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‘फाइव आइज़’ ने लगाई है भारत-कनाडा के बीच आग, अब क्या करना चाहिए?

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
24/09/23
in अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय
‘फाइव आइज़’ ने लगाई है भारत-कनाडा के बीच आग, अब क्या करना चाहिए?
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नई दिल्ली: नई दिल्ली और ओटावा के बीच राजनयिक विवाद बढ़ता जा रहा है और अब इसकी पुष्टि हो चुकी है, कि खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर ‘फाइज आइज़’ की तरफ से कनाडा को इंटेलिजेंस रिपोर्ट सौंपी गई थी। वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से पुष्टि की है, कि अमेरिका ने ही कनाडा को भारत के खिलाफ इंटेलिजेंस सौंपी थी।

लिहाजा, सवाल उठता है, कि ‘फाइज आइज़’ गठबंधन क्या है और क्या इसमें भारत को शामिल होना चाहिए, क्योंकि बार बार भारत को ‘फाइज आइज़’ में शामिल होने का ऑफर मिलता रहा है। आपको बता दें, कि ‘फाइज आइज़’ में कनाडा के अलावा न्यूजीलैंड, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया हैं।

क्या है ‘फाइव आइज’ गठबंधन?

‘फाइव आईज’ एक खुफिया गठबंधन है जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड शामिल हैं। फाइव आइज़ की उत्पत्ति द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका और ब्रिटेन के कोड-ब्रेकर के बीच अनौपचारिक बैठकों के जरिए हुई थी और फिर 1941 में आधिकारिक तौर पर इसकी नींव रखी गई थी।

अगर देखा जाए, तो आज की दुनिया में ‘फाइव आइज़’ से बड़ा शक्तिशाली खुफिया गठबंधन और नहीं है। 1941 में स्थापना के बाद 1948 में कनाडा और 1956 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को शामिल कर इस गठबंधन काविस्तार किया गया था, जिससे ‘फाइव आइज़’ गठबंधन का निर्माण हुआ।

शुरूआती समय में इस गठबंधन का मुख्य उद्येश्य सोवियत संघ पर कड़ी नजर रखना था और सभी देशों के बीच खुफिया इनपुट को शेयर करना था। बीच में ये गठबंधन धीरे-धीरे बेअसर होने लगा था, लेकिन अमेरिका पर हुए आतंकी हमले के बाद नये सिरे से इस गठबंधन में ऊर्जा का संचार किया गया और एक बार फिर से ये गठबंधन पूरी दुनिया में एक्टिव है।

भारत को शामिल करने की मांग

शीत युद्ध की समाप्ति और सोवियत संघ के पतन के बाद, आतंक के खिलाफ युद्ध और बाद में चीन और रूस के कथित खतरे को देखते हुए धीरे-धीरे ‘फाइव आइज’ के विस्तार की जरूरत महसूस होने लगी। धीरे-धीरे इस संगठन के रणनीतिक उद्येश्य भी बदल गये और हाल के वर्षों में एंग्लोस्फीयर से परे ‘फाइव आइज’ के विस्तार की संभावना के बारे में बार-बार बात की गई है।

उदाहरण के लिए, डॉयचे वेले की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2013 में अमेरिकी सांसदों ने तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा से जर्मनी को गठबंधन में शामिल करने का अनुरोध किया था। 2019 में प्रतिनिधि एडम शिफ के नेतृत्व में एक अमेरिकी कांग्रेस समिति ने भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के एकीकरण के लिए ‘फाइव आइज’ के साथ खुफिया जानकारी साझा करने पर जोर दिया, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति बनाए रखी जा सके।

‘फाइव आईज’ से बौखलाता है चीन

‘फाइव आइज’ में भारत को शामिल करने की काफी तेजी से होती रही है, जिससे चीन काफी ज्यादा चिढ़ा हुआ रहता है। चीन को घेरने के लिए पहले से ही कई गठबंधन बने हुए हैं, जिनमें क्वाड और ऑकस जैसे गठबंधन हैं। लिहाजा चीन ‘फाइव आईज’ को चीन के खिलाफ साजिश के तौर पर देखता है।

इस गठबंधन में ज्यादातर जानकारियां अमेरिकी की तरफ से ही आती हैं और अमेरिका के बाद ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसी इसमें ज्यादा योगदान देता है। वहीं, खुफिया रिपोर्ट्स को लेकर कनाडा, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया का योगदान कम ही रहता है। 2020 में ‘फाइव आइज’ गठबंधन ने विस्तार के संकेत दिए थे, लेकिन भारत इस गठबंधन में शामिल होगा या नहीं, इसको लेकर निश्चित रूख नहीं है। ज्यादातर एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भारत ऐसे गठबंधनों सेगूर ही रहने की कोशिश करता है।

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