MP : अब इन मंदिरों में भी लागू होगा ड्रेस कोड!

भोपाल : भारत की सनातन संस्कृति में परिधान यानि ड्रेस का बहुत महत्व है। अलग अलग धर्म, सम्प्रदाय, पंथ यहाँ तक की स्कूल-कॉलेज, कोर्ट परिसर, अस्पताल परिसर, फैक्ट्री आदि में भी एक विशेष ड्रेस कोड होता है जिसे पहनने पर ही वहां प्रवेश दिया जाता है, अब ऐसा ही कुछ मंदिरों में शुरू होने वाला है, जी हाँ सही समझे आप , अब मध्य प्रदेश के मंदिरों में अमर्यादित, पश्चिमी सभ्यता वाले कपड़े पहनकर जाने पर प्रवेश नहीं मिलेगा, संस्कृति बचाओ मंच ने  इसके लिए अभियान छेड़ दिया है।

मंदिरों में महिलाओं के लिए लागू होगा ड्रेस कोड

आपने मंदिरों पर अभी वहां के नियम कायदे के बोर्ड, पोस्टर, बैनर आदि लगे देखे होंगे, मंदिर की दीवारों पर भी तरह तरह की सूचनाएं लिखी देखी होंगी, अब इन सूचनाओं के साथ एक और सूचना लिखी मिलेगी जिसमें महिलाओं को अमर्यादित कपड़े , पश्चिमी सभ्यता वाले कपड़े जींस-टॉप, स्कर्ट, लोअर, कैपरी पहनकर आने पर प्रवेश वर्जित होगा। संस्कृति बचाओ मंच इसके लिया अभियान शुरू कर रहा है, अभियान की शुरुआत राजधानी भोपाल से होगी।

संस्कृति बचाओ मंच ने जारी किया वीडियो

संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने एक वीडियो बयान जारी कर देश के सभी धर्म स्थल, ट्रस्ट के मंदिर, तीर्थ स्थल के संचालकों से निवेदन किया है कि इन स्थानों पर ऐसे बोर्ड लगाये जाएँ कि महिलाओं को अमर्यादित कपड़े पहनकर आने पर प्रवेश नहीं मिलेगा।

अभियान की शुरुआत भोपाल से होगी

उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति की पहचान कराने वाले कपड़े हैं उन्हें ही पहनकर मंदिर में प्रवेश करें, उन्होंने अपील की है कि ऐसे निर्देश मंदिर समिति अपने यहाँ बोर्ड लगाकर डिस्प्ले करें उन्होंने कहा कि संस्कृति बचाओ मंच भोपाल के सभी मंदिरों के संचालकों से इस तरह के बोर्ड लगाने की अपील करता है और जल्दी ही मंदिरों के आसपास इस तरह के बोर्ड लगाने की शुरुआत करेगा। हालाँकि प्रदेश में कुछ जगह मंदिरों ने बोर्ड लगवा भी दिए हैं और कुछ मंदिरों ने छपने के लिए दे दिए हैं।

तिवारी ने कहा कि सभी जगह ड्रेस कोड होता है, चाहे वो डॉक्टर हो, वकील हो, कर्मकांडी ब्राहमण के वस्त्रों से उसे पहचानते हैं, उन्होंने सवाल किया कि जब स्कूल कॉलेजों में ड्रेस कोड हो सकता है तो मंदिरों में क्यों नहीं हो सकता, मंदिरों में तो संस्कारित होकर मर्यादित कपड़ों में ही जाना चाहिए, इसलिए मंदिरों में निर्धारित ड्रेस कोड में ही प्रवेश दिया जाना चाहिए।

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