Friday, May 8, 2026
नेशनल फ्रंटियर, आवाज राष्ट्रहित की
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
No Result
View All Result
नेशनल फ्रंटियर
Home राष्ट्रीय

भीषण गर्मी से गंगा पर नजर आने लगे रेत के टीले, वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
30/03/22
in राष्ट्रीय, समाचार
भीषण गर्मी से गंगा पर नजर आने लगे रेत के टीले, वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी
Share on FacebookShare on WhatsappShare on Twitter

नई दिल्ली l गर्मी का सितम इस बार वक्त से पहले पड़ने लगा है और इसका असर इंसान तो क्या खुद प्रकृति पर भी दिख रहा है. मार्च के महीने में ही मई-जून की गर्मी सारे रिकार्ड तोड़ती चली जा रही है, तो नदियों पर भी इसका दुष्प्रभाव दिखने लगा है. नदियां अभी से सूखने लगी हैं. वाराणसी में गंगा की ऐसी ही तस्वीर डराने वाली है. अक्सर मई-जून की गर्मी में गंगा में रेत के टीले उभर आते थे, वे अभी मार्च के अंत में ही दिखाई दे रहे हैं, जो वैज्ञानिकों के लिए चिंता का सबब बन गए हैं.

वाराणसी में पारा 41 डिग्री तक पहुंच चुका है. इसका असर ये हुआ कि गंगा नदी अभी से ही सूखने लगी है. वाराणसी के रामनगर के सामने घाट गंगा के बीचों बीच जो रेत के टीले मई-जून में पानी की कमी से उभरा करते थे, वे अभी मार्च के अंत में ही दिखने लगे हैं. गंगा नदी का अभी से सूखना वैज्ञानिकों को भी परेशान कर रहा है. लिहाजा वैज्ञानिक लोगों को आगाह कर रहें हैं और उपाय भी बता रहें हैं.

इस बारे में बीएचयू महामना मालवीय गंगा शोध केंद्र के चेयरमैन और गंगा विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी बताते हैं कि गंगा में पानी का प्रवाह लगातार कम होता जा रहा है. जब गंगा में पानी का प्रवाह कम होता है, तो सिल्ट्रेशन रेट बढ़ जाता है. जिसकी वजह से रेत के टीले दिखते थे.

ये टीले जो पहले मई जून में दिखते थे वे फिर अप्रैल मई में दिखने लगे, लेकिन इस साल तो मार्च में ही रेत के टीले दिखने लगे हैं. प्रवाह कम होने की वजह से ऐसा हो रहा है. गंगा में प्रवाह कम होने के चार वैज्ञानिक कारण हैं. पहला कारण है कि उत्तराखंड में हाइड्रोपॉवर जनरेशन के लिए कई बांध बना दिए गए हैं. दूसरा हरिद्वार के पास भीमगोड़ा कनाल से दूसरे प्रदेशों में पानी डायवर्ट किया जा रहा है. तीसरा कारण है कि गंगा के दोनों तरफ लिफ्ट कैनाल गंगा के पानी को खींचकर खेतों में सिंचाई के लिए दे रहें हैं, जिससे मेन स्ट्रीम में पानी कम हो रहा है. चौथा कारण है कि कोई ऐसी पॉलिसी नहीं है कि गंगा से कोई कितना पानी उपयोग के लिए निकाल सकता है. इसी वजह से गंगा का अधिक दोहन हो रहा है. जिससे ग्राउंड वाटर नीचे जा रहा है.

प्रो. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि इसका दुष्प्रभाव यह होता है कि गंगा में प्रदूषण बढ़ता है. दूसरा जलीय जीवों के लिए खतरा बढ़ता है. इसके उपाय यह हैं कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग हो और प्रॉपर तकनीक इस्तेमाल किया जाए.

About

नेशनल फ्रंटियर

नेशनल फ्रंटियर, राष्ट्रहित की आवाज उठाने वाली प्रमुख वेबसाइट है।

Follow us

  • About us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Sitemap

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .

  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .