भारत भक्ति से भरा मन है ‘स्वामी विवेकानंद’

लोकेन्द्र सिंह लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं। स्वामी विवेकानंद ऐसे संन्यासी हैं, जिन्होंने हिमालय की कंदराओं में जाकर स्वयं के मोक्ष के प्रयास…

आचार्य द्विवेदी के रास्ते पर चलकर ही बनेगी हिंदी संसार की भाषा

रायबरेली। विश्व हिंदी दिवस सोमवार को आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति अमेरिकी इकाई की प्रथम वर्षगांठ के रूप में ऑनलाइन मनाया गया। इस अवसर पर ‘वर्तमान में द्विवेदी…

विश्व को हिन्दू सनातन धर्म से परिचित कराने स्वामी विवेकानंद ने किए थे प्रयास

प्रहलाद सबनानी सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक आज पूरा विश्व ही जैसे हिन्दू सनातन संस्कृति की ओर आकर्षित होता दिख रहा है। आज विश्व के लगभग समस्त देशों…

अमेरिकी इकाई की प्रथम वर्षगांठ पर परिचर्चा 10 जनवरी को

पद्मश्री प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित और वाइस चांसलर प्रो. प्रकाशमणि त्रिपाठी करेंगे संबोधित भारत में सुबह 8:30 से 9:30 और अमेरिका में 9 जनवरी की शाम 7:00 बजे से 8:00…

पुण्यतिथि पर विशेष : प्राकृतिक गुणों से परिपूर्ण सुमित्रानंदन पंत

गौरव अवस्थी “आशीष” युगों-युगों से सुनते आ रहे हैं कि प्रकृति वरदान है। कहा भी गया है कि प्रकृति के नजदीक रहने वाला कभी दुखी नहीं होता। प्रकृति केवल प्रेम…

पंतजी ने जिस मूर्ति का अनावरण किया वह आखिर गई कहां?

काशी नागरी प्रचारिणी सभा के मुख्य द्वार पर जन्मशती वर्ष पर 1969 में स्थापित की गई थी आचार्य द्विवेदी की कांस्य प्रतिमा l  प्रदेश के मुख्यमंत्री संपूर्णानंद और सभा के…

पांच फुट की लड़की

उसका फूला हुआ चेहरा एक दम गोल मटोल गाल भरे हुए सखियाँ प्यार से रसगुल्ली कहतीं थोड़ी बड़ी नाक थी सो झगड़े में नकचिप्टी कह देतीं उसकी आँखों में दुनिया…

देहरादून : हिमांतर प्रकाशन की प्रथम पुस्तक ‘मेरे हिस्से का हिमालय’ का हुआ विमोचन

देहरादून : यात्रा का अनुभव एकल से सामूहिकता की प्रक्रिया है। कोई मनुष्य कभी अकेले यात्रा नहीं करता है। उसकी यात्रा में बहुत कुछ दृश्य-अदृश्य साथ होता है। तनुजा जोशी…

मैथिलीशरण गुप्त परलोक में भी चाहते थे आचार्य जी जैसा पथ प्रदर्शक

गौरव अवस्थी “आशीष” ” करते तुलसीदास जी कैसे मानस-नाद, ‘महावीर’ का यदि उन्हें मिलता नहीं प्रसाद” राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के लिए कही गई यह लोकप्रिय…

प्रभु कृपा से ही मिलता है महापुरुषों का संग

डॉ. प्रणव पण्ड्या ‘‘तब अपनी स्मृतिकथा सुनाकर हमें अनुगृहीत करें।’’ वातावरण में कई स्वरलहरियाँ एक साथ स्पन्दित हुईं। वशिष्ठ ने भी सभी की सहमति को स्वीकार कर कहना प्रारम्भ किया-…