काश! झूठी निकले वैज्ञानिकों की ये भविष्यवाणी

नई दिल्ली. अल नीनो (El Nino) के कारण इस साल देश में सूखे जैसे हालात देखने को मिल सकते हैं. इंस्टीट्यूट ऑफ क्लाइमेट चेंज स्टडीज के निदेशक डीएस पई ने यह चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अल नीनो के कारण मानसूनी बारिश की अवधि औसत से 90 प्रतिशत से कम होने की संभावना है. डीएस पई ने मनीकंट्रोल के साथ चर्चा में कहा कि अल नीनो से जुड़े उच्च तापमान का असर एक साल तक महसूस किया जा सकता है.

डीएस पई ने कहा, “ला नीना के 3 साल बाद इस साल अल नीनो आने की संभावना है. देश में 100 से नीचे बारिश के मामले उस समय थे जब मानसून 90 से नीचे था. इसकी वजह से 1952, 1965 और 1972 में भारत ने सूखे का सामना किया था और अब हम उसी स्थिति का सामना कर रहे हैं.”

भारत और पड़ोसी राज्यों पर हो सकता असर

ला नीना अल नीनो का विपरीत प्रभाव है, जिसमें जलवायु पैटर्न जो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने के बारे में बताता है. इससे भारत और इसके पड़ोस में बारिश की कमी और सूखे से जुड़ी जानकारी मिलती है. ऐसे में यह चिंताजनक खबर है, क्योंकि भारत में आधी आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है.

गर्मी भी तोड़ सकती है रिकॉर्ड

डीएस पाई ने कहा, “संभावित एल नीनो प्रभाव के कारण एक लंबी शुष्क अवधि देखने को मिल सकती है. अगर अल नीनो सर्दियों में चरम पर होता है और 2024 के वसंत के मौसम में जारी रहता है, तो अगला साल सबसे गर्म हो सकता है. अगर अल नीनो जारी रहता है तो 2024 में रिकॉर्ड तापमान टूट सकता है. देश भर में तापमान बढ़ रहा है.

बता दें कि देश के कई हिस्सों में फरवरी में इतनी गर्मी कई सालों बाद देखी गई है, जिससे भीषण गर्मी का संकट गहराता जा रहा है. पंजाब में पिछले कुछ दिन के दौरान सामान्य से अधिक तापमान की वजह से गेहूं उत्पादक किसानों की परेशानी बढ़ गई है. तापमान के ज्यादा रहने से गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचने का अंदेशा है. कृषि मंत्रालय के पूर्व सलाहकार बीएल मीणा ने कहा कि अल नीनो के कारण खराब मानसून का असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा. हालांकि, कृषि विशेषज्ञ दीपिंदर शर्मा ने कहा कि हालांकि अभी चीजें ठीक हैं, लेकिन पंजाब के किसान बढ़ते तापमान से चिंतित हैं.

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