देश में पांव पसार रहा इन्फ्लूएंजा वायरस, फेफड़ों को कर देता है खराब

नई दिल्ली : देश में कोरोना वायरस खत्म होता दिख रहा है, लेकिन इस बीच इन्फ्लूएंजा वायरस पांव पसार रहा है. बीते कुछ महीनों में कई लोग इससे संक्रमित हुए हैं. अस्पतालों में भी इस बीमारी के मरीज काफी संख्या में आ रहे हैं. इन्फ्लूएंजा की वजह से ही खांसी, जुकाम और हल्का बुखार होने के केस सामने आ रहे हैं. अधिकतर मामलों में बुखार तो नहीं है, लेकिन लोगों की खांसी और गले में दर्द की परेशानी कम नहीं हो रही है. ये सब इन्फ्लूएंजा के अलग-अलग स्ट्रेन की वजह से हो रहा है. ये वायरस लंग्स को भी काफी नुकसान पहुंचा सकता है.

डॉक्टरों के मुताबिक, इन्फ्लूएंजा का वायरस कई प्रकार का होता है. इसमें ए, बी, सी और डी कैटिगरी होती है. इनमें इन्फ्लूएंजा बी को काफी खतरनाक माना जाता है. ये रेस्पिटेटरी इंफेक्शन करके लंग्स को नुकसान पहुंचा सकता है. बच्चों से लेकर बड़ों तक को इस वायरस की वजह से खासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इसकी वजह से खांसी लंबे समय तक रह सकती है. हालांकि अधिकतर मामलों मे इन्फ्लूएंजा के लक्षण सात दिन में खत्म हो जाते हैं, लेकिन अगर ये इससे लंबा समय ले रहे हैं तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए.

इन्फ्लूएंजा एक रेस्पिरेटरी इंफेक्शन

दिल्ली में मूलचंद हॉस्पिटल में पल्मोनॉजी विभाग के डॉ. भगवान मंत्री बताते हैं कि इन्फ्लूएंजा से संक्रमित होने पर सूखी खांसी, हल्का बुखार और गले में खराश के साथ दर्द की शिकायत होती है. ये एक रेस्पिरेटरी डिजीज है और एक से दूसरे व्यक्ति में खांसने और छींकने के जरिए फैल सकती है. पिछले कुछ दिनों में इन्फ्लूएंजा के साथ सीजनल फ्लू के केस काफी बढ़ गए हैं. वैसे तो ये बीमारी सप्ताहभर में ठीक हो जाती है, लेकिन इस बार देखा जा रहा है कि लंबे समय तक लोगों में लक्षण बने हुए हैं. ऐसे में लोगों को सलाह है कि अगर एक सप्ताह से ज्यादा समय तक खांसी या फिर गले में दर्द है तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टरो से सलाह करें. जो लोग हाई रिस्क ग्रुप (किसी गंभीर बीमारी के मरीज और गर्भवती महिलाएं) में हैं वे इस बात का विशेष ध्यान रखें.

फेफड़े हो सकते हैं खराब
डॉ भगवान मंत्री बताते हैं कि इन्फ्लूएंजा बी वायरस फेफड़ों पर अटैक करता है. गंभीर मामलों में इसकी वजह से रेस्पिरेटरी फेलियर तक हो सकता है. इसकी वजह से एक्यूट ब्रोंकाइटिस और और निमोनिया तक की शिकायत हो सकती है. इस स्थिति में समय पर इलाज न मिलने से मरीज की हालत बिगड़ भी सकती है. ऐसे में बचाव करने की जरूरत है.

ऐसे करें बचाव

  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें
  • बाहर जाते समय मास्क लगाएं
  • साफ-सफाई का ध्यान रखें
  • खांसते और छींकते समय मुंह को कवर करें

 

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