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चीन के पास 400 स्टील्थ फाइटर विमान, भारत में अभी डिजाइन पर ही काम?

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
21/01/24
in राष्ट्रीय, समाचार
चीन के पास 400 स्टील्थ फाइटर विमान, भारत में अभी डिजाइन पर ही काम?
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नई दिल्ली: फ्रांसीसी वायु और स्पेस फोर्स (FASF) ने इस वक्त करीब 5.5 अरब डॉलर में 42 राफेल जेट का ऑर्डर दिया है। यह खरीद फ्रांसीसी सांसदों की फ्रेंको-जर्मन-स्पेनिश “फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम” (एफसीएएस) परियोजना में काफी ज्यादा देरी होने लेकर सामने आई चिंताओं के बीच हुई है, जिसे राफेल का उत्तराधिकारी बनना था।

FASF के अब 2045 या 2050 से पहले फ्रांसीसी वायुसेना में प्रवेश करने की भविष्यवाणी की गई है और फ्रांसीसी रक्षा खरीद एजेंसी ने राफेल उत्पादन कॉन्ट्रैक्ट के पांचवें दौर के लिए डसॉल्ट एविएशन और उसके प्रमुख उपकरण आपूर्तिकर्ताओं, थेल्स, सफ्रान और एमबीडीए को जानकारी दे दी है।

FASF को पांचवीं पीढ़ी से आगे का विमान माना जाता है। इसे कुछ प्रमुख वित्तीय और तकनीकी रूप से एडवांस यूरोपीय देशों द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। इसके साथ ही, FASF की कीमत राफेल से दो से तीन गुना ज्यादा हो सकती है। फ्रांस ने फिलहाल अपने स्वदेशी 4.5-पीढ़ी के राफेल पर ही भरोसा जताया है, हालांकि उसे अपग्रेड किया गया है।

दूसरी तरफ, भारत के पास पांचवीं पीढ़ी का विमान कार्यक्रम, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) है, जिसे पहले ही दो स्टेप्स में विभाजित किया जा चुका है, आंशिक स्टील्थ और पूरा स्टील्थ। भारत का AMCA प्रोग्राम अभी डिजाइनिंग के चरण में ही है, जबकि चीन अपने स्टील्थ फाइटर जेट के बेड़े को बढ़ाकर 400 तक की योजना बना चुका है और पाकिस्तान ने इसी महीने चीन से स्टील्थ फाइटर जेट J-31 खरीदने की घोषणा की है।

लिहाजा अब भारत के पास क्या ऑप्शंस हैं, इसको लेकर सोच-विचार चल रहा है।

FCAS Program क्या है?

FCAS Program तीन देशों, जिनेम फ्रांस, जर्मनी और स्पेन शामिल हैं, उनका ज्वाइंट प्रोग्राम है, जिसके तहत पांचवीं पीढ़ी से ज्यादा का फाइटर जेट बनाना है, जो यूके और फ्रांस के बीच समान नाम वाली पिछली परियोजना के आगे का हिस्सा है।

डसॉल्ट एविएशन (फ्रांस), एयरबस (जर्मनी), और इंद्र सिस्तेमास (स्पेन) इसके को-डेवलपर्स हैं। एफसीएएस में अगली पीढ़ी के हथियार प्रणाली (एनजीडब्ल्यूएस) के साथ-साथ भविष्य के ऑपरेशनल युद्धक्षेत्र में अन्य हवाई संपत्तियां शामिल होंगी। विमान ड्रोनों के लिए रिमोट कैरियर एंड कंट्रोलर व्हीकल के रूप में भी काम करेगा।

डसॉल्ट, नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर (एनजीएफ) के लिए मुख्य ठेकेदार होगा, जबकि एयरबस रिमोट कैरियर वाहनों और क्लाउड संचार के विकास का नेतृत्व करेगा, वहीं, सफ्रान एयरक्राफ्ट इंजन एमटीयू एयरो इंजन के साथ एयरो-इंजन और इसके एकीकरण को विकसित करेगा। थेल्स और एमबीडीए महत्वपूर्ण डेवलपमेंट्स का काम संभालेंगे।

FCAS प्रोग्राम में एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशंस की भी क्षमता होगी और यह स्टम ऑफ सिस्टम अप्रोट को फॉलो करेगा, जिसका प्रारंभिक काम 2017 में शुरू हुआ था।

जून 2023 में, बेल्जियम इसका पर्यवेक्षक बन गया और 2025 के मध्य तक इस कार्यक्रम में शामिल हो सकता है। बेल्जियम की प्लानिंग 2040 के आसपास अपने बेड़े से फ्रांसीसी राफेल को बदलना है और उसकी जगह जर्मनी के टाइफून और स्पेन के EF-18 हॉर्नेट को शामिल करने पर विचार चल रहा है।

क्या है सुपर राफेल F-5 प्रोजेक्ट?

जब तक एफसीएएस चालू नहीं हो जाता, फ्रांस को हवाई और परमाणु डेटरेंस, दोनों के लिए एक शीर्ष-स्तरीय लड़ाकू विमान की आवश्यकता होगी और फ्रांस के पास वर्तमान में जो राफेल है, वो F4 स्टैंडर्ड का है।

जर्मनी के विपरीत, जो एफसीएएस कार्यक्रम में भागीदारों में से एक है, फ्रांसीसियों ने अमेरिकी एफ-35 का अधिग्रहण नहीं किया है। F5 संस्करण को फ्रांसीसी सरकार के सैन्य नियोजन कार्यक्रम 2024-2030 के तहत विकसित किया जाएगा।

एफसीएएस में देरी को देखते हुए यह योजना ‘बी’ पर फ्रांस काम कर रहा है। डसॉल्ट और उसके साझेदार पहले से ही F5 मानक पर काम कर रहे हैं, जो लगभग 2030 तक तैयार हो जाएगा। और फिर उसे अपग्रेड किया जाएगा। F5 अगली पीढ़ी के यूरोपीय विमानों के साथ कुछ विशेषताएं साझा करेगा। F5 मानक में नए सेंसर, हथियार और संचार और सहयोग करने की तेज़ और अधिक सुरक्षित क्षमता होगी।

विमान में एक बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट होगा, जिसमें नवीनतम जैमिंग सिस्टम और एंटी-रेडिएशन हथियारों का उपयोग करके दुश्मन की डिफेंस (एसईएडी/डीईएडी) को दबाने या नष्ट करने की एडवांस क्षमता से लैस होगी।

यह मौजूदा स्पेक्ट्रा ईडब्ल्यू और जैमिंग सिस्टम का एक और विकास होगा, जो रडार जैमिंग, ईसीसीएम, इंफ्रारेड और रडार डिकॉय को जोड़ता है और विमान के चारों ओर एक “रक्षात्मक बुलबुला” भी बनाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, भविष्य की सतह पर हमला करने वाली और जहाज-रोधी मिसाइलें विकसित की जा रही हैं, और इसी तरह लंबी दूरी के हवा से हवा में मार करने वाले हथियार भी विकसित किए जा रहे हैं। F5 को एंग्लो-फ़्रेंच फ़्यूचर क्रूज़ मिसाइल (FCM) और फ़्यूचर एंटी-शिप मिसाइल (FASM) ले जाने के लिए भी संशोधित किया जाएगा। F5 के लिए थेल्स RBE2 XG रडार की योजना बनाई गई है।

शुरुआत में F5 की डिलीवरी 2029 में शुरू करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब ये प्रोजेक्ट लेट चल रहा है और 2027 में इसपर काम शुरू होने की ही संभावना है। लिहाजा, इस प्रोजेक्ट में देर होगा।

क्या भारत राफेल-5 खरीद सकता है?

भारतीय सेना के लड़ाकू विमान बेड़े वर्तमान में दो प्रमुख मुद्दों का सामना कर रहे हैं। पहला, भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की संख्या की कमी है, जो अधिकृत 42 स्क्वाड्रनों की तुलना में घटकर 31 रह गई है, और भारतीय नौसेना (आईएन) को अतिरिक्त कैरियर-आधारित विमानों की जरूरत है।

जबकि इंडियन एयरफोर्स पहले से ही LCA Mk1 और Mk2 वेरिएंट में से प्रत्येक के 200 से ज्यादा तक की क्षमता तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इस अंतर को भरने में काफी वक्त लगेगा।

राफेल इंडियन एयरफोर्स के 114 विमान प्रस्ताव के दावेदारों में से एक है। राफेल-मरीन को कथित तौर पर भारतीय नौसेना द्वारा शॉर्टलिस्ट किया गया है। IAF के पास पहले से ही दो और राफेल स्क्वाड्रन के लिए बुनियादी ढांचा है।

दूसरा मुद्दा, पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का है। चीन के पास पहले से ही 150 J-20 पांचवीं पीढ़ी के विमान हैं, और PLA वायु सेना की योजना 2027 तक इनमें से 400 विमान हासिल करने की है।

पाकिस्तान पांचवीं पीढ़ी के जे-31 विमान हासिल करने के लिए पहले ही चीन से संपर्क कर चुका है और 2029 की समयसीमा की बात कर रहा है। भारत के घरेलू पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एएमसीए की पहली उड़ान 2029 के आसपास होने की संभावना है और इसे 2035 की शुरुआत में शामिल किया जा सकता है। स्टील्थ का स्तर अभी भी विकसित होना बाकी है। किसी भी स्थिति में, विकास को दो चरणों में विभाजित किया गया है: Mk1 और Mk2।

अमेरिका अपने F-35 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की पेशकश नहीं कर रहा है। यदि वे ऐसा करते भी हैं, तो उस निर्णय से उनके गंभीर संबंध जुड़े हो सकते हैं। भारत रूस के अलावा दूसरे विकल्पों को आजमाना चाहता है। भारत के पास एफसीएएस कार्यक्रम में शामिल होने का विकल्प है, लेकिन अब इसमें काफी देरी हो चुकी है।

लिहाजा, भारतीय वायुसेना अपनी दोनों आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मेक-इन-इंडिया राफेल पर विचार कर सकता है। नई खरीदारी F4 मानक की हो सकती है। F5 मानक में अपग्रेड करने की प्रतिबद्धता के लिए एक कमिटमेंट हो सकती है। फ्रांस एक आजमाया हुआ दोस्त रहा है। गणतंत्र दिवस 2024 पर फ्रांस के राष्ट्रपति सम्मानित अतिथि होंगे। वहीं, भारत 1950 के दशक से फ्रांसीसी लड़ाकू विमान उड़ा रहा है। लड़ाकू विमान के विकल्प और लागत जटिल मैट्रिक्स हैं। लिहाजा, इस बात की संभावना बन सकती है, कि भारत राफेल प्लस की तरफ विचार करे।

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