स्त्री का इंतजार

सीमा “मधुरिमा” लखनऊ  सदियों से थी स्त्री इंतजार में, कब मिले मुक्ति उसे इस बेतहाशा भागती हुई जिंदगी से l सदियों से जन्म के साथ शुरू हुआ भागम भाग कभी…

मजदूर दिवस : राष्ट्र की प्रगति के आधार हैं मजदूर

अजय पाठक राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय असंगठित कामगार संघ  करोना काल ने तो मानवता और खास तौर पर मजदूरों के लिए तो करोना महामारी से भी बड़ी महामारी भुखमरी और बच्चों…

सती… एक राक्षसी प्रवृति

सीमा ‘मधुरिमा’ लखनऊ वो चिल्ला रही थी शायद भयभीत थी l उस मृत्यु से, जो उसे वरण करना पड़ रहा था l या कहिये जबरन दिया जा रहा था l…

अपनी करनी की कीमत चुका रही है मानव जाति?

मीना पाठक  कानपुर कुछ महीनों पहले टीवी का चैनल बदलते हुए अचानक रुक गयी। पर्यावरण को लेकर एक वैज्ञानिक से चर्चा हो रही थी। मैंने रिमोड साइड में रख दिया…

‘लम्हे जो समय के बहाव में छूट गए’… दूसरी कड़ी

दीपेंद्र सिवाच ऑल इंडिया रेडियो देहरादून में कार्यरत उसे इस मझोले शहर में आए लगभग दो महीने हो चले थे और वो अब कुछ कुछ सहज होने लगा था। एक…

“भिटौली” : मेरे पहाड़ की अनूठी परंपरा

दीपशिखा गुसाईं “अब ऋतु रमणी ऐ गे ओ चेत क मेहना, भटोई की आस लगे आज सोरास बेना….” यह गीत सुन शायद सभी पहाड़ी बहिनों को अपने मायके की याद स्वतः…

ख्वाहिशें

दीपशिखा गुसाईं l कभी अंत नहीं होता इनका। जितना है उससे अधिक पाने की चाहत और तड़प हमेशा बरकरार रहती है। ये भी तो सपनों का ही प्रतिरूप है। पर कुछ…

परीक्षाओं का दौर

दीपशिखा गुंसाईं l आजकल बच्चों की परीक्षाओं का दौर चल रहा है। वैसे तो हमें अपने पूरे जीवन काल में हर मोड़ पर कई तरह की परीक्षाओं से गुजरना होता…

देश में ये विरोध आखिर किसके लिए और क्यों?

ये संसार अब बच्चों व जानवरों जैसी निरीह चेतना वाले लोगों के लिए रहने लायक नहीं रहा, यहां केवल वही रह सकता है जिसकी चेतना चिकने घड़े से आच्छादित हो!…

बहरहाल- बंबई

“सैर कर दुनिया की ग़ालिब जिन्दगानी फिर कहां! जिन्दगानी ग़र रही तो, नौजवानी फिर कहां!!” इसी के साथ हम शुरुआत करेंगे बंबई नगरी के वैज्ञानिक विश्लेषण का। बंबई शब्द का…