नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त उपहार से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान मामले को तीन जजों की बेंच को रेफर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमण की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि यह दलील दी गई है कि 2013 में दो जजों की बेंच ने बालाजी से संबंधित वाद में फैसला दिया था। उसे दोबारा देखने की जरूरत है साथ ही कई जटिल सवाल सामने आए हैं। ऐसे में मामले को तीन जजों की बेंच को रेफर किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में कई जटिल सवाल हैं जिन पर विस्तार से बहस जरूरी है। साथ ही अर्जी में कहा गया है कि बालाजी संबंधित वाद में दिए गए फैसले को पलटा जाए। ऐसे में हम मामले को तीन जजों को रेफर करते हैं। मामले को सुनवाई के लिए चार हफ्ते बाद लिस्ट किया जाएगा। चीफ जस्टिस रमण ने इस दौरान कहा कि मामले में जो मुद्दे उठाए गए हैं और पक्षकारों ने जो सवाल उठाए हैं उस पर विस्तार से सुनवाई की दरकार है। पहले यह देखना है कि कितना ज्यूडिशियल दखल का स्कोप है। क्या कोर्ट द्वारा एक्सपर्ट बॉडी बनाने से उद्देश्य पूरा होगा? इस तरह के तमाम मुद्दे को पहले देखने की जरूरत है।
पक्षकारों ने दिया बालाजी जजमेंट का हवाला
सुप्रीम कोर्ट में तमाम पक्षकारों ने मुफ्त उपहार से संबंधित मामले में 2013 के बालाजी जजमेंट का हवाला दिया है जिसमें दोबारा विचार करने की दलील दी गई है। बालाजी वाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस तरह की प्रैक्टिस को करप्ट प्रैक्टिस नहीं कहा जा सकता है। मामले में दो जजों का फैसला था। साथ ही मौजूदा मामले की सुनवाई के दौरान कई जटिल प्रश्न ( मुफ्त उपहार और वेलफेयर स्कीम को लेकर तमाम जटिल प्रश्न) सामने आए हैं ऐसे में मामले को तीन जजों को रेफर किया जाता है। मामले की सुनवाई के दौरान याची बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से गुहार लगाई गई है कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह राजनीतिक पार्टियों को मुफ्त उपहार के वादे करने से रोके और नियम तोड़ने वाली पार्टी की मान्यता रद्द हो।
