वो 2 मुस्लिम हितैषी सांसद, जिन्होंने किया महिला आरक्षण बिल के विरोध में वोट

नई दिल्ली: बुधवार को लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित हो गया। इस बिल पर चर्चा के बाद वोटिंग हुई, जिसमें से सिर्फ 2 सासंदों ने विरोध में वोट किया। कांग्रेस समेत लगभग समूचे विपक्ष ने इस बिल के पक्ष में वोट किया, अब सवाल ये हैं कि वो कौन से दो सांसद थे, जिन्होंने महिला आरक्षण बिल के विरोध मे ंवोट दिया? विरोध में वोट ही नहीं दिया, बल्कि बाहर आकर इसपर सफाई भी देते रहे।

संसोधन की मांग पर क्या हुआ फैसला

बिल पास होने के बाद ओम बिरला ने सांसद एनके प्रेमचंद्रन से अपने संशोधन के बिंदु को स्पष्ट करने के लिए कहा, जिसमें सांसद ने कहा था कि बिल में- ‘जितना संभव हो सके’ एक तिहाई सीटों से पहले इसे हटा दिया जाना चाहिए और ‘अनिवार्य रूप’ से शामिल किया जाना चाहिए। एनके प्रेमचंद्रन ने कहा- “यह एक हानिरहित संशोधन है।” जिस पर अमित शाह ने जवाब देते हुए बताया कि ‘लगभग’ शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया गया है क्योंकि इसका फैसला परिसीमन आयोग करेगा। तब प्रेमचंद्रन ने कहा- ‘स्पष्टीकरण के अधीन, मैं अपना संशोधन वापस ले रहा हूं।’

कौन से वो दो सांसद

महिला आरक्षण विधेयक पर विरोध में वोट करने वाले दो वो सांसद थे, जो अपने आप को मुस्लिम हितैषी बताते रहे हैं, उस पार्टी के साथ राज्य की सत्ता में जो इस बिल के समर्थन में थी। मुहिम चला रही थी। विरोध करने वाले सांसद का नाम है असदुद्दीन ओवैसी और उनका साथ दिया उन्हीं की पार्टी AIMIM के सांसद इम्तियाज जलील ने। औवेसी खुद को मुस्लिमों का हितैषी बताते रहे हैं, साथ ही तेलंगाना में ओवैसी की पार्टी, बीरएस के साथ है, जो इस समय सत्ता में है और बीआरएस, महिला आरक्षण बिल के समर्थन में थी।

क्या बोले ओवैसी

एनके प्रेमचंद्रन के बाद स्पीकर ने औवेसी से अपनी बात रखने को कहा। ओवैसी ने कहा कि वह अपना संशोधन पेश करेंगे और इस पर मतविभाजन की मांग करेंगे। ओम बिड़ला ने कहा-“कोई भी आपके पक्ष में नहीं है।” इस पर ओवैसी और एआईएमआईएम सांसद इम्तियाज जलील ने आसमान की ओर इशारा करते हुए कहा कि अल्लाह उनके साथ है।

ओवैसी की सफाई

ओवैसी ने कहा- “हम जानते हैं कि मुस्लिम महिलाएं आबादी का सात प्रतिशत हैं, लेकिन इस लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व केवल 0.7 प्रतिशत है। मोदी सरकार सवर्ण महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहती है। वे ओबीसी महिलाओं और मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व नहीं चाहते हैं। लोकसभा में 690 महिला सांसद चुनी गई हैं और उनमें से केवल 25 मुस्लिम समुदाय से आई हैं। मैंने सुना है कि धार्मिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता? 1950 का राष्ट्रपति आदेश क्या है? इस आरक्षण में आरक्षण से इनकार करके आप मुस्लिम महिलाओं को धोखा दे रहे हैं।”

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