉलेट में पैसे मांगे जाते थे।

अमेरिका के वृद्ध लोगों को किया जाता है टारगेट

एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि अमेरिका के वृद्ध लोगों से शिकायत प्राप्त हुई थी जिसमें उन्होंने धोखाधड़ी का जिक्र किया था। दोनों फरियादियों ने दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है। इस मामले में पुलिस जांच कर रही है। स्पेशल सेल की साइबर यूनिट ने 85 और 87 साल की उम्र के दो लोगों द्वारा दी गई शिकायत पर मामला दर्ज किया है, जिनसे सिंडिकेट द्वारा 299 और 199 डॉलर की ठगी की गई थी। सूत्रों ने कहा कि ऐसे कई और लोगों को भी निशाना बनाया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई हैं।

ऐसे देते हैं ठगी को अंजाम

एक अधिकारी ने बताया कि सबसे पहले स्कैमर अपने टारगेट को फोन करता है और दावा करता है कि उसका कंप्यूटर में मैलवेयर है। कभी-कभी गिरोह मैलवेयर वायरस के बारे में पॉप-अप नॉटिफिकेशन भी भेजता है। इसके बाद टारगेट से मदद के लिए नॉटिफिकेशन पर भेजे गए नंबर पर कॉल करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद शातिर हैकर अधिकारी बनकर बात करता है और कॉल करने वाले से रिमोट व्यूइंग एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए कहता है। जब टारगेट रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल करता है तो गिरोह उसके सिस्टम पर कंट्रोल का एक्सेस ले लेता है। इसके बाद गिरोह डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग पासवर्ड और एमपीआईएन जैसी डिटेल्स चुरा लेते हैं। इसके बदले वो टारगेट से पैसे की मांग करते हैं।

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