11 चीनी मोबाइल ब्रांड्स के खिलाफ मिलिट्री एजेंसियों की एडवाइजरी

नई दिल्ली: वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन में चल रहे तनाव के बीच, सैन्य खुफिया एजेंसियों ने भारतीय सैनिकों द्वारा व्यावसायिक रूप से उपलब्ध चीनी मोबाइल फोन के इस्तेमाल के खिलाफ एक एडवाइजरी जारी की है. घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने सीएनएन न्यूज़18 को बताया कि क्षेत्र में तैनात सैनिकों से सावधानी बरतने और अपना फोन किसी दूसरी कंपनी में बदलने का अनुरोध किया गया है.

सीएनएन न्यूज़18 द्वारा एक्सेस किए गए दस्तावेज़ के अनुसार, लिस्ट में भारतीय बाजार में मौजूद 11 अन्य प्रसिद्ध चीनी मोबाइल ब्रांडों में वनप्लस मोबाइल, ओप्पो मोबाइल और रियलमी मोबाइल शामिल हैं. एडवाइजरी में ‘सैन्य व्यक्तियों और परिवारों’ को भारत के लिए शत्रुतापूर्ण’ रवैया रखने वाले देशों में बने मोबाइल फोन को खरीदने या इस्तेमाल करने बचने को कहा गया है.

घटनाक्रम से वाकिफ एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ‘यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की सलाह का मसौदा तैयार किया गया है, लेकिन इसे अभी तक प्रसारित नहीं किया गया है जैसा कि इरादा था. संदेश हमेशा स्पष्ट होता है. हर कोई चीन की मंशा और उस देश में बने मोबाइल फोन का उपयोग करने में शामिल जोखिम को जानता है.’

चीनी मोबाइल ऐप्स और फोन के उपयोग से संबंधित डेटा उल्लंघनों और जोखिमों के मुद्दे को पहली बार 2020 में सामने लाया गया था. गलवान घाटी में झड़प के बाद भारत सरकार ने कई चाइनीज मोबाइल ऐप्स पर बैन लगा दिया था, लेकिन खतरा सिर्फ ऐप्स तक सीमित नहीं है. कई विशेषज्ञों ने इन फोनों से जुड़े जोखिमों की ओर भी इशारा किया है, जिनका इस्तेमाल जासूसी या संवेदनशील जानकारी एकत्र करने के लिए किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, ‘किसी को चीन जैसे देश पर भरोसा नहीं करना चाहिए, जिसके पास विस्तार की एक अतिमहत्वाकांक्षी योजना है और जिसने पिछले कुछ वर्षों में एलएसी के साथ यथास्थिति को बदलने की कड़ी कोशिश की है. ये उपकरण हमारे सैनिकों और तैनाती के स्थान का पता लगा सकते हैं और इसलिए एजेंसियां ​​सतर्क हैं. हमने अतीत में भी कई कदम उठाए हैं.’ रक्षा एजेंसियों ने सिफारिश की है कि सभी यूनिट्स अन्य फोन पर स्विच करें या 30 मार्च, 2023 तक पूर्णता रिपोर्ट में शामिल मोबाइल फोन के स्थान पर दूसरी कंपनी का मोबाइल इस्तेमाल रखें.

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