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मिडिल ईस्ट में एक और युद्ध भड़कने की आशंका, इन देशों के बीच बढ़ा टकराव

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
01/11/23
in अंतरराष्ट्रीय, समाचार
मिडिल ईस्ट में एक और युद्ध भड़कने की आशंका, इन देशों के बीच बढ़ा टकराव
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नई दिल्ली: हमास को उकसाकर इजराइल पर हमला करवाने का आरोप झेल रहे ईरान को लेकर अमेरिका ने चेतावनी जारी की है और आशंका जताई जा रही है, कि अमेरिका और ईरान में युद्ध छिड़ सकता है। वाशिंगटन ने मध्य पूर्व में ईरान के अमेरिका विरोधी उकसावे के बारे में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को चेतावनी दी है।

हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच में सालों से तनाव रहा है, लेकिन पिछले हफ्तों में ये तनाव काफी बढ़ गया है और अमेरिका का मानना है, कि ईरान के उकसावे के बाद सीरिया और इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ने अमेरिका के ठिकानों पर 16 ड्रोन और रॉकेट हमले किए हैं। इन हमलों में अमेरिका के कम से कम 21 सैनिक घायल हुए हैं।

अमेरिका ने दी ईरान को चेतावनी

अमेरिका की चेतावनी दो हिस्सों में आई है। 25 अक्टूबर को, जो बाइडेन ने ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई को एक नोट भेजा था, जिसे बाद में उन्होंने प्रेस के सामने प्रस्तुत किया था। इस नोट में जो बाइडेन ने लिखा था, कि “अयातुल्ला को मेरी चेतावनी है, कि यदि वे सैनिकों के खिलाफ जाने की कोशिश करते हैं, तो हम जवाब देंगे, और उन्हें तैयार रहना चाहिए।”

लेकिन गुरुवार को भी मिलिशिया ने अमेरिकी ठिकानों पर फायरिंग की। जिसके बाद उस रात, अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमानों ने इराक सीमा के पास पूर्वोत्तर सीरिया में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और मिलिशिया द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एक हथियार डिपो और गोला-बारूद भंडार पर हमला किया।

अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने इसकी पुष्टि भी की।

अमेरिका के रक्षा सचिव ने कहा, कि “यदि अमेरिकी सेना के खिलाफ ईरान के प्रतिनिधियों द्वारा हमले जारी रहते हैं, तो हम अपने लोगों की सुरक्षा के लिए और आवश्यक कदम उठाने में संकोच नहीं करेंगे… हम सभी राज्य और गैर-राज्य संस्थाओं से आग्रह करते हैं, कि वे ऐसी कार्रवाई न करें जो व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदल जाए।”

ईरान पर हमला करेगा अमेरिका?

ईरान समर्थित मिलिशिया ने इराक और सीरिया में अमेरिकी ठिकानों पर उसके बाद हमला करना शुरू किया, जब 7 मई को हमास ने इजराइल पर हमला किया था और फिर उसके बाद इजराइल ने जवाबी कार्रवाई शुरू की। सूत्रों में इस बात पर मतभेद है, कि क्या रिवोल्यूशनरी गार्ड्स या ईरान के नेतृत्व, या फिर दोनों को घातक हमले की पूर्व सूचना थी।

लेकिन ज्यादातर विश्लेषक इस बात से सहमत हैं, कि तेहरान हमास को फंडिंग, हथियार, खुफिया जानकारी और ऑपरेशनल और रसद सलाह प्रदान करता है।

लेकिन, चाहे उन्हें पता हो या नहीं, कि हमास इजराइल पर हमला करने जा रहा है, ईरानी अधिकारी हत्या के पैमाने से घबरा गए। उन्होंने किसी भी संलिप्तता से स्पष्ट इनकार करते हुए नतीजों को रोकने की कोशिश की। खामेनेई ने 10 अक्टूबर को एक सार्वजनिक संबोधन में जोर देकर कहा, “जो लोग कहते हैं कि हालिया घटना गैर-फिलिस्तीनियों का काम है, उन्होंने गलत अनुमान लगाया है।”

लेकिन, अगर ईरानी शासन इस बात का संकेत देता है, कि हमास के हमले को वो समर्थन नहीं दे रहा है, तो फिर ईरान का ये दावा फीका पड़ जाएगा, कि वो इजराइल के खिलाफ चल रहे ‘प्रतिरोध की धूरी’ है। इसलिए तेहरान ने हमास के साथ गठबंधन के दैनिक आश्वासन और इज़राइल, अमेरिका और पश्चिम के खिलाफ दैनिक धमकियों के साथ अपने बयानबाजी को तेज कर दिया है।

10 अक्टूबर को अपने संबोधन में खामेनेई ने कहा, कि “हम उन लोगों के हाथ चूमते हैं, जिन्होंने हमले की योजना बनाई थी।” इसके अलावा, ईरान के ख़ुफ़िया मंत्री इस्माइल खतीब ने, “ज़ायोनी शासन और उसके समर्थकों के लिए एक कठोर, विनाशकारी, नश्वर और विनाशक बदला लेने की प्रतिज्ञा की।”

ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन ने 26 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को बताया, कि अगर इज़राइल ने गाजा पर हमले जारी रखे, तो अमेरिका भी “आग से नहीं बचा पाएगा”।

क्या अमेरिकी चेतावनी सुनेंगे खामेनाई?

अमेरिका की धमकी का ईरानी शासन पर क्या प्रभाव पड़ा, ये संकेतों से पता चलता है। बाइडेन की सीधी चेतावनी के कई घंटों कर ईरान की सरकारी मीडिया पर इस संबंधित कोई बयान जारी नहीं किया गया। घंटों तक इस्लामिक शासन की दुकानों पर सन्नाटा पसरा रहा।

लेकिन अंत में, अंग्रेजी भाषा की साइट प्रेस टीवी ने अमेरिकी मिसाइलों का उल्लेख किया। लेकिन, इस लेख में ये बताया गया, कि अमेरिका के किन ठिकानों पर आगे मिसाइल हमले हो सकते हैं। लेकिन, कई रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि ईरान को अमेरिका के साथ साथ सऊदी अरब ने भी आगाह किया है, कि वो क्षेत्रीय युद्ध नहीं चाहता है।

इजराइल ने अब गाजा में जमीनी आक्रमण शुरू कर दिया है, लिहाजा अब तेहरान की परीक्षा की घड़ी है, कि वो हमास को बचाने के लिए क्या करता है। क्या वो इजराइल के खिलाफ दूसरा मोर्चा खोलने की हिमाकत कर पाएगा? या फिर उसकी स्थिति सिर्फ हल्ला-गुल्ला तक ही सीमित रहेगी? अगर ईरान गुर्दा दिखाता है, तो फिर मिडिल ईस्ट में एक और युद्ध का द्वार खुल जाएगा।

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