Monday, May 11, 2026
नेशनल फ्रंटियर, आवाज राष्ट्रहित की
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
No Result
View All Result
नेशनल फ्रंटियर
Home देहरादून

शिक्षा के साथ अख़लाक़ व इंसानियत भी जरूरी :  ख्वाजा एम. शाहिद

फ्रंटियर डेस्क by फ्रंटियर डेस्क
09/05/26
in देहरादून
शिक्षा के साथ अख़लाक़ व इंसानियत भी जरूरी :  ख्वाजा एम. शाहिद
Share on FacebookShare on WhatsappShare on Twitter

  • संस्कारों को मजबूत किए बिना समाज में सुधार संभव नहींः डॉ. एस फारूक
  • ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट के सेमिनार में शिक्षा के साथ संस्कार, तरबियत और सामाजिक जिम्मेदारियों पर जोर

देहरादून। ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट की ओर से शनिवार को तस्मिया एकेडमी, इंदर रोड में ‘अमन और तालीम’ विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा के मौजूदा स्वरूप, समाज में बढ़ती नैतिक गिरावट, पारिवारिक मूल्यों और इंसानी अख़लाक पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि केवल डिग्रियां और बड़े पैकेज हासिल करना ही तालीम का मकसद नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा ऐसी हो जो बेहतर इंसान और जिम्मेदार समाज तैयार करे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट के संरक्षक डॉ. एस. फारूक ने की। जबकि संचालन राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल राशिद ने किया। इंडियन केंब्रिज स्कूल के निदेशक सय्यद मौहम्मद यासिर ने स्वागत भाषण देते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया।

संस्कारों को मजबूत किए बिना समाज में सुधार संभव नहीं

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. एस. फारूक ने कहा कि स्कूलों में संस्कार और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है। बच्चों को केवल किताबों की शिक्षा नहीं, बल्कि परिवार, पड़ोस और समाज के अधिकारों की पहचान और उन्हें निभाने की सीख भी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब घरों और समाज में जिम्मेदारियां समझी जाएंगी, तभी अमन और सामाजिक संतुलन कायम हो सकेगा।

तालीम का मिशन इंसानियत और समाज निर्माण होना चाहिए

ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष ख्वाजा एम. शाहिद ने कहा कि आज शिक्षा संस्थानों की कामयाबी का पैमाना केवल बड़े पैकेज और नौकरियां बनकर रह गया है। तालीम का दायरा तो बढ़ा है, लेकिन समाज में अमन, भाईचारा और इंसानियत कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि आज मां-बाप का सम्मान कम हो रहा है, पड़ोसियों के हक अदा नहीं किए जा रहे और सामाजिक रिश्तों में दूरी बढ़ती जा रही है।

जरूरत इस बात की है कि पैगंबर मोहम्मद साहब के अख़लाक और सीरत को सामने रखकर तालीम का ऐसा निजाम तैयार किया जाए, जो एक सभ्य और जिम्मेदार समाज बना सके। ख्वाजा एम. शाहिद ने कहा कि जब समाज की सूरत सीरत के जरिए संवरेगी, तभी देश और समाज में स्थायी अमन और शांति स्थापित हो सकेगी।

अख़लाक और तरबियत की कमी समाज के लिए चिंता का विषय

इदारा इल्म-ओ-खिदमत के अध्यक्ष मुफ्ती अब्दुल खालिक ने कहा कि आज शिक्षा को प्राथमिकता तो दी जा रही है, लेकिन अख़लाक और तरबियत को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि बेटा बड़ा अफसर बनने के बाद भी मां-बाप वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने सबसे पहले खुद अपने जीवन में अमल पेश किया और फिर समाज को तरबियत दी। उन्होंने कहा कि सीरत हमें इंसानियत, रहमत और बेहतर व्यवहार का संदेश देती है। मोहम्मद साहब ने पूरी जिंदगी न किसी बच्चे पर हाथ उठाया और न ही किसी महिला के साथ कठोर व्यवहार किया।

उच्च शिक्षा से ही तरक्की का रास्ता खुलेगा

काज़ी दारूल कज़ा देहरादून मुफ्ती सलीम अहमद क़ासमी ने कहा कि तालीम ही तरक्की और कामयाबी का सबसे बड़ा जरिया है। उन्होंने युवाओं से उच्च शिक्षा की ओर बढ़ने और समाज में शिक्षा का वातावरण मजबूत करने की अपील की।

स्कूलों में नैतिक शिक्षा और कुरआन की तालीम पर जोर जरूरी

जामिया हमदर्द से आए प्रोफेसर याहया अंजुम ने कहा कि स्कूलों में कुरआन और नैतिक शिक्षा को शामिल करते हुए अपना स्वतंत्र तालीमी निजाम तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इतिहास में अकबर के दौर में रियाज़ी और साइंस भी तालीम का अहम हिस्सा थीं, लेकिन आज हमने मोहम्मद साहब के अख़लाकी पहलू को पीछे छोड़ दिया है।

मेजर कादिर हुसैन ने भी युवाओं को अनुशासन, नैतिकता और देश सेवा से जुड़े प्रेरणादायी विचार बताए। राष्ट्रीय सचिव डॉ. इलियास सैफी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान नीट की तैयारी कर रहे छह प्रतिभाशाली छात्रों को एजाज और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर मौलाना रिसालुद्दीन हक्कानी, मुफ्ती नाजिम अशरफ, मौलाना अब्दुल रब नदवी, सय्यद मौहम्मद यासिर, सय्यद फ़र्रूख, डॉ. इलियास सैफी, सय्यद अर्शी, मौलाना सलमान नदवी, इजहार अहमद खान, हाजी इकबाल हुसैन, मास्टर अब्दुल सत्तार, डॉ. असगर अली, मौलाना अब्दुल मन्नान क़ासमी, फिरोज अहमद एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट एवं सदर आल इंडिया मजलिस मशावरत दिल्ली, ममदुहा मजीद, मुफ्ती वसीउल्लाह कासमी, मुफ्ती जियाउल हक़, मौलाना रागिब, मौहम्मद शाह नज़र, मास्टर आबिद, मास्टर हुसैन अहमद, शमी नाज़ खान, उवैस थानवी, आर के बख्शी, शौकीन अहमद, सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

About

नेशनल फ्रंटियर

नेशनल फ्रंटियर, राष्ट्रहित की आवाज उठाने वाली प्रमुख वेबसाइट है।

Follow us

  • About us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Sitemap

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .

  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .