रेलवे की बेशकीमती जमीन पर अतिक्रमण, देखते रह गए रेलवे के पहरेदार!

हल्द्वानी l उत्तराखंड में अतिक्रमण के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलने जा रहा है। रेलवे ने हल्द्वानी में अपनी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। विभाग के अधिकारी 11 अप्रैल यानी कल सोमवार को पूरा खाका जिलाधिकारी के सामने रखेंगे। जिसके बाद रेलवे और प्रशासन संयुक्त रूप से फोर्स उतार कर करीब साढ़े चार हजार भवनों के साथ स्कूल, मदरसा, धार्मिक स्थल, अस्पताल तोड़कर बेशकीमती जमीन को मुक्त कराएंगे। रेलवे की जमीन पर हजारों की कैसे हो गई, रेलवे और प्रशासन के कानो पर जूं तक नहीं रेंगी, चलिए जानते हैं।

1975 से शुरू हुआ अतिक्रमण का खेल

हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर 1975 से अतिक्रमण का खेल जारी है। 47 साल से अधिक का समय गुजर चुका है, धीरे-धीरे कर झुग्गियों की बसासत पक्के निर्माण में तब्दील होने लगी। सरकारी, अस्पताल और धार्मिक स्थल तक बने, लेकिन रेलवे की पहरेदार आरपीएफ हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।

सभी सरकारी सुविधाएं मिलीं

47 साल तक अतिक्रमणकारियों को नेताओं की भी पूरी शह मिली। जिन नेताओं ने इन अतिक्रमणकारियों को खुद की सियासी सीढ़ी बनाया, उन्होंने इनको न सिर्फ सरकारी भूमि पर जमे रहने का हक दिया, बल्कि इस दरियादिली के बदले वोट का अधिकार भी दिलाया। एक तरह जहां रेलवे के हाथ बांधे गए, वहीं दूसरे विभागों के हाथ खोले गए। सरकारी विभागों को इन्हें बिजली-पानी का कनेक्शन देने का आदेश दिया गया। आधार कार्ड, वोटर कार्ड जारी हुए।

2016 में आरपीएफ ने दर्ज किया पहला मुकदमा

नैनीताल हाई कोर्ट की सख्ती के बाद 2016 में आरपीएफ ने अतिक्रमण का पहला मुकदमा दर्ज किया। लेकिन तब तक करीब 50 हजार लोग रेलवे की जमीन पर आबाद हो चुके थे। नैनीताल हाई कोर्ट ने नवंबर 2016 में रेलवे को 10 सप्ताह में अतिक्रमण हटाने के सख्त आदेश दिए। इसके बाद भी रेलवे, आरपीएफ और प्रशासन नरमी दिखाता रहा। इससे अतिक्रमणकारियों को सुप्रीम कोर्ट जाने का मौका मिल गया।

सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत नोटिस जारी करने का दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिक्रमणकारियोंं को व्यक्तिगत रूप से नोटिस जारी करने और उनकी आपत्तियों को तीन माह में निस्तारित करने का आदेश रेलवे को देते हुए मामले को वापस हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए भेज दिया। नैनीताल हाई कोर्ट ने रेलवे को 31 मार्च 2020 तक उनके समक्ष दायर वादों को निस्तारित करने का आदेश दिया। रेलवे की रिपोर्ट के मुताबिक, अतिक्रमण की जद में आए 4365 वादों की रेलवे प्राधिकरण में सुनवाई हुई। जिसमें 4356 वादों का निस्तारण हो चुका है। अतिक्रमणकारी कब्जे को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं दिखा पाए।

तो वल्र्ड क्लास स्टेशन बनता

अगर अतिक्रमण हट जाए तो हल्द्वानी विश्वस्तरीय स्टेशन का दर्जा हासिल कर सकता है। हल्द्वानी स्टेशन को विकसित करने के लिए कई प्रयास हुए। 14 वर्ष पहले करीब 29 एकड़ की भूमि पर वाशिंग लाइन, मेंटीनेंस लाइन बनाने का प्रस्ताव तैयार हुआ। मंडल स्तर से लेकर गोरखपुर जोन के अधिकारियों ने निरीक्षण किया। रेलवे के तत्कालीन महाप्रबंधक ने भी जमीन देखी। प्रस्ताव तैयार हुआ, लेकिन अतिक्रमण ने पूरी योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

 

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