बिना सिम होगी मोबाइल से कॉलिंग, जानें कैसे करेगा काम

नई दिल्ली: भारत में सैटेलाइट सर्विस जल्द लॉन्च होने वाली है। इसके लिए सरकार ने जोरों-शोरों से तैयारी शुरू कर दी है। इस सर्विस के शुरू होने के बाद यूजर्स बिना किसी सिम और मोबाइल नेटवर्क के भी कॉल और मैसेज भेज सकेंगे। भारत में सैटेलाइट सर्विस शुरू करने की रेस में एयरटेल और जियो के साथ-साथ एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक और अमेजन कूपियर भी शामिल हैं। सैटेलाइट के जरिए कॉलिंग मौजूदा टेरेस्टियल मोबाइल नेटवर्क के मुकाबले काफी अलग होगी। इस सर्विस में यूजर्स उन क्षेत्र से भी कॉलिंग कर पाएंगे, जहां मोबाइल टावर मौजूद नहीं है।

सैटेलाइट सर्विस शुरू होने से दूरस्थ इलाके जैसे कि पहाड़ों में भी कॉलिंग और इंटरनेट की सुविधा ली जा सकेगी। यही कारण है कि सरकार सैटेलाइट सर्विस को लॉन्च करने की तैयारी में है। पिछले साल दिसंबर तक दूरसंचार विभाग इस सर्विस के लिए नेटवर्क अलोकेशन को लेकर चीजों को फाइनलाइज करने वाली थी। हालांकि, अभी तक इसे लेकर आगे का कोई अपडेट नहीं आया है।

क्या है सैटेलाइट नेटवर्क?

जैसा कि नाम से साफ है कि सैटेलाइट सर्विस में बिना जमीन पर कोई टावर लगाए नेटवर्क एक्सेस किया जा सकता है। फिलहाल टेलीकॉम ऑपरेटर्स मोबाइल टावर के जरिए यूजर्स तक नेटवर्क उपलब्ध कराते हैं। ये मोबाइल टावर एक-दूसरे से ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से जुड़े होते हैं। इसमें सिग्नल को एक सेंट्रल स्टेशन पर भेजा जाता है, जहां से मॉडल के जरिए सबस्क्राइबर्स तक डिस्ट्रिब्यूट किया जाता है।

सैटेलाइट सर्विस में ऐसा नहीं होता है। इसमें मोबाइल सिग्नल डायरेक्ट सैटेलाइट से डिस्ट्रिब्यूट किया जाता है। धरती पर बने बेस स्टेशन से सैटेलाइट के जरिए सिग्नल को रिसीवर के डिवाइस पर भेजा जाता है। इसके लिए कोई मोबाइल टावर की जरूरत नहीं होती है।

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंग फिलहाल डायरेक्ट-टू-सेल टेक्नोलॉजी को टेस्ट कर रही है, जिसमें मोबाइल सिग्नल को डायरेक्ट-सेल्युलर डिवाइस यानी मोबाइल फोन से सेंड और रिसीव किया जा सकता है। सैटेलाइट सर्विस शुरू होने के बाद यूजर्स किसी ऐसे एरिया से भी कॉल और इंटरनेट की सुविधा ले सकते हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क मौजूद नहीं है। इस तरह से बिना सिम कार्ड और मोबाइल नेटवर्क के इमरजेंसी कॉलिंग की जा सकेगी।

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