- खड़गे ने उठाया सवाल, क्या हम छुआछूत से बाहर आ गए?
- बोले-मैंने किसी जाति या धर्म की बात नहीं की, फिर मेरे भाषण के बाद मंच का शुद्धिकरण क्यों?
- कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद रामलीला मैदान के मंच पर कथित तौर पर हवन और गंगाजल से ‘शुद्धिकरण’ किए जाने का मामला अब प्रदेश की राजनीति से निकलकर संसद तक पहुंच गया है। गुरुवार को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए खड़गे ने सवाल किया कि ’क्या देश वास्तव में छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता से बाहर आ गया है?’
राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए खड़गे ने कहा कि उन्होंने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि अपने भाषण के दौरान उन्होंने न तो किसी जाति का नाम लिया और न ही किसी धर्म के खिलाफ कोई बात कही, बल्कि केवल जनता की समस्याओं और उनके मुद्दों पर चर्चा की। इसके बावजूद उनके संबोधन के बाद उसी मंच पर हवन कराया गया और गंगाजल से कथित ‘शुद्धिकरण’ किया गया।
उन्होने ने इस घटना पर दुख जताते हुए इसे सामाजिक सोच से जुड़ा गंभीर सवाल बताया। उनके बयान के बाद हल्द्वानी का यह मामला संसद के उच्च सदन में भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया।
गोदियाल बोले- भाजपा की सोच हुई उजागर
उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि हल्द्वानी में जो कुछ हुआ, वह भाजपा की सोच को सामने लाता है और पूरे उत्तराखंड को शर्मसार करने वाला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने पार्टी और संबंधित संगठनों को इस तरह की मानसिकता का मजबूती से विरोध करने के निर्देश दिए हैं। गोदियाल ने अनुसूचित जाति के लोगों से भी कहा कि इस घटना के जरिए भाजपा की कथित सोच उनके सामने आ गई है और यह पूरे समाज के लिए अपमानजनक है।
21वीं सदी में भी जातिवादी मानसिकता से नहीं उबर पाएः हरदा
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह बेहद घटिया मानसिकता का परिचायक है कि 21वीं सदी में, जब इंसान अंतरिक्ष में दूसरी दुनिया बसाने की कल्पना कर रहा है, तब भी कुछ लोग जातिवादी और संकीर्ण सोच से बाहर नहीं निकल पाए हैं।
कहा पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने सत्तारूढ़ दल से भी इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। हरीश रावत ने अपने बयान में भगवान राम और शबरी तथा केवट के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम ने सामाजिक भेदभाव की सीमाओं को तोड़ा था। उन्होंने कहा कि राम ने केवट को सखा माना और शबरी के जूठे बेर खाए। ऐसे में जाति और धर्म के आधार पर किसी के प्रति विद्वेष रखने वाली मानसिकता को भगवान राम की मर्यादा से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
महिला कांग्रेस ने भी कार्रवाई की मांग की
उत्तराखंड महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने भी कथित शुद्धिकरण को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। रौतेला ने कहा कि खरगे का सार्वजनिक जीवन सामाजिक न्याय, संघर्ष और संविधान की रक्षा के लिए समर्पित रहा है। ऐसे वरिष्ठ नेता के भाषण के बाद मंच का शुद्धिकरण किया जाना केवल उनका अपमान नहीं, बल्कि समानता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों का भी अपमान है। महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मामले का तत्काल संज्ञान लेने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
‘शुद्धिकरण’ विवाद ने खड़ा किया बड़ा सामाजिक सवाल
हल्द्वानी का यह विवाद अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। राज्यसभा में मुद्दा उठने के बाद यह घटना जातिगत भेदभाव, सामाजिक समानता और संविधान में निहित छुआछूत विरोधी मूल्यों पर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई है।
कांग्रेस ने इसे दलित सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ते हुए भाजपा से जवाब मांगा है, जबकि पूरे मामले में वास्तविक घटनाक्रम, कथित शुद्धिकरण में शामिल लोगों की भूमिका और उसके पीछे की मंशा की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी।
