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स्वतंत्रता सेनानी जस्टिस अब्बास तैय्यब को किया याद

Frontier Desk by Frontier Desk
09/06/24
in देहरादून
स्वतंत्रता सेनानी जस्टिस अब्बास तैय्यब को किया याद
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  • हम अपनी महान विभूतियों को भूल रहेः खजानदास
  • शिक्षा उतनी ही ज़रूरी हैं जितना ऑक्सीजनः जस्टिस अली
  • 1918 में मसूरी में आकर बस गए थे अब्बास तैय्यबजी

देहरादून। स्वतंत्रता सेनानी न्यायमूर्ति अब्बास तैय्यब, जिन्हें ‘छोटा गांधी’ के नाम से जाना जाता है, की 88वीं पुण्य तिथि पर एक सेमिनार का आयोजन रविवार को तस्मिया अकादमी, देहरादून में किया गया, जिन्होंने 9 जून, 1936 को साउथ-वुड एस्टेट, मसूरी में आखिरी सांस ली थी। अब्बास तैय्यबजी एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की और से महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

ट्रस्ट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. एस फारूक ने कहा कि उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश अब्बास तैय्यबजी जलियांवाला बाग नरसंहार से विचलित होकर महात्मा गाँधी के साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में कूद पड़े थे। अतीत की यह बात आज भुला दी गई है। किसे मालूम है कि 4 मई 1930 को जब महात्मा गाँधी ने नमक सत्याग्रह में गिरफ्तारी दी थी तो उन्होनें अब्बास तैय्यबजी को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर कांग्रेस की बागडोर उन्हें सौंप दी थी? वर्तमान पीढ़ी की बात छोड़िये, गाँधी के अनन्य भक्तों में आज कितने लोग है, जिन्हें अब्बास तैय्यबजी के बारे में कोई जानकारी है?

उन्होने कहा कि हमे अपने बुजुर्गों को याद रखना चाहिए, कई देशों में स्कूल में प्रवेश के समय बाप का नाम तक नहीं लिखा जाता, यूरोप में शादी का तसव्वुर जाता रहा। लिव इन रिलेशनशिप का दौर हैं। सरोगेसी मदर का जमाना आ गया हैं। इस दौर में मां बाप को पहचानना मुश्किल हो रहा हैं, मगर हम ऐसे देश में रह रहे हैं, जहा अपने बुजुर्गों को आज भी याद रखा जा रहा हैं। देशभक्त अब्बास तैय्यबजी के जीवन संर्घष को पढ़ने और अपनी नस्लों को बताने की जरूरत है।

वहीं, डॉ. एस फारूक ने कहा कि जस्टिस अगा हैदर ने अपने इस्तीफा दे दिया था, मगर वीर भगत सिंह को फांसी की सजा नहीं दी थी। भगत सिंह को फांसी की सजा सुनाने वाले सर शादीलाल के बारे में जानकारी दी।

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति महबूब अली अध्यक्ष जे.टी.आर.आई. ने कहा कि जो भी राष्ट्र अपने इतिहास और अपने पूर्वजों को भूल जाता है वह प्रगति नहीं कर सकता। हम उनका आदर और सम्मान करते हैं क्योंकि उनके बलिदानों के कारण ही हमें आजादी मिली है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी युवा पीढ़ी को तैय्यब जी के बलिदान के बारे में बताना चाहिए।

हमारे देश में इतिहास पढ़ाया जाता हैं, जिस का उद्देश्य यह भी हैं की हम अपने बुजुर्गों को याद रखते हैं, शिक्षा उतनी ही ज़रूरी हैं जितना आक्सीजन। आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों की मदद करते रहना होगा। तभी समाज को मुख्यधारा से जोड़ सकते हैं। ट्रस्ट के सदस्य कर्नल एम.के.हुसैन ने न्यायमूर्ति अब्बास तैयब के जीवन और कार्यों के बारे में विस्तार से बताया।

मुख्य अतिथि भाजपा विधायक खजान दास ने कहा अब्बास तैय्यब ने आम जनमानस के लिए काफी काम किया हैं। आज हम अपनी महान विभूतियों को भूल रहे हैं, ऐसे में इस प्रकार के आयोजन समाज को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। सब आपस में भाईचारे के साथ रहे। डॉ. दलजीत कौर ने कहा कि तारीख बलिदानों को याद रखने के लिए होती हैं।

उन्होने शायराना अंदाज में कहा,‘तूॅ छोटा गांधी था, तॅू तैय्यब गांधी था, बस यही अवाम ने जाना, पर तू तो मुल्क की आंधी था’। ब्रिगेडियर. के.जी. बहल अध्यक्ष देहरादून चैप्टर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और तैय्यब जी के जीवन पर अपने विचार व्यक्त किये।

इस अवसर पर टिहरी के पूर्व सांसद और ट्रस्ट के सचिव और कोषाध्यक्ष स्वर्गीय परिपूर्णानंद पैन्यूली को भी याद किया गया जिन्होंने अब्बास तैयबजी ट्रस्ट की स्थापना की थी। इस मौके पर डॉ. आर के बख्शी ने संचालन किया और शहर क़ाज़ी मौलाना मोहम्मद अहमद क़ासमी, मुफ्ती सलीम अहमद क़ासमी, कारी मोहम्मद अहसान, मुफ्ति वसी उल्लाह कासमी, मुफ्ति जियाउल हक, जहांगीर अली आदि मौजूद रहे।

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