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बदलती जीवनशैली के कारण बढ़ रही बीमारियां : डॉ. फारूक

फ्रंटियर डेस्क by फ्रंटियर डेस्क
20/06/26
in देहरादून
बदलती जीवनशैली के कारण बढ़ रही बीमारियां : डॉ. फारूक
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  • जड़ी-बूटियों में छिपा है बेहतर स्वास्थ्य का भविष्य
  • यूजेपीएएच के राष्ट्रीय सेमिनार में आयुर्वेद व आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर हुआ मंथन

देहरादून। फाइटोकेमिस्ट्री और आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध एवं नवाचार को नई दिशा देने के उद्देश्य से यूनिवर्सिटीज जर्नल ऑफ फाइटोकेमिस्ट्री एंड आयुर्वेदिक हेल्थ्स (यूजेपीएएच) की ओर से शनिवार को यूकॉस्ट सभागार में एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और आयुर्वेद विशेषज्ञों ने भाग लेकर पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तबस्सुम नकवी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां आज भी स्वास्थ्य प्रबंधन में अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि कई पुरानी और जीवनशैली जनित बीमारियों के प्रभावी उपचार और नियंत्रण में आयुर्वेद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सेमिनार को संबोधित करते हुए यूजेपीएएच के मुख्य संपादक एवं हेल्थ एंड वेलनेस काउंसिल (एचडब्ल्यूसी) देहरादून इकाई के अध्यक्ष डॉ. एस. फारूक ने जड़ी-बूटियों में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुणों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण बढ़ रही बीमारियों और कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने में औषधीय पौधों से प्राप्त प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि आधुनिक विज्ञान और अत्याधुनिक तकनीक के समावेश से हर्बल दवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.के. त्रिपाठी ने आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में आयुर्वेदिक चिकित्सा की बढ़ती उपयोगिता पर चर्चा की। सेमिनार के दौरान फाइटोकेमिस्ट्री, औषधीय पौधों, आयुर्वेदिक अनुसंधान और स्वास्थ्य विज्ञान से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए।

इस मौके पर असम विश्वविद्यालय, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, उत्तरांचल विश्वविद्यालय तथा डॉल्फिन इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज के प्रशिक्षु छात्रों को सफल प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।

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