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रूस से एक तिहाई खर्च पर पहुंच गया भारत का चंद्रयान, जानिए नासा ने कितना किया था खर्च

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
18/08/23
in राष्ट्रीय
रूस से एक तिहाई खर्च पर पहुंच गया भारत का चंद्रयान, जानिए नासा ने कितना किया था खर्च
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नई दिल्‍ली: भारत और रूस के बीच चंद्रमा के साउथ पोल में उतरने को लेकर होड़ मची है। दोनों देशों के मिशन चांद की सतह के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। भारत के चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) का लैंडर विक्रम प्रपल्शन मॉड्यूल से अलग हो चुका है और धीरे-धीरे चांद की सतह के करीब पहुंच रहा है। इसे 23 अगस्त को चांद की सतह पर उतारने की कोशिश की जाएगी। दूसरी ओर रूस का मिशन लूना-25 (Luna-25) 21 से 23 अगस्त को चांद की सतह पर उतरने का प्रयास करेगा। चंद्रयान-3 को 14 जुलाई 2023 को लॉन्‍च किया था और 5 अगस्‍त को इसने चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया था। दूसरी ओर रूस का मिशन 10 अगस्त को भेजा गया था। यहां हम आपको बता रहा है कि भारत और रूस के मिशन में से किस पर कितना खर्च आया है।

चंद्रयान-3 भारत की तीसरा मून मिशन है जबकि रूस ने 1976 के बाद पहली बार चांद का रुख किया है। रूस के लूना-25 का वजन 1,750 किग्रा है जबकि चंद्रयान-3 का भार 3,800 किग्रा है। इन दोनों के बजट में भारी अंतर है। चंद्रयान-3 का बजट जहां मात्र 615 करोड़ रुपये है, वहीं रूस ने लूना-25 के बजट का ऐलान नहीं किया है। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक इसकी लागत करीब 1,600 करोड़ रुपये है। यानी रूस का मिशन भारत की तुलना में करीब ढाई गुना है। चंद्रयान-3 की लागत चंद्रयान-2 की तुलना में कम है। चंद्रयान-2 की तरह चंद्रयान-3 में ऑर्बिटर नहीं है।

इसरो बनाम नासा का खर्च

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) इसरो के अनुसार, चंद्रयान-3 को तैयार करने पर कुल 615 करोड़ रुपये का खर्च आया है। चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम, रोवर प्रज्ञान और प्रपल्शन मॉड्यूल को तैयार करने की कुल लागत 250 करोड़ रुपये है। साथ ही इसके लॉन्च पर 365 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसका कुल खर्च चंद्रयान-2 की तुलना में करीब 30 फीसदी कम है। 2008 में भेजे गए चंद्रयान-1 की कुछ खर्च 386 करोड़ रुपये था। इसी तरह 2019 में भेजे गए चंद्रयान-2 पर कुल खर्च 978 करोड़ रुपये का खर्च आया था। यानी तीनों मिशन पर इसरो का कुल खर्च 1,979 करोड़ रुपये रहा है।

अमेरिका ने अपना लूनर मिशन साल 1960 में शुरू किया था। तब उसके मिशन का कुल खर्च 25.8 अरब डॉलर था। अगर आज के हिसाब के देखें तो यह 178 अरब डॉलर बैठता है। रुपये के हिसाब से देखें को यह रकम करीब 14 लाख करोड़ रुपये बैठती है। यानी इसरो के मुकाबले नासा के मून मिशन का खर्च करीब 3,000 गुना ज्‍यादा था। इसरो ने कुछ साल पहले मंगलयान को भी लॉन्च किया था। इसका कुल खर्च करीब 450 करोड़ रुपये था जबकि 2013 में आई हॉलीवुड फिल्म ग्रैविटी की लागत 600 करोड़ रुपये थी।

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