क्‍या वाकई हेडगेवार ने लड़ी आजादी की लड़ाई?

नई दिल्‍ली: क्‍या महात्मा गांधी से पहले राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) के संस्‍थापक डॉ हेडगेवार ने आजादी की लड़ाई लड़ी? यह बहस फिर गरम हो गई है। आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम के कारण यह बहस शुरू हुई है। वह एक पुस्‍तक विमाचन में पहुंचे थे। ‘तुष्टिकरण की यात्रा’ नाम की पुस्‍तक विमोचन में निंबाराम ने दावा किया कि महात्‍मा गांधी से पहले आजादी की लड़ाई लड़ रहे क्रांतिकारियों के नेता डॉ हेडगेवार थे। उनके मुताबिक, स्वाधीनता संग्राम 1857 में शुरू हो गया था। इसमें 3 लाख से ज्‍यादा लोगों ने भागीदारी की थी। गांधी के शामिल होने से कहीं पहले स्‍वतंत्रता संग्राम चल रहा था।

‘तुष्टिकरण की यात्रा’ का विमोचन जयपुर में हुआ। इसके लेखक हैं याजवेंद्र यादव। कार्यक्रम में निंबाराम ने इस पुस्‍तक को शोध ग्रंथ करार दिया। साथ ही यह भी दावा किया महात्‍मा गांधी से पहले डॉ हेडगेवार स्‍वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए थे। उन्‍होंने बताया कि इस लड़ाई में महात्‍मा गांधी की एंट्री 1915 में हुई थी। वहीं, इसके पहले डॉ हेडगेवार स्‍वाधीनता के लिए लड़ रहे क्रांतिकारियों के नेता था। डॉ हेडगेवार ने ही आरएसएस की नींव रखी थी। यह और बात है कि तथ्‍यों को गलत तरीके से पेश किया गया।

न‍िंंबाराम ने राहुल को भी न‍िशाने पर ल‍िया

पुस्‍तक विमोचन में निंबाराम ने राहुल गांधी पर भी परोक्ष तौर पर हमला किया। वह बोले कि कुछ लोग आज भारत जोड़ने की बात करते हैं। लेकिन, उनका सवाल है कि भारत तोड़ा किसने। आरएसएस हमेशा अखंड भारत की पैरवी करता रहा है। हालांक‍ि, उन दिनों राष्‍ट्र के साथ कई चीजों का विभाजन हुआ। इनमें राष्‍ट्रगीत वंदे मातरम और राष्‍ट्रीय ध्‍वज भी शामिल थे।

कैसे पड़ी आरएसएस की नींव?

केशव बलीराम हेडगेवार का जन्‍म अप्रैल 1889 में हुआ था। उन्‍होंने नागपुर में 1925 में आरएसएस की स्‍थापना की थी। हिंदुत्‍व की विचाराधारा पर इसकी नींव पड़ी थी। गांधी के नेतृत्‍व में चलने वाले आंदोलन से हेडगेवार ने हमेशा दूरी बनाकर रखी। बजाय इसके उन्‍होंने स्‍थानीय स्‍वयंसेवकों को प्रोत्‍साहित किया कि वे अपनी लड़ाई को धार दें। हेडगेवार एमबीबीएस थे। उन्हें लोग ‘डॉक्‍टरजी’ बुलाते थे। एक समय हेडगेवार भी इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हुए थे। लेकिन, उसकी नीति, विचारों और राजनीति से उनका जल्‍दी ही मोहभंग हो गया। इसके बाद ही दशहरा के दिन उन्‍होंने हिंदू संगठन आरएसएस की नींव रखी।

पढ़ाई पूरी करने के बाद हेडगेवार बंगाल में अनुशीलन समिति से जुड़ गए। इस पर बंकिम चंद्र चटर्जी का काफी प्रभाव था। आरएसएस की स्‍थापना करने में हेडगेवार को इसके अनुभव काफी काम आए । हेडगेवार पर वीर सावरकर की ‘ह‍िंंदुत्‍व’ के अलावा लोकमान्‍य तिलक की ‘गीता रहस्‍य’ का भी प्रभाव था। 21 जून 1940 को डॉ हेडगेवर का निधन हो गया था।

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