नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की सियासत में कांग्रेस दोबारा से खड़े होने के लिए कई सियासी प्रयोग करके देख चुकी है, लेकिन अभी तक राजनीतिक सफलता नहीं मिल सकी है. 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष का बदलाव किया है. बृजलाल खाबरी की जगह अजय राय को कमान सौंपने के साथ ही कांग्रेस के तेवर और अंदाज बदल गए हैं. वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अजय राय ने यूपी के प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार संभाला और जिस तरह से कांग्रेसियों ने हर-हर महादेव के नारे बुलंद किए हैं, उससे एक बात तो साफ है कि यूपी में बीजेपी से मुकाबला करने के लिए कांग्रेस सॉफ्ट ‘हिंदुत्व’ की राह पर अपने कदम बढ़ा दिए हैं.
हिंदुत्व के इर्द-गिर्द देश और प्रदेश की सियासत सिमटी जा रही है. सत्तापक्ष से लेकर विपक्ष के सभी दल हिंदुत्व के एजेंडे पर अपने राजनीतिक समीकरण सेट करने में जुटे हैं. अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर को बीजेपी अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर 2024 के लोकसभा चुनाव में उम्मीद पाले हुए है तो कांग्रेस मध्य प्रदेश और राजस्थान में हिंदुत्व की राह ही अपने दांव चल रही है. कमलनाथ खुद को हनुमान भक्त तो भूपेश बघेल रामभक्त बता रहे हैं.इस कड़ी में अब में यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का नाम भी जुड़ गया है, जो खुद को शिवभक्त के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं.
‘हिंदुत्व’ की राजनीति से निकले हैं अजय राय
आरएसएस और बीजेपी की ‘हिंदुत्व’ की राजनीति से निकले अजय राय अब कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हैं. बीजेपी की हिंदुत्व पॉलिटिक्स का मुकाबला करने के लिए अजय राय ने भी अब इसके नक्शेकदम पर अपने कदम बढ़ा दिए हैं. इसकी झलक गुरुवार को अजय राय के शपथ ग्रहण में ही दिख गई. हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अजय राय ने कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष पद ग्रहण किया. हिंदू पंचाग से निकाले गए शुभ मुहूर्त पर ही अजय राय ने कार्यभार संभाला.
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के उत्तर प्रदेश कार्यलय के जिम्मेदारों को अजय राय ने बता दिया था कि निश्चित शुभ घड़ी यानि शाम के चार बजे तक ही है. यही वजह थी कि मुहूर्त खत्म होने से पहले लगभग साढ़े तीन बजे अजय राय ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद का कार्यभार मंच से संभाला. उन्होंने कहा कि मैं प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी बंद कमरे में नहीं, बल्कि मंच से और कार्यकर्तओं को साक्षी मानते हुए ले रहा हूं. इस दौरान पूरे समय तक हर-हर महादेव के नारे पूरे पंडाल में गूंजते रहे हैं.
बीजेपी ने अपने नाम कर रखा है जय श्रीराम का नारा!
बीजेपी के कार्यकर्ता जय श्रीराम का उद्घोष करते हैं. बीजेपी ने इस नारे को अपने नाम कर रखा है. ऐसे में अजय राय के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अब लगता है कि कांग्रेसी हर-हर महादेव के नारे बुलंद करके अपने नेताओं का हौसला बढ़ाएंगे. गुरुवार को अजय राय के काफिले से लेकर वाराणसी तक यह नारा गूंजता रहा. पार्टी दफ्तर के मंच पर जैसे ही अजय राय पहुंचे तो हर-हर महादेव के नारों से पूरा पांडाल गूंज उठा.
अजय राय से लेकर प्रमोद तिवारी और सलमान खुर्शीद तक सभी कांग्रेसी नेताओं के भाषण के दौरान कार्यकर्ताओं ने हर-हर महादेव का नारा बुलंद किया. इससे साफ है कि कांग्रेस के छोटे-बड़े कार्यक्रमों में यह नारा हर रोज सुनाई पड़ सकता है. इसे कांग्रेस में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि अभी तक कांग्रेस के कार्यक्रमों में सिर्फ तालियां बजती थी और गांधी परिवार के नाम का ही नारा बुलंद किया जाता रहा है. लेकिन अब हर-हर महादेव के नारों का उद्घोष सुनाई पड़ेगा?
हिंदुत्व की पॉलिटिक्स को आगे बढ़ाएंगे अजय राय
अजय राय ने शपथ ग्रहण के दौरान उनके संबोधन से पहले वैदिक मंत्रोच्चार हुआ और फिर शंखनाद. अजय राय ने माइक संभालते ही कहा कि वह काशी की परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं. हर कार्य की शुरुआत वो गणेश स्तुति से करते हैं. इसके बाद उन्होंने वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ के उच्चारण के साथ संबोधन शुरू किया. अजय राय ने अपना लंबा समय बीजेपी में काटा है. आरएसएस के छात्र संगठन एबीवीपी से अजय राय ने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया और तीन बार बीजेपी से विधायक रहे. इस तरह अजय राय ने हिंदुत्व की पॉलिटिक्स को लंबे समय तक किया है, जिसे अब कांग्रेस में आगे बढ़ाते नजर आएंगे.
कांग्रेस हिंदुत्व की राह पर क्यों?
दरअसल 2014 लोकसभा चुनाव के बाद से देश का राजनीतिक पैटर्न पूरी तरह से बदल गया है. उत्तर प्रदेश अब बहुसंख्यक (हिंदू) समाज केंद्रित राजनीति हो गई है और इस फॉर्मूले के जरिए बीजेपी लगातार चुनाव जीत रही है. कांग्रेस लंबे समय तक मुस्लिम मतदाताओं पर फोकस राजनीति करती रही है, जिसके चलते बीजेपी ने कांग्रेस को मुस्लिम परस्त पार्टी के तौर पर स्थापित कर दिया है. इसी टैग को हटाने और अपनी छवि को बदलने के लिए कांग्रेस ने सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति की तरफ कदम बढ़ाया है ताकि हिंदू वोटों के बीच अपनी पैठ जमा सके. मुस्लिम वोट 2014 के बाद से आप्रसंगिक हो गया है.
कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व की पॉलिटिक्स करके हिंदू और मुस्लिम दोनों ही वोटों को साधे रखना चाहती है. अजय राय ने काशी की परंपरा को कांग्रेस से जोड़ते हुए कहा कि उनके पास सिर्फ महादेव ही नहीं कबीर, संत रविदास और गंगा मैया भी हैं. बुद्ध और अन्य ऋषि परंपरा के लोग हैं. इस तरह से अजय राय ने भविष्य की सियासत को खींचने और कांग्रेस के सोशल इंजीनियरिंग को भी मजबूत करने का दांव चला है. देखना यह है कि पार्टी का बदला हुआ मिजाज क्या कांग्रेस के लिए सियासी संजीवनी साबित होगा?
