सरकारी अनुदान के लिए दो बच्चों के बाप ने शादीशुदा साली से रचा ली शादी, फिर…

महराजगंज l उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में दो बच्चों का बाप अपनी शादीशुदा साली से नवदंपत्ति बन कर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में शादी रचा ली. जिसका फोटो वायरल होने पर समाज कल्याण विभाग समेत जिले के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है. वहीं, अब समाज कल्याण विभाग इस पूरे मामले को लेकर जांच में जुट गई है. सीडीओ गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है. इसकी जांच कराई जा रही है. अगर दोषी पाया जाएगा तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

13 अक्टूबर को हुआ था मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का आयोजन महाराजगंज जिले में 13 अक्टूबर को लक्ष्मी लॉन में आयोजित किया गया था, जिसमें जिले के 233 जोड़ों का इस समारोह में सामूहिक विवाह उनके धर्म व रीति रिवाज के हिसाब से कराया गया था. वर-वधु को आशीर्वाद देने के लिए इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी भी मौजूद रहे. साथ ही साथ विधायक और जिलाधिकारी समेत जनपद के सभी अधिकारी भी मौजूद थे. वहीं, समारोह में जनप्रतिनिधियों ने शासनादेश के तहत वर-वधू को निर्धारित अनुदान और उपहार भी गिफ्ट दिया गया था और उनके सुखमय जीवन के लिए उन्हें आशीर्वाद भी दिया गया था.

विवाहित साली से रचा ली शादी
दरअसल, इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कोल्हुई थाना क्षेत्र के ग्राम सभा बड़िहारी निवासी एक शादीशुदा व्यक्ति अमरनाथ चौधरी द्वारा अपनी ही विवाहित साली से सरकारी अनुदान के लिए विवाह कर लिया. वहीं, जब दोनों का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पूरा मामला सामने आ गया. पता चला कि दोनों मिलकर सरकारी अनुदान के लिए विवाह रचाये थे. इस शादीशुदा शख्स के बच्चे भी हैं. लेकिन, इसके बाद भी सामूहिक विवाह योजना के तहत शादी के लिए पंजीकरण करा लिया और साली से शादी भी रचा ली. शादी समारोह में मिले उपहार को भी उठा लाया. मामला उजागर होने के बाद अब हड़कंप मच गया है और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में जांच कर कार्रवाई की बात कह रहे हैं.

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना 51 हजार होते हैं खर्च
बता दें कि, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गरीब बेटियों के हाथ पीले कराने के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत शादी कराई जाती है. इस योजना में नवविवाहित जोड़े को 51 हजार रुपए का लाभांश दिया जाता है. इसमें लाभार्थी को 10 हजार रुपए नकद, 6 हजार रुपए का सामान और शादी में खर्च और 350 हजार रुपए उनके खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर किए जाते हैं. इस योजना के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन किया जाता है.

सामूहिक शादी समारोह में कथित फर्जीवाड़ा से जिम्मेदारों के होश उड़ गए हैं. प्रति शादी 51 हजार रुपये खर्च होते हैं और सरकार गरीबों की शादी कराने के लिए इतनी रकम खर्च करती है. पंजीकरण के बाद इसका सत्यापन कराया जाता है कि जोड़ा पात्र है या नहीं? इसके बाद भी शादीशुदा शख्स द्वारा अपनी साली से शादी रचाने के मामले ने जिम्मेदारों को बेचैन कर दिया है.


खबर इनपुट एजेंसी से

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