जानलेवा गरमी के पीछे एक भीषण तबाही कर रही इंतजार!

नई दिल्ली : इस समय देश में पड़ने वाली भीषण गर्मी लोगों की जान ले रही है। दूसरी तरफ बढ़ता तापमान एक बड़ी तबाही को जन्म दे रहा है। एशिया के हिंदुकुश हिमालयी इलाके के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। हिंदुकुश को दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वतों के क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। एक अध्ययन में कहा गया है कि आने वाले समय में दो अरब लोगों को त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है। 2011 से 2020 के दशक में ग्लेशियर 65 ोफीसदी तेजी से पिघले हैं। इस हिसाब से इस शताब्दी के आखिरी तक 80 फीसदी ग्लेशियर खत्म हो सकते हैं।

इंटरनेशल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डिवेलपमेंट (ICIMOD) ने कहा है कि 12 ऐसी नदियां जो कि 16 देशों में बहती हैं भविष्य में सूख सकती हैं। बता दें कि अफगानिस्तान से लेकर म्यांमार तक फैली पर्वत श्रृंखला में अब बर्फीले इलाके कम हो रहे हैं। इससे भूस्खलन भी बढ़ रहे हैं। नेपाल स्थित आईसीाईएमओडी के अध्ययन में ये बातें कही गई हैं। बता दें कि इस संगठन में भारत और चीन समेत कुल 8 देश हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब भी कई गंभीर क्षेत्रों को बचाया जा सकता है लेकिन इसके  लिए तेजी से एमिशन कंट्रोल करना होगा। संगठन के डिप्टी डायरेक्टर इजाबेला कोजिएल ने कहा हि कि ग्लेशियर बहुत ही संवेदनशील हते हैं और थोड़ा भी तापमान बढ़ने से पिघलने लगते हैं। तेजी से पिघलते ग्लेशियर इसी ओर संकेत कर रहे हैं कि आपदा बहुत करीब है। यह बहुत ही खतरनाक और महंगी साबित होगी।

औद्योगीकरण के बाद से धरती का तापमान वैसे भी लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। इससे आर्कटिक और अंटार्कटिक पर जमी बर्फ पिघल रह है। अब यूके से लेकर चीन तक हीटवेव जान लेने लगी है। कनाडा के जंगलों में लगी आग भी तापमान बढ़ाने में सहयोगी हो गई। भारत और पाकिस्तान इन दिनों कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं। सिक्किम में कुछ दिन पहले ही बाढ़ और भूस्खलन में 2000 टूरिस्ट फंस गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक भीषण गर्मी ने यूपी और बिहार में 100 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है।

पहाड़ों में आ सकता है सैलाब

भारत और पड़ोसी देशों में भयंकर बाढ़ का खतरा बना हुआ है। ग्लेशियर के फुट पर स्थित झीलें कभी भी बाढ़ का कारण बन सकती हैं। हिंदुकुश इलाका इस मामले में काफी खतरनाक है। इससे जैव विविधिता के लिए भी चुनौती खड़ी हो सकती है। ग्लेशियरों के पिघलने से पानी को रोकने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर भी विफल हो सकते हैं। ऐसा भी हो सकता है कि बांध उस सैलाब को रोक ही ना पाएं और फिर बड़ा इलाका पानी में डूब जाए।

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