नई दिल्ली : लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है। कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई ने सबसे पहले इसे सदन में पेश किया और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को मणिपुर हिंसा मामले पर घेरा। गोगोई ने बार-बार पीएम से पूछा कि वह मणिपुर हिंसा पर चुप क्यों हैं। सदन से गायब क्यों हैं। इसके बाद बीजेपी की तरफ से झारखंड से सांसद निशिकांत दुबे ने प्रस्ताव पर अपनी बात रखी।
दुबे ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि यह अविश्वास प्रस्ताव नहीं है बल्कि विपक्षी दलों के बीच का विश्वास प्रस्ताव है कि कौन विपक्ष में साथ-साथ है और कौन साथ नहीं है, यह उसी विश्वास का परीक्षण है। उन्होंने प्रधानमंत्री की इस कथित टिप्पणी को विस्तार से समझाते हुए कहा कि कांग्रेस ने अतीत में जो कारनामे किए हैं,उसकी वजह से उसके सहयोगी दलों का उस पर विश्वास नहीं है, इसीलिए ये लोग अपने लिए विश्वास प्रस्ताव लेकर आए हैं।
बीजेपी सांसद ने कहा कि विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस के बाद सबसे बड़ा घटक दल डीएमके है। उसी डीएमके के मुखिया एमके स्टालिन के पिता और दिवंगत करुणानिधि की सरकार को 1976 में कांग्रेस ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर बर्खास्त कर दिया था और 1980 में जब इंदिरा जी की सरकार बन रही थी, तब डीएमके उसके साथ हो गई थी। दुबे ने कहा कि राजीव गांधी की हत्या की जांच के लिए जैन कमीशन ने रिपोर्ट दिया था कि लिट्टे को सहयोग करुणानिधि की पार्टी देती थी। बीजेपी सांसद ने कहा कि राजा पर टू जी का आरोप लगाकर कांग्रेस ने विभाग बदल दिया था।
दुबे ने कहा कि दूसरी बड़ी पार्टी टीएमसी है। सिंगूर पर हमने ममता बनर्जी को साथ दिया था और राजनाथ सिंह उनकी रैली में शामिल हुए थे। हमने उनकी सरकार बनाने में मदद की लेकिन कांग्रेस ने उस पर नारदा स्टिंग घोटाले का केस किया। दुबे ने राजद का भी जिक्र किया और कहा कि हमने उनको जेल नहीं भेजा, उन्हें 1995 में कांग्रेस की सरकार ने ही अंदर करवाया था और ललन सिंह पिटीशनर थे।
बीजेपी सांसद ने कहा कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की इमेज को भी कांग्रेस ने चौपट किया था और आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज करवाया था। 2008 में उन्होंने मनमोहन सिंह सरकार को न्यूक्लियर डील पर आयकर विभाग केस से डरकर समर्थन दिया था। दुबे ने 1980 में शरद पवार की सरकार को बर्खास्त करने और जम्मू-कश्मीर में 1953 में शेख अब्दुल्ला को 1975 तक इसी कांग्रेस ने जेल में बंद रखा था। इसके बाद 1975 में शेख-इंदिरा समझौता हुआ था।
बीजेपी सांसद ने कहा कि इन सभी दलों को जब कांग्रेस ने सताया था तो वो विरोध बीजेपी का क्यों कर रहे हैं। दुबे ने यह भी कहा कि 2005 में उन्होंने जेडीयू को सबसे ज्यादा फंड दिलवाया था।
