Tuesday, June 23, 2026
नेशनल फ्रंटियर, आवाज राष्ट्रहित की
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
No Result
View All Result
नेशनल फ्रंटियर
Home अंतरराष्ट्रीय

भारत के दोस्त का हाइपरसोनिक इंटरसेप्टर कितना खतरनाक?

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
17/06/23
in अंतरराष्ट्रीय, समाचार
भारत के दोस्त का हाइपरसोनिक इंटरसेप्टर कितना खतरनाक?
Share on FacebookShare on WhatsappShare on Twitter

तेल अवीव: इजरायल ने दुनिया के सामने पहली बार अपनी हाइपरसोनिक इंटरसेप्टर को प्रदर्शित किया है। यह इंटरसेप्टर किसी भी हाइपरसोनिक मिसाइल को मार गिरा सकता है। इस इंटरसेप्टर के लॉन्चिंग के साथ ही इजरायल को ईरानी हाइपरसोनिक मिसाइलों के खतरे के खिलाफ एक मजबूत रक्षा कवच मिल गया है। इसका नाम स्काई सोनिक हाइपरसोनिक मिसाइल इंटरसेप्टर है। इसे इजरायली कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड ने बनाया है। राफेल एडवांस्ड ने ही आयरन डोम, डेविड स्लिंग, स्पाइडर, ड्रोन डोम, स्काई स्पॉटर जैसे शक्तिशाली एयर डिफेंस सिस्टम का निर्माण किया है। भारतीय थल सेना की स्पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल, सेमसन रिमोट कंट्रोल वेपन स्टेशन, आयरन बीम हाई एनर्जी लेजर वेपन सिस्टम जैसे हथियारों को बनाया है।

पेरिस में पहली बार किया प्रदर्शित

इजरायल के राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स ने पेरिस एयर शो में अपनी स्काई सोनिक हाइपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइल को पहली बार दुनिया के समाने पेश किया। इसका मकसद रूस के डर से एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने की होड़ में जुटे यूरोपीय देशों से अधिक से अधिक कॉन्ट्रैक्ट हासिल करना था। स्काई सोनिक का निर्माण पिछले कई वर्षों से हो रहा है और अभी तक इसका परीक्षण नहीं किया गया है। इसके बावजूद इजरायली कंपनी का दावा है कि उसने स्काई सोनिक का निर्माण कर लिया है। यह सिस्टम हिट-टू-किल तकनीक का उपयोग करता है।

अमेरिका भी स्काई सोनिक से प्रभावित

राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स ने स्काई सोनिक हाइपरसोनिक मिसाइल इंटरसेप्टर की परियोजना अमेरिका के सामने प्रस्तुत की है। अमेरिका ने इस बारे में सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दी है। बहुत कम लोगों को पता होगा कि इजरायल के आयरन डोम डिफेंस सिस्टम के निर्माण में अमेरिका का भी बहुत सारा पैसा लगा हुआ है। कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि हाइपरसोनिक खतरों के खिलाफ सफल बचाव के लिए एक बहुमुखी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। इसमेंन केवल उनकी गति का मुकाबला करना शामिल है, बल्कि उनके अप्रत्याशित उड़ान पथों का प्रभावी ढंग से पता लगाना और उन्हें रोकना भी शामिल है।

ईरानी खतरे के जवाब में बनाया स्काई सोनिक

इजरायल पर काउंटर-हाइपरसोनिक डिफेंस विकसित करने का दबाव और अधिक जरूरी हो गया है क्योंकि इसके कट्टर प्रतिद्वंद्वी ईरान ने हाइपरसोनिक हथियार विकसित करने का दावा किया है। इसी महीने ईरान ने सार्वजनिक रूप से अपनी पहली हाइपरसोनिक मिसाइल फतह या फारसी में ओपनर मिसाइल का खुलासा किया था। ईरानी सरकारी मीडिया ने दिखाया था कि एक बैलिस्टिक मिसाइल की बॉडी पर री एंट्री व्हीकल को माउंट किये हुए दिखाया था। ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया थआ कि फतह 15 मैक की गति तक यात्रा कर सकता है और इसकी रेंज 1400 किलोमीटर है। यह मिसाइल ठोस ईंधन का इस्तेमाल करता है।

ईरानी हाइपरसोनिक के दावों पर भरोसा नहीं

हालांकि ईरान के दावों पर दुनियाभर के देशों को संदेह है। ईरान शुरू से ही प्रचार के उद्देश्य से अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता रहा है। मौजूदा हाइपरसोनिक तकनीक 5-6 मैक तक उड़ान भरने वाले डिजाइनों का समर्थन करती है। ऐसे में इजरायल का मैक 15 का दावा सही प्रतीत नहीं होता है। इसके अलावा ईरान की तुलना में अधिक संसाधनों और विशेषज्ञता वाले चीन, रूस और अमेरिका जैसे स्थापित हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले देशों ने अपने हाइपरसोनिक हथियार कार्यक्रमों में कई कठिनाइयों का सामना किया है, जो ईरान के दावे पर अधइक संदेह पैदा करता है।

कोई चांस नहीं लेना चाहता है इजरायल

इसके बावजूद इजरायल कोई चांस नहीं ले रहा है। अपने स्काई सोनिक हाइपरसोनिक मिसाइल इंटरसेप्टर के अलावा, इजरायल लेजर के उपयोग सहित वैकल्पिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों में भी निवेश कर रहा है। मिसाइल आधारित रक्षा प्रणालियों की तुलना में लेज़रों के कई फायदे हैं, जैसे तत्काल हिट, प्रति शॉट कम लागत। हालांकि, उन्हें बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता, दूरी पर घटती शक्ति और वायुमंडलीय स्थितियों के प्रति संवेदनशीलता जैसी कमियों का सामना करना पड़ता है। फरवरी 2022 में बताया गया था कि इजरायल ने मिसाइलों, रॉकेटों, ड्रोन और ईरान और उसके समर्थक मिलिशिया से लंबी दूरी के अन्य खतरों से बचाव के लिए अपने दक्षिणी क्षेत्रों में एक लेजर दीवार बनाने की योजना बनाई है।

About

नेशनल फ्रंटियर

नेशनल फ्रंटियर, राष्ट्रहित की आवाज उठाने वाली प्रमुख वेबसाइट है।

Follow us

  • About us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Sitemap

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .

  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .