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@100 : शिक्षा, नारीशक्ति, संस्कृति…ऐतिहासिक संबोधन में क्या बोले पीएम मोदी

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
30/04/23
in राष्ट्रीय, समाचार
@100 : शिक्षा, नारीशक्ति, संस्कृति…ऐतिहासिक संबोधन में क्या बोले पीएम मोदी
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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम के अंतरगत देशवासियों को संबोधित किया। यह कार्यक्रम का 100वां एपिसोड था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस  कार्यक्रम में कहा कि कई  बार वह खुद लोगों के पत्र पढ़कर भावुक हो जाते हैं। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कई ऐसे लोगों से बात की जो कि समाज में परिवर्तन लाने का काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने आधे घंटे के संबोधन में शिक्षा, संस्कृति, स्वच्छ भारत अभियान, नारीशक्ति, खेल, रोजगार की बात की।

संबोधन में क्या बोले पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार, आज मन की बात का 100वां एपिसोड है। मुझे आप सब के लाखों संदेश मिले हैं। मैंने कोशिश की है कि ज्यादा से ज्यादा संदेशों को समझ सकूं। आपके पत्र पढ़ते हुए कई बार मैं भावुक हो गया। भावनाओं में बह गया। फिर खुद को संभाला भी। आपने मुझे मन की बात के 100वें एपिसोड की बधाई दी लेकिन बधाई के पात्र तो आप सभी श्रोता हैं। आप सभी देशवासियों का धन्यवादा।

जन आंदोलन

साथियो, 3 अक्टूबर 2014 विजयदशमी के पर्व पर हम सबने मिलकर यह यात्रा शुरू की थी। इसका मतलब है बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। कई बार यकीन नहीं होता कि मन की बात को इतने महीने और इतने साल गुजर गए। हर एपिसोड अपने आप में खास रहा। हर बार नवीनता, हर बार नई सफलताओं का विस्तार। देश के कोने-कोने से लोग जुड़े। हर आयुवर्ग के लोग जुड़े। स्वच्छ भारत आंदोलन, बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ, आजादी का अमृत महोत्सव हो, मन की बात की हर बात बन गई जन आंदोलन।

मन की बात पूजा की तरह- पीएम मोदी

मन की बात दूसरे के गुणों से सीखने का माध्यम बन गई है। इस कार्यक्रम में मुझे कभी आपसे दूर नहीं होने दिया। यहां आने के बाद मुझे लगा कि यहां का जीवन अलग है। शुरुआती दिनों में मैं खाली खाली महसूस करता था। 50 साल पहले अपना घर इसलिए नहीं छोड़ा था कि अपने ही देश के लोगों से संपर्क कट जाएगा। मन की बात ने मुझे इस चुनौती का समाधान दिया। सामान्य लोगों से जुड़ने का रास्ता दिया। पदभार व्यवस्था तक सीमित रहा, लेकिन जनभाव कोटि कोटि जनों के साथ मेरे भाव विश्व का अटूट अंग बन गए। हर महीने मैं देशवासियों के अद्भुत स्वरूप का दर्शन करता हूं। मैं देशवासियों की मेहनत की पराकाष्ठा को देखता हूं. मुझे लगता ही नहीं है कि मैं आपसे थोड़ा भी दूर हूं। मेरे लिए यह कार्यक्रम नहीं है बल्कि एक आस्था, पूजा और व्रत है। जैसे लोग ईश्वर की पूजा करते हैं तो प्रसाद की थाल लाते हैं। मेरे लिए मन की बात ईश्वर रूपी जनता जनार्दन के चरणों में प्रसाद की थाल की तरह  है।

मन की बात अहम से समष्टि की यात्रा है। आप कल्पना करेंगे कि मेरा कोई भी देशवासी 40 साल से निर्जन पहाड़ी पर  पेड़ लगा रहे हैं। कितने ही लोग जल संरक्षण के लिए तालाब बना रहे हैं। उसकी सफाई कर रहे हैं। कोई 30 साल से बच्चों को पढ़ा रहा है। कोई गरीबों की मदद कर रहा है। कितनी ही बार मन की बात में इनका जिक्र करते हुए मैं भावुक हो गया। आकाशवाणी के साथियों को इसे फिर से रिकॉर्ड करना पड़ा। आज पिछला कितना ही कुछ आंखों के सामने आए जा रहा है। देशवासियों ने मुझे खुद को खपाने की प्रेरणा दी है। हम इसमें जिन लोगों का जिक्र करते हैं, वे हमारे हीरो हैं जिन्होंने इसे जीवंत बनाया है।

सेल्फी विद डॉटर

मेरी इच्छा है कि एक बार फिर उनके पास जाकर उनकी यात्रा के बारे में जानें। मेरे साथ जुड़ रहे हैं हरियाणा के सुनील जबरान जी। उनका प्रभाव इसलिए पड़ा क्योंकि हरियाणा में जेंडर रेशियो की चर्चा हुई। सुनील जी के सेल्फी विद डॉटर कैंपेन पर नजर पड़ी तो बहुत असर पड़ा। यह एक ग्लोबल कैंपेन में बदल गया। इसका मुद्दा बेटी को प्रमुखता देने का था। जीवन में बेटी का स्थान कितना बड़ा होता है, इस अभियान से पता चला। ऐसे अनेक प्रयास का परिणाम है कि हरियाणा में जेंडर रेशियो सुधरा है।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी सुनील जबरान जी से बात करते हैं। प्रधानमंत्री ने इस बातचीत के बाद कहा, सेना हो या खेल जगत जब भी महिलाओं की उपलब्धियों की बात की है, खूब प्रशंसा हुई। छत्तीसगढ़ की महिलाओं की चर्चा की। ये महिलाएं स्वयं सहायता समूह के जरिए सफाई करती हैं। तमिलनाडु की महिलाओं ने हजारों टेराकोटा कप निर्यात किए। महिलाओं ने नाग नदी को जीवित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके बाद जम्मू-कश्मीर के मंजू अहमद से बात की जो कि पेंसिल और स्लेट का व्यवसाय करते हैं। उन्होंने कहा कि इससे बहुत लोगों को फायदा मिला है। इससे नई पहचान बनी है और बहुत सारे लोग उनके पास आ रहे हैं।

हमारे देश में बहुत सारे लोग हैं जो कि मेहनत के दम पर सफलता के शिखर तक पहुंचे हैं। बेतिया के प्रमुख जी ने या गढ़ मुक्तेश्वर के संतोष जी ने काम शुरू किया तो वह लोगों के लिए प्रेरणा बने। हमने मेक इन इंडिया से स्पेस स्टार्टअप तक की चर्चा मन की बात में की। हमने मणिपुर की विजय शांति देवी का भी जिक्र किया था। वह कमल के रेशों से कपड़े बनाते हैं. आज वह हमारे साथ फोन पर  हैं। प्रधानमंत्री मोदी विजय शांति से बात करते हैं।

पीएम मोदी ने आगे कहा, इस कार्यक्रम के जरिए कितने ही जन आंदोलनों ने जन्म लिया है। जैसे की हमारे खिलौनों को फिर से स्थापित करना का काम मन की बात से ही शुरू हुआ था। हमने गरीब छोटे दुकानदारों से मोलभाव ना करने की मुहिम भी शुरू हुई थी। हर घर तिरंगा  अभियान भी मन की बात से शुरू हुआ। ऐसे कई उदाहरण हैं जो कि समाज को प्रेरित करने का कारण बने। ऐसा ही बीड़ा प्रदीप सांगवान जी ने भी उठाया था। उनके क्लीनिंग हिमलयाज अभियान की चर्चा हुई थी।

कार्यक्रम में यूनेस्को की डीजी ने क्या कहा

मैं इस अवसर के लिए धन्यवाद देती हूं। यूनेस्को और भारत का लंबा इतिहास रहा है। शिक्षा, संचार और अन्य मामलों में हमने साथ में काम किया है। यूनेस्को प्रयास कर रहा है कि दुनिया में 2030 तक सबको शिक्षा मिले। यूनेस्को संस्कृति को बचाने के लिए भी काम करता है। हम अंतरराष्ट्रीय अजेंडे के टॉप पर शिक्षा और संस्कृति को रखना चाहते हैं।

इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि जिस बारे में यूनेस्को की डीजी ने बात की है वे मन की बात कार्यक्रम के प्रमुख मुद्दे रहे हैं. आज इस दिशा में देश जो भी काम कर रहा है,  वह काफी सराहनीय हैं। वर्षों पहले गुजरात में बेहतर शिक्षा के लिए गुणोत्सव और प्रवेश उत्सव जैसे कार्यक्रम जन भागीदारी के अद्भुत मिसाल बने थे। ऐसे कई कार्यक्रमों को हमने हाईलाइट किया। एक बार हमने ठेले पर चाय बेचने वाले दीप प्रकाश जी की चर्चा की थी जो कि गांव के बच्चों को शिक्षा देते हैं। ऐसे अनेक शिक्षको ंके उदाहरण हमने मन की बात में लिए हैं। हमने सांस्कृति सुरक्षा की बात भी मन की बात में की है। देश के कोने-कोने से लोगों ने चिट्ठी लेकर ऐसे उदाहरण भेजे हैं। हमने देशभक्ति पर गीत, लोरी और रंगोली की भी स्पर्धा करवाई थी। मेरे विश्वास है कि सामूहिक प्रयास से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

इस साल हम जी20 की अध्यक्षता भी कर रहे हैं. हमारे उपनिषदों का मंत्र है, चरैवेति, चरैवेति, चरैवेति। आज इसी चरैवेति की भावना के साथ मन की बात का 100वां एपिसोड पूरा कर रहे हैं। भारत के सामाजिक तानेबाने को मजबूती देने में मन की बात धागे की तरह है जो इसे जोड़े रहता है। हर एपिसोड में देशवासियों ने दूसरों को प्रेरणा दी है। हर देशवासी दूसरे देशवासी की प्रेरणा बना है। यह हमेशा सद्भावना और कर्तव्य भावना से ही आगे बढ़ा है। आजादी के अमृतकाल में यही सारात्मकता देश को आगे ले जाएगी। यह देश की नई परंपरा भी बन रही है। इसमें सबका प्रयास की भावना के द र्शन होते है। मैं आकाशवाणी के साथियों को भी धन्यवाद देता हूं जो कि बहुत धैर्य के साथ कार्यक्रम को रिकॉर्ड करते हैं। वे अनुवादक जो कम समय में अनुवाद करते हैं। दूरदर्शन. देशभर के टीवी चैनल्स, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोग जो बिना कमर्शल ब्रेक के इस कार्यक्रम को दिखाते हैं। उनका  आभार है। आखिरी में भारत में आस्ता रखने वाले लोगों का मैं आभार व्यक्त करता हूं।

मेरे मान में आज इतना कुछ कहने को है कि समय और शब्द कम पड़ जाएंगे। लेकिन मुझे विश्वास है कि आप मेरी भावनाओं को समझेंगे। अगले महीने हम एक बार फिर मिलेंगे। फिर से देशवासियों की सफलताओं को सिलेब्रेट करेंगे। धन्यवाद, नमस्कार।

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