नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने रविवार को कहा कि सरकार की आम चुनाव को पहले कराने की कोई योजना नहीं है और पीएम मोदी अपने कार्यकाल के आखिरी दिन तक भारत के नागरिकों की सेवा करना चाहेंगे. इंडिया टुडे को दिए खास इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव पर एक समिति गठित की है और समिति इसके लिए मानदंडों को अंतिम रूप देने से पहले इस पर व्यापक विचार-विमर्श करेगी. सरकार की आगामी विधानसभा चुनावों को आम चुनावों के साथ कराने की कोई योजना नहीं है. ठाकुर ने चुनाव समय से पहले या देरी से होने की सभी बातों को मीडिया अनुमान कहकर खारिज कर दिया.
18 सितंबर से शुरू हो रहा विशेष सत्र
मंत्री ने कहा कि सरकार अधीर रंजन चौधरी को ‘एक देश-एक चुनाव’ समिति का हिस्सा बनाना चाहेगी और इसमें विपक्ष की आवाज को शामिल करना मोदी सरकार की विशाल हृदयता को दर्शाता है. ठाकुर ने संकेत दिया कि सरकार के पास 18 सितंबर से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र के लिए बड़ी योजनाएं हैं.
विशेष सत्र के एजेंडे का खुलासा नहीं
हालांकि केंद्रीय मंत्री ने विशेष सत्र के एजेंडे का खुलासा नहीं किया, उन्होंने INDIA गठबंधन से अनावश्यक रूप से निराश न होने के लिए कहा और सही समय आने पर संसदीय कार्य मंत्री एजेंडे का खुलासा करेंगे. इसके साथ ही ठाकुर ने यह भी जोड़ा कि ‘मोदी हैं तो कुछ बड़ा ही होगा.’
विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर लगाए हैं ये आरोप
सरकार की यह घोषणा ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच आई है. विपक्ष ने सरकार पर सत्ता में बने रहने के लिए ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का उपयोग करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. सरकार ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया एक संवैधानिक सुधार है जिससे देश को लाभ ही होगा. ‘एक देश-एक चुनाव’ समिति को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है. इसके बाद सरकार तय करेगी कि समिति की सिफारिशों को लागू किया जाए या नहीं.
व्यापक विचार-विमर्श के लिए प्रतिबद्ध
‘एक देश-एक चुनाव’ प्रस्ताव को राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है. कुछ लोगों ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे पैसे की बचत होगी और दक्षता में सुधार होगा. अन्य लोगों ने प्रस्ताव की व्यवहारिकता और लोकतंत्र पर इसके प्रभाव के बारे में चिंता भी जताई है. सरकार ने कहा है कि वह कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले ‘एक देश-एक चुनाव’ प्रस्ताव पर व्यापक विचार-विमर्श करने के लिए प्रतिबद्ध है.
18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र
बता दें कि, केंद्र की मोदी सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है. ये सत्र 18 से 22 सितंबर तक चलेगा. बताया जा रहा है कि इसमें 5 बैठकें होंगी. ये 17वीं लोकसभा का 13वां सत्र और राज्यसभा का 261 वां सत्र होगा. अमृत काल के बीच संसद के विशेष सत्र में सार्थक चर्चा और बहस की उम्मीद है. दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 85 (Article 85) में संसद का सत्र बुलाने का प्रावधान है. इसके तहत सरकार को संसद के सत्र बुलाने का अधिकार है. संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति निर्णय लेती है जिसे राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप दिया जाता है, जिसके जरिए सांसदों (संसद सदस्यों) को एक सत्र में बुलाया जाता है.
विशेष सत्र को लेकर अभी तक सिर्फ अटकलें
संसद के विशेष सत्र को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है. इस दौरान क्या होने वाला इसे लेकर सिर्फ अटकलें ही लगाई जा रही हैं. इन अटकलों में रोहिणी आयोग की रिपोर्ट से लेकर, ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ पर बात होने और सदन को नई संसद में शिफ्ट किए जाने तक की चर्चा है. इसी बीच यह भी सामने आया है कि इस विशेष सत्र में न तो प्रश्नकाल होगा और न ही शून्यकाल रखा गया है. दोनों सदनों के सत्र बगैर इन दोनों के ही चलेंगे.
