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जल जीवन मिशन योजना में हुआ 500 करोड़ का भ्रष्टाचार : मोहित डिमरी

Frontier Desk by Frontier Desk
13/05/25
in देहरादून
जल जीवन मिशन योजना में हुआ 500 करोड़ का भ्रष्टाचार : मोहित डिमरी
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भ्रष्टाचार की शीघ्र जांच नहीं की गई तो पेयजल निगम में करेंगें तालाबंदी

देहरादून। मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा है कि राज्य के विभिन्न विभागों में घोटाले एवं भ्रष्टाचार चल रहे लेकिन केन्द्र सरकार की जल जीवन मिशन के अंदर कई खामियां है और उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अभियंताओं, अधिकारियों एवं ठेकेदारों के गठजोड़ से लगभग 450 -500 करोड का भ्रष्टाचार हुआ है।

उन्होंने कहा कि वहीं मैसर्स यूनिप्रो टेक्नो, इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड हरियाणा की कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने के लिए उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम के मुख्य अभियंता गढ़वाल ने प्रबंध निदेशक को अपनी अनुशंसा दी है लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है क्योंकि इस कंपनी के साथ जल निगम मुख्यालय के मुख्य अभियंता ने इस कंपनी में अप्रत्यक्ष रूप से निवेश किया है।

यहां परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि आरटीआई से खुलासे यह सारा भ्रष्टाचार का प्रकरण सामने आया है और अभियंताओं, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जल जीवन मिशन में यह भ्रष्टाचार किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार, निर्माण कार्यों में आम बात हो गई है और जीरो टॉलरेंस धरातल पर नहीं दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार की जड़े पूरी तरह से पैर पसार चुकी है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी अप्रत्यक्ष रूप से ठेकेदार बन गये है और कंपनी को मुख्य अभियंता गढ़वाल के आदेश के बाद ब्लैक लिस्टेड नहीं किया जा रहा है और उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन अब नल कमीशन मिशन बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि गढ़वाल मंडल में जल जीवन मिशन के तहत करीब 8०० करोड़ की लागत के 44 पेयजल योजनाओं का निर्माण चल रहा है।

उन्होंने कहा कि अधिकारी स्लीपिंग पार्टनर के रूप में काम कर रहे हैं। अधिकतर पेयजल योजनाओं को बाहर की कंपनियों को दिया गया है और जिन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया है, उन कंपनियों को संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी की जा रही है और जल जीवन मिशन में स्थानीय ठेकेदारों को कार्य नहीं दिया जा रहा है।

बाहरी ठेकेदारों को कार्यों के ठेके दिए जा रहे और एक ही हरियाणा की कंपनी जिसे ब्लैक लिस्टेड करने के लिए अनुशंसा की गई है को 372 करोड़ रूपये के 17 प्रोजेक्ट दिये गये है और वहीं दूसरी ओर हल्द्वानी में इसी कंपनी को हल्द्वानी में सौ करोड़ के प्रोजेक्ट देने के कार्य देने की तैयारी चल रही है और यह कंपनी मानकों के विपरित कार्य कर रही है।

पेयजल निगम के मुख्य अभियंता मुख्यालय संजय सिंह की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पेयजल निगम के मुख्य अभियंता मुख्यालय संजय सिंह की स्वयं की अर्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी से लेन देन हुआ है और इसमें भी मुख्य अभियंता की पूरी सांठगांठ हो सकती है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा है कि मुख्य अभियंता की जांच नहीं हो रही है और न ही प्रबंध निदेशक ने कोई कार्यवाही आज तक नहीं की है। वहीं अनेक पंपिंग योजनाओं में भी घोटाले किए गये हे।

उन्होंने कहा कि पेयजल निगम मुख्यालय के मुख्य अभियंता संजय सिंह कंपनी के हिडन पार्टनर है वहीं जबकि पूर्व में मुख्य अभियंता कुमायूं पर आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है। मोहित डिमरी ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या उत्तराखण्ड में स्थानीय या मूल निवासी कॉन्ट्रैक्टर नहीं हैं, जिनसे यह काम करवाये जा सकते थे।

उन्होंने कहा कि इसी तरह नैनीताल में भी सीवरेज और पेयजल योजना के 46 करोड़ के प्रोजेक्ट यूपी की चार कंपनियों को दिए गए। जिसमें दो कंपनी लखनऊ, एक बरेली और एक कानपुर की है। इस अवसर पर मोहित डिमरी ने कहा कि उत्तरकाशी में विश्वबैंक के पैसे से संगराली-पाटा और बौंगाडी पेयजल योजना का निर्माण हुआ और इस पर सात करोड़ की धनराशि खर्च हुई।

बाद में तत्कालीन अभियंता आलोक कुमार, संजय सिंह सहित अन्य अभियंताओं ने जल जीवन मिशन में भी करीब सात करोड़ रूपये इसी योजना पर खर्च किये। जांच होने पर 25 लाख रुपए की वसूली के नोटिस भी इन अभियंताओं को जारी हुए है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की कंपनी को ब्लैक लिस्टेड नहीं किया गया और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों की जांच शीघ्र नहीं की गई तो पेयजल निगम पर तालाबंदी की जायेगी और पेयजल मंत्री व सचिव पेयजल से भी शिकायत की जायेगी और शीघ्र ही कार्यवाही की मांग की जायेगी। इस अवसर पर पत्रकार वार्ता में मनीष, राकेश नेगी, राकेश रावत आदि उपस्थित रहे।

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