काई लगे हरे आँगन में चुपके से उतरती वैशाख की गर्म सी धूप ओसार की उंगलियाँ थाम…., छिड़क चुकी है शरारतों की बूँदें नींद की गर्म तासीर पर अल सुबह…
-देश में प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाते हुए ही आर्थिक प्रगति हो- कोरोना वायरस महामारी के चलते लगभग 2 माह के लॉक डाउन के बाद भारत सहित विश्व…
-पर-पीड़ा- मिसेज सिंह सुबह-सुबह अपनी बालकनी में बैठी चाय की चुस्कीयाँ व अखबार में आज की ताजा-ताजा खबरों का मजा ले रही थीं। तभी उनकी नजर सामने वाले घर में…
आधा सत्य- आधा जीवन !! मानव जीवन की अधिकतर समस्याओं का मूल है- ‘आधा जानना’ किंतु ‘पूरा मानना ‘ .. फिर चाहे वह धर्म की उद्घोषणा हो या दर्शन के…
कठपुतली —————– कठपुतली हूं मैं, मृदंग के बोल पर नाचती कठपुतली .. मेरे हर अंग में प्रेम का आवेग पर्वतीय सरिता की तरह तब तक बढ़ता जाता है जब तक…
शब्द-द्वंद ——————— शब्द..!! जब फांस की तरह चुभते हैं तो किसी सुनामी से कम तबाही नहीं मचाते सुनामी की लहरें तो फिर भी एक बार में ही सब कहानी खत्म…
उसका आना अब अच्छा नहीं लगता —————– उसका आना अब अच्छा नहीं लगता है अचंभा लगता है किसी बहेलिए की तरह उसका आना आकर, जाल बिछा कर बेखबरी में खुश…
आखेट ———- आखेट पर निकली थी वो, भटक रही थी जंगलों में प्रण किया था कि रीते हाथ नहीं लौटेगी रस्से पर चलने का दृढ़ निश्चय बचपन से ही सीखा…
‘गाढ़े इश्क़ में…’ गाढ़े इश्क़ में चलो दूर सफ़र पर तन्हा सा इक सफ़र ऐसा हो जाये नींदभर तेरी और ख़्वाब बस मेरा शब भर बटबारा ज़रा हो जाये ……
उम्र के बाद वाली दोस्ती (कविता) बहुत आसान है कह देना कि एक उम्र के बाद वाली दोस्ती बस टाइमपास होती है पर क्यों होता है किसी के पास इतना…