मोदी सरकार के 9 वर्षों का मूल्यांकन करती पुस्तक ‘अमृतकाल में भारत’

लोकेंद्र सिंह भारतीय संस्कृति में कहा जाता है, ‘नयति इति नायक:’, अर्थात् जो हमें आगे ले जाए, वही नायक है। आगे लेकर जाना ही नेतृत्‍व की वास्‍तविक परिभाषा है। भारत…

‘भारत के स्वराज्य’ का उद्घोष था श्रीशिवराज्याभिषेक

लोकेन्द्र सिंह आज का दिन बहुत पावन है। आज से ‘हिन्दवी स्वराज्य’ की स्थापना का 350वां वर्ष प्रारंभ हो रहा है। विक्रम संवत 1731 में आज ही की तिथि, ज्येष्ठ…

जल्द प्रकाशित होगी ‘श्रुति-स्मृति-स्मरण’ पुस्तक

गौरव अवस्थी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के रजत जयंती वर्ष पर आयोजित स्मृति समारोह की श्रृंखला में दिनांक 11-12 नवंबर 2022 को आयोजित मुख्य कार्यक्रम “द्विवेदी मेला”…

‘महेश गुप्ता सृजन सम्मान’ से सम्मानित हुए प्रखर पत्रकार ‘गौरव अवस्थी’

रायबरेली। जनपद के पत्रकार एवं आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की स्मृतियों को जीवंत बनाने में जुटे गौरव अवस्थी को भोपाल के सप्रे संग्रहालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में महेश गुप्ता…

एक कदम रंगकर्म की ओर..

गौरव अवस्थी वह क्षण जैसे जैसे नजदीक आ रहा था, दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी। मन में तरह तरह के विचार उमड़ने घुमड़ने लगे। कर पाऊंगा या…

159वीं जयंती (9 मई) पर विशेष : सरस्वती के संपादक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

गौरव अवस्थी हिंदी की एक चर्चित मसल है-सब तज, हरि भज। अधिकांश के लिए इस मसल का अर्थ सब काम धाम छोड़कर ईश्वर की उपासना ही है लेकिन हिंदी के…

मां की गोद है हिंदी, पिता का प्यार है हिंदी

नई दिल्ली : आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिका इकाई की ओर से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बाल कवि सम्मेलन शानदार रहा। भारत और अमेरिका के बच्चों ने स्वरचित…

मजदूर वर्ग में चेतना जागृत करने वाले महावीर प्रसाद और माधव राव सप्रे हिंदी के पहले लेखक

गौरव अवस्थी भारत में मजदूर दिवस मनाए जाने का यह शताब्दी वर्ष है। मई दिवस की शुरुआत 1 मई 1886 को अमेरिका से हुई थी लेकिन 1923 में भारत में…

मेरी नहीं, श्री की इच्छा है ‘हिन्दवी स्वराज्य’

लोकेन्द्र सिंह पुणे की दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगभग 82 किलोमीटर की दूरी पर, रोहिडखोरे की भोर तहसील में, सह्याद्रि की सुरम्य वादियों के बीच, समुद्र तल से लगभग 4694 फीट…

‘हिन्दवी स्वराज्य’ की संकल्पना हो शासन का आधार

लोकेन्द्र सिंह भारतवर्ष जब दासता के मकड़जाल में फंसकर आत्मगौरव से दूर हो गया था, तब शिवाजी महाराज ने ‘हिन्दवी स्वराज्य’ की घोषणा करके भारतीय प्रजा की आत्मचेतना को जगाया।…