नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना को एक ऐसे स्मार्ट बम की जरुरत थी, जो खुद नेविगेट और ग्लाइड करते हुए दुश्मन के टारगेट को बर्बाद कर दे. इस काम में भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने मदद की. उसके वैज्ञानिकों ने दो तरह के बम का डिजाइन बनाया. डिजाइन के बाद इस बम को बनाने की जिम्मेदारी उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनी Adani Defence And Aerospace ने ली. उसने दोनों बमों का निर्माण किया. पहला विंग के जरिए ग्लाइड करने वाला गौरव लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम (LRGB).
दूसरा है बिना विंग वाला गौथम (Gautham). ये दोनों ही प्रेसिशन गाइडेड हथियार हैं. इनका उपयोग आमतौर पर एंटी-एयरक्राफ्ट डिफेंस में रेंज से बाहर मौजूद टारगेट्स को ध्वस्त करने के लिए किया जाएगा. इससे अपने फाइटर जेट के सर्वाइव करने और कोलेटरल डैमेज की आशंका कम हो जाती है. गौरव 1000 किलोग्राम का विंग वाला लंबी दूरी का ग्लाइड बम है. वहीं, गौथम 550 किलोग्राम का बिना विंग का बम है. दोनों की लंबाई 4 मीटर है. दोनों का व्यास 0.62 मीटर है.
Adani manufactured #DRDO Long Range Glide Bomb (#LRGB), Gaurav. pic.twitter.com/1yf8y33Rmy
— Defence Decode® (@DefenceDecode) July 29, 2022
गौरव (Gaurav) और गौथम (Gautham) दोनों ही बमों में CL-20 यानी फ्रैगमेंटेशन और क्लस्टर म्यूनिशन लगते हैं. ये टार्गेट से कॉन्टैक्ट करते ही प्रॉक्जिमिटी फ्यूज़ कर देता है. विस्फोटक फट जाता है. गौरव की रेंज 100 किलोमीटर ग्लाइड करने की है. जबकि गौथम की बिना विंग के 30 किलोमीटर ग्लाइड करने की है. यह अधिकतम 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकता है.
दोनों ही बमों में इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम लगा है. जो जीपीएस और नाविक सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम की मदद से टारगेट तक पहुंचता है. इसे सुखोई सू-30एमकेआई फाइटर जेट पर तैनात किया जा सकता है. पिछले साल अक्टूबर महीने में बालासोर में सुखोई फाइटर जेट से गौरव का सफल परीक्षण किया गया था. इससे पहले 2014 में इसका सफल परीक्षण किया गया था. दोनों की फिलहाल अपग्रेडेड रेंज 50 से 150 किलोमीटर है.
