नई दिल्ली: संसद में घुसकर हंगामा होने के बाद सबसे बड़ा सवाल पार्लियामेंट की सुरक्षा है. जिस बिल्डिंग को देश की सबसे सुरक्षित इमारत माना जाता है, उसकी सुरक्षा में सेंध कैसे लग गई? संसद में बॉडी स्कैनर्स क्यों नहीं लगे हैं? विजिटर्स के जूतों की जांच क्यों नहीं होती है? जूतों में छिपाकर खतरनाक केमिकल ले आते तो क्या होता? ये सारे सवाल संसद की घटना के बाद पूछे जा रहे हैं. हालांकि, जांच के आदेश तो दे दिए गए हैं, लेकिन अब तक क्या-क्या खुलासे हुए हैं, आइए उसके बारे में जान लेते हैं.
संसद में कैसे पहुंची स्मोक कैन?
दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, नई पार्लियामेंट में स्मोक कैन ले जाना सुरक्षा में बड़ी चूक है. संसदीय सुरक्षा से जुड़े एक टॉप अधिकारी ने कहा कि स्मोक कैन अंदर कैसे पहुंची, यह सबसे हैरानी की बात है. अगर यह जूते या मोजे में छिपी थी तो डोरफ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) में जरूर पकड़ी जानी चाहिए थी. हालांकि, एक वजह यह भी संभव है कि 2004 के बाद से पार्लियामेंट के सुरक्षा गैजेट नहीं खरीदे गए. मतलब कि ये 19 साल पुराने हैं.
मैनुअल चेकिंग क्यों हुई कम?
एक अन्य संसदीय सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि उनके स्टाफ में 10 साल से नई भर्ती नहीं हुई है. करीब 150 सुरक्षाकर्मियों के पद खाली पड़े हैं. नई संसद में फेशियल रीडिंग के उपकरण ही नए हैं. बाकी मैनुअल चेकिंग बहुत कम हो गई है. पुरानी संसद में उस पर ज्यादा जोर था.
5 जरूरी कदम, जो अब उठाए
नई संसद में घुसपैठ के बाद केंद्र सरकार सतर्क हो गई है. अब सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स में कई बदलाव किए जा रहे.
- सांसदों, स्टाफ मेंबर्स और पत्रकारों के एंट्री गेट अलग होंगे. विजिटर्स को चौथे गेट से प्रवेश कराया जाएगा.
- विजिटर पास जारी करने पर अभी रोक लगा दी गई है.
- विजिटर गैलरी के चारों ओर ग्लास की शील्ड लगाई जाएगी, ताकि कोई कूदकर सदन के अंदर न आ सके.
- एयरपोर्ट के जैसी बॉडी स्कैन मशीनें लगाई जाएंगी.
- और ज्यादा संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे.
सुरक्षा में खामियों की होगी जांच?
बता दें कि घटना के बाद लोकसभा सचिवालय की रिक्वेस्ट पर गृह मंत्रालय ने हाई लेवल जांच के आदेश दिए हैं. इस जांच के लिए विशेष समिति गठित की गई है. जांच टीम को CRPF के महानिदेशक लीड करेंगे. टीम में सुरक्षा एजेंसियों के सदस्य और विशेषज्ञ शामिल होंगे. इसके अलावा जांच समिति सुरक्षा में खामियों का पता लगाएगी. साथ ही, संसद की सुरक्षा में सुधार के सुझावों पर रिपोर्ट सौंपेगी.
इतना ही नहीं, ससंद भवन की सुरक्षा में चूक के बाद लोकसभा सचिवालय ने सांसदों को स्मार्ट कार्ड तैयार कराने के लिए एक बार फिर से याद कराया. सचिवालय ने बताया कि यूं तो कई सदस्यों के पास स्मार्ट कार्ड हैं, लेकिन जो सदस्य विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम के लिए पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें स्मार्ट कार्ड बनवाना चाहिए. ये तमाम सावधानियां इसीलिए बरती जा रही हैं, ताकि 13 दिसंबर की तारीख, जिस तरह दागदार हो चुकी है, वो आगे फिर कभी ना हो.
