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रक्षा उत्पादों के बड़े आयातक से निर्यातक बन गया भारत!

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
05/02/24
in राष्ट्रीय, समाचार
रक्षा उत्पादों के बड़े आयातक से निर्यातक बन गया भारत!

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नई दिल्ली: क्या आप जानते हैं कि हम दुनियाभर से हथियार खरीदते हैं तो दर्जनों देशों को अपने यहां बने रक्षा उत्पाद बेचते भी हैं। बड़ी बात है कि हमारे डिफेंस प्रॉडक्ट्स के ग्राहक इजरायल, अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, इटली जैसे बड़े-बड़े देश भी हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 85 से ज्यादा देशों को रक्षा निर्यात कर रहा है। दूसरी तरफ, रक्षा आयात में तेजी से गिरावट आ रही है और हम अपनी सेना की जरूरतों के साजो-सामान खुद ही बनाने में जुट गए हैं। इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ का अपना सपना पूरा करने की दिशा में प्रगति हो रही है तो ‘मेक इन इंडिया’ को भी बल मिल रहा है। इस प्रयास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कई कदम उठाए हैं, वो चाहे नीतियों को लेकर हों या फिर कार्यक्रमों को जमीन पर उतारने की। अभी भारत ने रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 91 देशों में अपने डिफेंस अताशे रखा है। वहीं, रक्षा उत्पादन के क्षेत्र की भारतीय कंपनियां कई देशों में काम कर रही हैं। मोदी सरकार के 10 साल के कार्यकाल में किस क्षेत्र में क्या उपलब्धियां हासिल हुईं, इस सीरीज में आज हम रक्षा क्षेत्र में निर्यात को लेकर गहन विश्लेषण कर रहे हैं। नीचे आंकड़ों के जरिए बताने की कोशिश की जा रही है कि बीते 10 वर्षों में रक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार ने क्या-क्या किया है…

नीतिगत सुधार और पहल

मोदी सरकार में रक्षा खरीद, उत्पादन और अनुसंधान एवं विकास की प्रक्रिया को आसान और सुगम बनाने के लिए कई नीतिगत सुधार किए गए हैं। सरकार ने इनोवेटर्स, स्टार्टअप, एमएसएमई और अनुसंधान क्षेत्र को शामिल करके रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों में इनोवेशन और टेक्नॉलजी डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सेलेंस (iDEX) लॉन्च किया। दूसरी तरफ, कोविड-19 रिकवरी पैकेज के हिस्से के रूप में घोषित आत्मनिर्भर भारत स्कीम के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए गए।

सरकार ने रक्षा निर्यात बढ़ाने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड रोडमैप मुहैया करने के लिए एक व्यापक रक्षा निर्यात रणनीति तैयार की है। यह रणनीति निर्यात प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, विदेशी रक्षा बाजारों के साथ जुड़ाव बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर स्वदेशी रक्षा उत्पादों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। रक्षा निर्यात को सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने के लिए रक्षा निर्यात संवर्धन एजेंसी (डीईपीए) की स्थापना की गई है। साथ ही, निर्यात लाइसेंसिंग प्रक्रिया का सरलीकरण, लाइसेंस की लंबी वैधता और घटकों और उप-प्रणालियों के निर्यात पर कम प्रतिबंध। इसके साथ ही दुनिया के 91 देशों में भारत के डिफेंस अताशे हैं जो संबंधित देश को भारत से रक्षा उपकरणों के आयात की प्रक्रिया में मदद करते हैं।

​रक्षा बजट में वृद्धि

भारत के रक्षा बजट में पिछले कुछ वर्षों में क्रमिक वृद्धि देखी गई है, जिससे सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और देश की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में मदद मिल रही है। भारत अभी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश है, जिसका 2023 में कुल रक्षा बजट 5.94 लाख करोड़ रुपये है। रक्षा बजट में पूंजीगत व्यय (उपकरणों की खरीद और आधुनिकीकरण) और राजस्व व्यय (वेतन, रखरखाव आदि) के लिए आवंटन शामिल हैं। सरकार ने पूंजीगत खरीद बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष रूप से घरेलू उद्योगों के लिए आवंटित किया, जिसका उद्देश्य विदेशी निर्भरता को कम करना और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। रक्षा खरीद प्रक्रिया में संशोधन, विशेष रूप से डीपीपी 2016 की शुरुआत और उसके बाद डीएपी 2020 में परिवर्तन, रक्षा खरीद प्रक्रिया को आधुनिक बनाने, आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के सरकार के रणनीतिक इरादे को दर्शाता है। इसका असर भी हो रहा है। विदेशों से रक्षा उत्पादों की खरीद वित्त वर्ष 2018-19 में 46% के मुकाबले दिसंबर 2022 में घटकर 36.7% रह गई।

​आयात पर रोक, निर्यात को बढ़ावा

पीएम मोदी की अध्यक्षता में 2020 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आकाश मिसाइल सिस्टम के निर्यात को मंजूरी दे दी और तेजी से निर्यात अनुमोदन के लिए एक हाई पावर कमिटी भी बनाई। इसी तरह, पिछले चार-पांच वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाकर निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। इनमें हथियारों के आयात पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाना, स्थानीय रूप से निर्मित सैन्य हार्डवेयर खरीदने के लिए एक अलग बजट बनाना, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को 49% से बढ़ाकर 74% करना और व्यापार करने में आसानी बढ़ाना शामिल है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर ध्‍यान केन्द्रित किया है और पहली बार उत्पादन एक लाख करोड़ के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया है। रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत 2024-25 तक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में ₹1,75,000 करोड़ का कारोबार हासिल करने का लक्ष्य रख रहा है। 31 दिसंबर, 2023 को तेजपुर विश्वविद्यालय के 21 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा क्षेत्र में आत्‍मनिर्भरता प्राप्‍त करने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए विभिन्‍न कदमों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार हथियारों के आयात को बैन किया गया है। उन्होंने कहा कि हमने पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की, जिसके अंतर्गत 509 ऐसे रक्षा उपकरणों की पहचान की गई है, जिनका निर्माण अब देश में ही किया जाएगा। इसके अतिरिक्‍त, हमने रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की 4 सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची भी जारी की है, जिसमें 4,666 वस्तुओं की पहचान की गई है जो अब भारत में ही निर्मित होंगी।

छोटे उपकरण से युद्धक विमान तक, सब निर्यात करते हैं हम

मोदी सरकार में भारतीय रक्षा उपकरणों के निर्माण के क्षेत्र में उपलब्धियों का आकलन इस बात से भी किया जा सकता है कि भारत बड़े रक्षा आयातक से निर्यातक के रास्ते पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट पिछले वर्षों की तुलना में रक्षा निर्यात के आंकड़ों में कई गुना वृद्धि का संकेत देती है। व्यक्तिगत सुरक्षा वस्तुओं से लेकर सॉफिस्टिकेटेड वेपन सिस्टम्स तक के उत्पाद एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं। भारतीय रक्षा उत्पादों को दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व, अफ्रीका और यहां तक ​​कि यूरोप और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी बाजार मिल गया है। इससे देश की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में दुनियाभर के दशों के बढ़ते विश्वास और भारत के विदेशी संबंधों की रणनीतिक गहराई का पता चलता है। भारत से निर्यात किए जाने वाले प्रमुख रक्षा उत्पादों में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स, एएलएच हेलीकॉप्टर, एसयू एवियोनिक्स, भारती रेडियो, तटीय निगरानी प्रणाली, कवच एमओडी II लॉन्चर और एफसीएस, रडार के लिए स्पेयर पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और हल्के इंजीनियरिंग मैकेनिकल पार्ट्स आदि शामिल हैं।

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