नई दिल्ली: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सुरक्षा व्यवस्था केंद्रीय मृह मंत्रालय ने बढ़ा दी है. अब उन्हें जेड प्लस कैटेगरी की सुरक्षा दी गई है. पूरे देश में वह जहां कहीं भी जाएंगे, इसी कैटेगरी की सुरक्षा के घेरे में रहेंगे. लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अध्यक्ष की सुरक्षा बढ़ाने का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है.
पर क्या आपको पता है कि देश में महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है, जहाँ सुरक्षा घेरा उसी हिसाब से घटता-बढ़ता है? आइए जान लेते हैं कि देश में अति महत्वपूर्ण हस्तियों को कितनी तरह की सुरक्षा व्यवस्था देने की व्यवस्था है?
जेड प्लस सुरक्षा व्यवस्था सबसे अहम
भारत में जेड प्लस सुरक्षा व्यवस्था सबसे अहम मानी जाती है. इसमें सामान्य तौर पर 24 घंटे-सातों दिन 55 जवान वीआईपी की सुरक्षा में तैनात होते हैं. इस दस्ते में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स यानी एनएसजी के कमांडो शामिल होते हैं. ये सभी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के घर से लेकर दफ्तर तक, यात्राओं में भी आसपास होते हैं. अत्याधुनिक हथियारों से लैस ये जवान पलक झपकते दुश्मन को धूल चटाने की स्थिति में होते हैं. इनकी ट्रेनिंग बेहद सख्त होती है.
टीम में शामिल हर सदस्य मार्शल आर्ट और निहत्थे युद्ध कौशल में भी माहिर होता है. एनएसजी जवानों का चयन केन्द्रीय अर्ध सैनिक बलों के जवानों में से किए जाने की व्यवस्था है. अपने देश के करीब 40 VVIP को इस कैटेगरी की सुरक्षा व्यवस्था दी गई है. यह संख्या कई बार घटती-बढ़ती रहती है. जेड प्लस कैटेगरी की सुरक्षा व्यवस्था वाले अति महत्वपूर्ण हस्तियों में गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत जैसे लोग शामिल हैं.
इन कैटेगरी में भी होती है वीआईपी की सुरक्षा
जेड प्लस कैटेगरी के बाद जेड कैटेगरी की सुरक्षा व्यवस्था आती है. इसमें एनएसजी के छह जवानों के साथ अलग-अलग सुरक्षा बलों के 22 जवान शामिल होते हैं. वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा घेरे में 11 जवान हरदम तैनात किए जाते हैं. इस व्यवस्था में एक से दो कमांडो और दो पीएसओ शामिल होते हैं. अगली श्रेणी होती है वाई श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था की, जिनमें एक-दो कमांडो और पुलिसकर्मियों के साथ ही आठ जवानों का सुरक्षा घेरा बनाया जाता है. इसमें दो पीएसओ भी शामिल होते है. देश में कई लोगों को इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की गई है.
केंद्र सरकार के पास होता है सुरक्षा का फैसला
इन सभी कैटेगरी की सुरक्षा व्यवस्था का फैसला केन्द्रीय गृह मंत्रालय लेता है. इसके लिए एक अधिकार प्राप्त कमेटी है, जो विभिन्न स्रोतों से प्राप्त इनपुट के हिसाब से सुरक्षा-व्यवस्था बढ़ाने-घटाने आदि से जुड़े फैसले लेती है. अनेक बार लोग सुरक्षा के लिए आवेदन करते हैं और राज्य सरकार में उपलब्ध गृह मंत्रालय उस पर विचार करके अपनी सिफारिश केंद्र को भेजता है लेकिन आम तौर पर अतिमहत्वपूर्ण हस्तियों की सुरक्षा का फैसला केंद्र-राज्य आपसी समन्वय से करते हैं. देश में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था इन कैटेगरी से अलग है.
