नई दिल्ली. लगता है कि भारत ने अब पाकिस्तान के आतंकियों को उनकी ही भाषा में जवाब देने का काम तेज कर दिया है. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार ने विदेशी धरती पर रहने वाले आतंकवादियों को खत्म करने की एक बड़ी रणनीति के तहत पाकिस्तान में कई आतंकियों की हत्या को अंजाम देने का काम बहुत शातिर तरीके से भाड़े के हत्यारों से कराया है. इसके बारे में पाकिस्तान ही नहीं बल्कि भारत के भी खुफिया अफसरों की राय कमोबेश एक जैसी ही है. ब्रिटिश अखबार ‘गार्जियन’ के मुताबिक पाकिस्तानी जांचकर्ताओं ने जो दस्तावेज शेयर किए हैं, वह इस बात पर नई रोशनी डालते हैं कि कैसे भारत की नीति अब बदल गई है.
अब तक अपनी धरती पर आतंकी हमलों के सहने वाले भारत की की विदेशी खुफिया एजेंसी ने 2019 के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक साहसी दृष्टिकोण के तहत कथित तौर पर विदेशों में हत्याएं करना शुरू कर दिया. रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) को सीधे तौर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय से कंट्रोल किया जाता है, जो इस महीने के अंत में तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. यह जानकारी इन आरोपों को और अधिक बल देते हैं कि दिल्ली ने उन लोगों को निशाना बनाने की नीति लागू की है, जिन्हें वह भारत के लिए शत्रु मानता है.
खालिस्तानी आतंकियों की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप
भारत पर कनाडा में खालिस्तान समर्थक आतंकियों की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप है. बहरहाल ताजा दावे 2020 के बाद से पाकिस्तान में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा की गई लगभग 20 हत्याओं से जुड़े हैं. जबकि भारत को पहले अनौपचारिक रूप से इन मौतों से जोड़ा गया है, यह पहली बार है कि भारतीय खुफिया एजेंसियों के कर्मियों ने पाकिस्तान में कथित अभियानों पर चर्चा की है. जबकि पाकिस्तानी एजेंसियों ने इन हत्याओं में रॉ के सीधे शामिल होने के बारे में बड़े दस्तावेज सामने रखे हैं. आरोपों से यह भी पता चलता है कि खालिस्तान आंदोलन में सिख अलगाववादियों को इन भारतीय विदेशी अभियानों के हिस्से के रूप में पाकिस्तान और पश्चिमी देशों में निशाना बनाया गया था.
हत्याएं ज्यादातर यूएई से संचालित स्लीपर सेल के जरिये
पाकिस्तानी जांचकर्ताओं के मुताबिक ये हत्याएं ज्यादातर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से संचालित होने वाले भारतीय खुफिया स्लीपर-सेल द्वारा की गई थीं. 2023 में हत्याओं के बढ़ने का कारण इन स्लीपर सेल बढ़ी हुई गतिविधि को दिया गया. जिन पर हत्याओं को अंजाम देने के लिए स्थानीय अपराधियों या गरीब पाकिस्तानियों को लाखों रुपये देने का आरोप है. भारतीय खुफिया अधिकारियों के अनुसार विदेश में पाकिस्तानी असंतुष्टों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जासूसी एजेंसी की कार्यशैली में बदलाव 2019 में पुलवामा हमले से शुरू हुआ था. जब एक आत्मघाती हमलावर ने कश्मीर में एक सैन्य काफिले को निशाना बनाया था. जिसमें 40 अर्धसैनिक कर्मियों की मौत हो गई थी. पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने जिम्मेदारी ली थी.
पुलवामा हमले के बाद बदला भारत का रवैया
पुलवामा के बाद देश के बाहर के तत्वों को हमला करने या कोई गड़बड़ी पैदा करने से पहले निशाना बनाने के लिए नजरिया बदल गया. भारत के एक खुफिया सूत्र ने कहा कि हम हमलों को रोक नहीं सके क्योंकि उनके सुरक्षित ठिकाने पाकिस्तान में थे, इसलिए हमें उन तक पहुंचना पड़ा. खुफिया सूत्रों ने दावा किया कि 2023 में टारगेटेड किलिंग में काफी बढ़ोतरी हुई है. जिसमें भारत पर लगभग 15 लोगों की संदिग्ध मौतों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है. जिनमें से अधिकांश को अज्ञात बंदूकधारियों ने करीब से गोली मार दी थी.
भारत ने बताया झूठा आरोप
‘गार्जियन’ को एक जवाब में, भारत के विदेश मंत्रालय ने सभी आरोपों से इनकार किया. एक पहले के बयान को दोहराते हुए कहा गया कि वे ‘झूठे और दुर्भावनापूर्ण भारत विरोधी प्रचार. थे. मंत्रालय ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा पिछले खंडन पर जोर दिया, कि अन्य देशों में लक्षित हत्याएं “भारत सरकार की नीति नहीं थीं. जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर और भारत के सबसे कुख्यात आतंकवादियों में से एक शाहिद लतीफ के मामले में कथित तौर पर उसे मारने के लिए कई प्रयास किए गए थे. अंत में एक अनपढ़ 20 साल के पाकिस्तानी ने अक्टूबर में पाकिस्तान में उसकी हत्या को अंजाम दिया था. जिसे कथित तौर पर संयुक्त अरब अमीरात में रॉ ने भर्ती किया था. जहां वह अमेजन पैकिंग गोदाम में कम वेतन पर काम कर रहा था.
‘कई आतंकियों की हत्या की साजिश का आरोप’
पाकिस्तानी जांचकर्ताओं ने पाया कि उस व्यक्ति को लतीफ का पता लगाने के लिए एक गुप्त भारतीय एजेंट द्वारा कथित तौर पर 15 लाख पाकिस्तानी रुपये (£ 4,000) का भुगतान किया गया था और बाद में उसे हत्या को अंजाम देने पर 1.5 करोड़ पाकिस्तानी रुपये और संयुक्त अरब अमीरात में अपनी खुद की कैटरिंग कंपनी देने का वादा किया गया था. युवक ने सियालकोट की एक मस्जिद में लतीफ की गोली मारकर हत्या कर दी. इसी तरह आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बशीर अहमद पीर और भारत की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल सलीम रहमानी की हत्या की योजना भी रची गई थी.
भारत आतंकवाद से सबसे ज्यादा पीड़ित
दशकों से भारत पाकिस्तान पर भारत प्रशासित कश्मीर के विवादित क्षेत्र में हिंसक आतंकवादी विद्रोह को बढ़ावा देने और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह देने का आरोप लगाता रहा है. 2000 के दशक की शुरुआत में भारत पाकिस्तान स्थित इस्लामी आतंकवादी समूहों द्वारा किए गए लगातार आतंकवादी हमलों से प्रभावित हुआ था. जिसमें 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट शामिल थे, जिसमें 160 से अधिक लोग मारे गए थे. वहीं 2008 के मुंबई हमले में 172 लोग मारे गए थे.
