चाहें केस दर्ज हो जाए मगर पत्नी के लिए मां-बाप को नहीं छोड़ूंगा

गाजियाबाद। अगर केस दर्ज होता है तो हो जाए, चाहें जेल भी जाना पड़ जाए, हर सजा मंजूर है, लेकिन पत्नी के लिए मां-बाप को नहीं छोड़ सकता हूं। जिन्होंने जन्म दिया, गोद में खिलाया, भला उन्हें कैसे छोड़ दूं… यह कहते हुए युवक ने पत्नी के साथ रहने से साफ इन्कार कर दिया। पत्नी की जिद थी कि वह मां-बाप से अलग होकर उसके साथ रहे। इसके लिए किराये का मकान ले। इसके बाद वह चला गया।

परिवार परामर्श केंद्र में वेलेंटाइन डे पर कुल 60 जोड़ों को काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया था। वेलेंटाइन डे, करवा चौथ, दिवाली ऐसे मौके होते हैं जब पति-पत्नी के बीच समझौता होने की संभावना अधिक रहती है। पिछले अनुभव ऐसे रहे हैं कि इन खास दिनों में पति-पत्नी पुरानी बातों को भूलकर नए सिरे से जिंदगी शुरू करने पर राजी हो जाते हैं। मंगलवार को सिर्फ 16 जोड़े ही पहुंचे। दोनों को सुना गया। दो साथ रहने पर राजी हो गए। 14 को अगली तारीख दे दी गई। केंद्र में चल रहे मामलों में 20 फीसदी से ज्यादा ऐसे हैं, जिनमें महिला की मांग है कि पति अपने माता-पिता को छोड़कर उसके साथ अलग रहे। इसके लिए सहमति बनते ही समझौता हो जाता है।

शादी के दो महीने बाद ही तकरार

मां-बाप के लिए पत्नी को छोड़ देने का फैसला लेने वाले राजीव कॉलोनी निवासी युवक ने बताया कि दिल्ली की युवती से उसका शादी दो साल पहले हुई थी। दो महीने बाद ही तकरार शुरू हो गई। पत्नी ने अलग रहने के लिए कहा। इसके लिए इन्कार किया तो पत्नी ने दहेज उत्पीड़न की शिकायत कर दी। काउंसिलिंग के दौरान भी उसने यही शर्त रखी कि अगर पति अपने माता-पिता को छोड़कर उसके साथ अलग रहे तो वह समझौते के लिए राजी हो सकती है। युवक का कहना था कि वह इस शर्त पर कभी राजी नहीं होगा।

शराब छोड़ने के वादे पर मान गई पत्नी

काउंसिलर संजय शर्मा ने बताया कि वसुंधरा निवासी जोड़े में छोटे-मोटे घरेलू झगड़े होते थे, जिसकी वजह से पत्नी घर छोड़कर मायके चली गई थी। काउंसिलिंग के बाद दोनों साथ रहने के लिए मान गए। दूसरे मामले मेें पति शराब पीकर पत्नी पर हाथ उठाता था। पति ने वादा किया कि वह शराब पीना छोड़ देगा और पत्नी का सम्मान करेगा। इसके बाद पत्नी उसके साथ जाने को राजी हो गई।

कुछ लड़के नहीं मानते

परिवार परामर्श केंद्र प्रभारी नेहा चौहान ने बताया कि शादी के शुरुआती दौर में आपसी समझ की कमी के कारण कई जोड़ों में छोटी-छोटी बातों पर तकरार हो जाती है। दो-चार काउंसिलिंग के बाद उनमें समझौता हो जाता है। कुछ मामलों में लड़की परिवार से अलग रहने की मांग करती है। परिवार बसाने के लिए कुछ मान जाते हैं लेकिन कुछ लड़के नहीं मानते हैं।

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