मोदी के PM बनने के बाद महिलाओं के लिए देश में क्या-क्या बदला?

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले और अभी तक के दूसरे कार्यकाल को मिला दें तो कुल नौ साल हो चुके हैं. इन नौ सालों में मोदी सरकार की ओर से महिलाओं के लिए सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से कई योजनाओं की शुरुआत की गई. महिलाओं के लिए नीतियां बनाकर उनको सशक्त करने का पूरा प्रयास किया गया. प्राइवेट सेक्टर से लेकर पब्लिक सेक्टर में महिलाओं की भूमिका में अच्छी खासी बढ़ोतरी देखने को मिली.

मोदी सरकार की कुछ योजनाएं ऐसी रही है जिनकी चर्चा केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में हुई. इनमें से एक बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान भी शामिल है. इसके अलावा गरीब महिलाओं और परिवारों के लिए उज्जवला योजना की शुरुआत की. इसके तहत हर घर गैस सिलेंडर और चूल्हे उपलब्ध कराए गए ताकि घर में खाना बनाते वक्त गरीब मां, बहनों को खतरनाक धुएं से बचाया जा सके. एक नजर उन योजनाओं पर डाल लेते हैं जिसके केंद्र में केवल महिलाएं ही रही हैं.

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना: 2014 में सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर जोर दिया. 22 जनवरी 2015 में हरियाणे के पानीपत में पीएम मोदी ने इस योजना की शुरुआत की. इस योजना को शुरू करने के पीछे मुख्य वजह देश में लैंगिक असंतुलन को दूर करना और लड़कियों की शिक्षा और कल्याण को बढ़ावा देना है. पीएम की इस योजना को लोगों ने हाथों-हाथ लिया.

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना: पीएम मोदी की ओर से इस योजना की शुरुआत 1 मई 2016 में की गई. योजना का मुख्य उद्धेश्य गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को खाना पकाने के लिए ऐसे ईंधन उपलब्ध कराना था जिससे सेहत को नकुसान न पहुंचे. विशेष रूप से महिलाओं को खाना पकाने के लिए लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर मुहैया कराया गया. इसके उनकी स्वास्थ्य में सुधार हुआ इनडोर प्रदूषण में कमी आई.

सुकन्या समृद्धि योजना: सुकन्या समृद्धि योजना की गिनती भी सरकार की चर्चित योजनाओं में होती है. सुकन्या समृद्धि योजना एक बचत योजना है. इसके जरिए बालिकाओं की वित्तिय सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है. यह योजना माता-पिता को बालिकाओं की वित्तीय सुरक्षा में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है. इस योजना में निवेश किए गए पैसों का इस्तेमाल बालिकाओं की शिक्षा और बड़े होने पर उनकी शादी के लिए किया जाता है. सरकार की ओर से इस पर उच्च ब्याज दर भी प्रदान किया जाता है.

मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम: केंद्र की मोदी सरकार ने मातृत्व अवकाश की अवधि को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 करने के लिए कानून में संशोधन किया. इसके लिए महिलाओं को स्वस्थ होने और नवजात की देखभाल के लिए ज्यादा समय मिल रहा है. इसके साथ-साथ कुछ कंपनियों में वर्क-फ्रॉम होम जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करने के प्रावधान किए गए हैं.

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: मोदी सरकार की ओर से यह योजना 8 अप्रैल 2015 को लॉन्च की गई. इस योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को कम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता प्रदान करना है. जिनमें से कई का मालिकाना हक महिलाओं के पास है. इस योजना के जरिए सस्ती ब्याज दरों पर लोन की पेशकश की गई है. योजना के जरिए उन महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद मिली जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी.

स्वच्छ भारत अभियान: स्वच्छ भारत अभियान के जरिए देशभर में सफाई को लेकर एक नई पहल शुरू की गई. इस पहल का महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर महत्वपूर्ण असर पड़ा. खासकर से गांवों में जहां महिलाए खुले में शौच करने के लिए मजबूर थीं आज अपने घर पर बने शौचालय में ही शौच करती है. सरकार ने इस योजना के जरिए हर घर शौचालय योजना को तेजी से अमल में लाया.

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