भारत की पहली रीजनल रैपिड ट्रेन में क्या-क्या है खास?

भारत की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम परियोजना एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इस परियोजना का उद्देश्य टियर-2 शहरों और दिल्ली के आसपास के विकासशील क्षेत्रों को महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करना है। भारत की पहली रीजनल रैपिड ट्रेन दिल्ली से मेरठ के बीच चलेगी। ये रीजनल रैपिड ट्रेन आपको 160 किमी प्रति घंटे की गति से एक घंटे से भी कम समय में दिल्ली से मेरठ पहुंचाएगी।

RRTS या RAPIDX ट्रेनों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह 160 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चलेगी। इसकी सबसे कम स्पीड 100 किमी प्रति घंटा है। रैपिडएक्स ट्रेनें दिल्ली मेट्रो और भारतीय रेलवे की ट्रेनों की तुलना में बहुत ज्यादा तेज होगी।

हाल ही में गाजियाबाद के दुहाई डिपो में मेक इन इंडिया’ ट्रेन सेटों का ट्रायल किया जा रहा है। रैपिडेक्स के पहले खंड में छह कोच वाली 13 रेल का संचालन होना है। पहले खंड में गाजियाबाद, साहिबाबाद, गुलधर, दुहाई और दुहाई डिपो स्टेशन में फिनिशिंग का काम तेजी से किया जा रहा है।

रीजनल रैपिड ट्रेन में बाकी ट्रेनों के मुकाबले कई खासियत है। ये ट्रेन फुली एसी होगी। ये ट्रेन फिलहाल 6 कोच वाली होगी। इनमें से 5 स्टैंडर्ड कोच होंगे और 1 प्रीमियम कोच होगा। वहीं एक कोच महिलाओं के लिए पूरी तरह आरक्षित होगा।

प्रीमियम कोच बिजनेस क्लास के यात्रियों के लिए होगा। प्रीमियम कोच में एंट्री प्लेटफॉर्म पर अलग गेट से होगी और ट्रेन के भीतर भी कोच को दूसरे कोच से दरवाजे की मदद से सील किया जाएगा। यात्रियों के लिए आरआरटीएस ट्रेनों में एंट्री और एग्जिच सर्विस भी मेट्रो सेवाओं से अलग होगा। प्रीमियम और अन्य कोचों में 60 सीटें होगीं।

आरआरटीएस परियोजना को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) द्वारा संचालिच किया जा रहा है। शुरुआत में दुहाई और साहिबाबाद के बीच एक प्राथमिकता वाला खंड जल्द ही चालू होने की उम्मीद है।

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस परियोजना 82 किलोमीटर से अधिक लंबी है और इसे 2025 तक पूरी तरह से चालू करने का टारगेट है।

दिल्ली से गाजियाबाद होते हुए मेरठ तक जाने वाली रीजनल रैपिड ट्रेन के बीच 25 स्टेशन होंगे। ये ट्रेन काफी हद तक दिल्ली मेट्रो की तरह होगी। लेकिन इसमें सीटें सिंगल-सिंगल होगी। सीटों को आप अपने हिसाह से एडजस्ट भी कर सकते हैं। सीट के नीचे पैर रखने के लिए भी जगह दी गई है। जैसे लग्जरी बसों की सीट में होता है।

 

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