नई दिल्ली : भारत ने रक्षा क्षेत्र में निर्माण की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा दिए हैं। सोमवार को इसका साक्षात उदाहरण उस वक्त देखने को मिला जब भारत में बने हल्के युद्धक विमान (एलसीए) पहली बार आईएएनएस विक्रांत पर उतरा और यहां से उड़ान भी भरी। बता दें स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पिछले साल सितंबर में नेवी में कमीशन हुआ था। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि यह स्थानीय रूप से बने लड़ाकू विमानों के साथ स्वदेशी विमान वाहक को डिजाइन, विकसित, निर्माण और संचालित करने की भारत की क्षमता को दर्शाता है।
ट्रायल मोड में है विक्रांत
एलसीए (नेवी) ऐसे वक्त में आईएनएस विक्रांत के डेक से ऑपरेट हुआ है जबकि यह एयरक्राफ्ट कैरियर क्रिटिकल फ्लाइट के लिए ट्रायल मोड में है। एक अधिकारी ने बताया कि इसे इसी साल पूरी तरह से ऑपरेशनल बना दिया जाएगा। एलसीए (नौसेना) केवल एक टेक्नोलॉजी डिमांस्ट्रेटर है। हालांकि यह इस मायने में खास है क्योंकि यह दिखाता है कि भारत ने डेक-आधारित लड़ाकू संचालन के लिए स्पेशल टेक्नोलॉजी डेवलप कर ली है। यह डबल इंजन इंजन डेक-आधारित फाइटर प्लेन्स को डेवलप करने का रास्ता तैयार करेगा।
मिग-29के भी शामिल
आईएनएस विक्रांत पर इस ट्रायल में रूस में बने मिग-29के फाइटर जेट भी शामिल है। यह फाइटर जेट टेक-ऑफ के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह एयरक्राफ्ट कैरियर से स्की जंप के साथ टेकऑफ करता है और वायर्स के जरिए रोके जाते हैं। इसे स्टोबार (शॉर्ट टेकऑफ लेकिन अरेस्टेड रिकवरी) कहा जाता है। जानकारी के मुताबिक आईएनएस विक्रांत पर 12 मिग-29के विमान तैनात होंगे। देसी फाइटर जेट्स के अगले कुछ वर्षों में तैयार होने तक नेवी इन्हें अंतरिम तौर पर खरीदने वाली है। नेवी का एक अन्य एयरक्राफ्ट कैरियर, आईएनएस विक्रमादित्य मिग-29के फाइटर्स ऑपरेशन करता है। एलसीए (नेवी) पहली बार विक्रमादित्य पर अगस्त 2020 में लैंड हुआ था और यहां से उड़ान भरी थी।
