वायुसेना का ब्रह्मास्त्र कैसे बना ‘ब्रह्मोस और सुखोई’ का साथ?

नई दिल्ली : चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ जारी तनाव के बीच भारतीय वायुसेना (IAF) तेजी से अपनी मारक क्षमता बढ़ा रही है। कई युद्धक मिसाइलों और विमानों के साथ भारतीय वायुसेना दुनिया की सबसे ताकतवर वायुसेना है। एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने बुधवार को कहा कि ‘ब्रह्मोस और सुखोई Su-30’ के कॉम्बिनेशन ने सेना को जबरदस्त एडवांटेज दिया है।

उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल ने भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को ‘जबरदस्त तरीके से और बढ़ा’ दिया है और किसी भी संघर्ष में देश की रक्षा करने की क्षमता को मजबूत किया है। वायु सेना प्रमुख ने सुखोई एसयू-30 लड़ाकू विमानों पर ब्रह्मोस मिसाइल के शक्तिशाली संयोजन की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि अगली पीढ़ी (नेक्स्ट जेनरेशन) की ब्रह्मोस मिसाइलों के छोटे वर्जन इस तरह से तैयार किए जा रहे हैं ताकि उन्हें अन्य लड़ाकू विमानों में लगाया जा सके।

और बढ़ने वाली है मारक क्षमता

उन्होंने कहा, “ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल ने वास्तव में उस तरीके को प्रेरित किया है (जिससे) हम आने वाले वर्षों में खुद को सटीक मारक क्षमता से लैस करेंगे। दुनिया भर में हो रहे संघर्षों को देखते हुए सटीकता, लंबी दूरी की मारक क्षमता के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।” देश की वायु सेना के प्रमुख ने कहा, “सुखोई एसयू-30 पर ब्रह्मोस के संयोजन ने वास्तव में हमें जबरदस्त क्षमता प्रदान की है जिसने हमारी मारक क्षमता को बढ़ाया है। इसने भारतीय वायु सेना को कई गुना ताकतवर बना दिया है।”

साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नेक्स्ट जेनरेशन ब्रह्मोस मिग-29, मिराज 2000 और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) जैसे प्लेटफॉर्म में फिट किए जा सकेंगे। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि 3 साल पहले लद्दाख में चीन के साथ हुई झड़प के बाद हमें इसकी जरूरत महसूस हुई। इसके बाद हमने इस पर काम करना शुरू कर दिया।

ब्रह्मोस मिसाइल क्या है?

ब्रह्मोस एक टू-स्टेज (दो चरण) मिसाइल है जिसमें पहला स्टेज सॉलिड प्रोपेलेंट बूस्टर इंजन है। यह इंजन हथियार को सुपरसोनिक गति तक पहुंचने की अनुमति देने के बाद अलग हो जाता है। दूसरा स्टेज, या लिक्विड रैमजेट है। इंजन के अलग होने के बाद लिक्विड रैमजेट मिसाइल को मच 3 (3704 किलोमीटर प्रति घंटा) की गति के करीब ले जाता है। ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज की बात करें तो यह करीब 6,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ 290 किलोमीटर दूरी तक लक्ष्य भेद सकेगी।

 

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