Monday, April 27, 2026
नेशनल फ्रंटियर, आवाज राष्ट्रहित की
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
No Result
View All Result
नेशनल फ्रंटियर
Home देहरादून

दुर्लभ पौधों को संरक्षण प्रदान करना जरूरी : डॉ. एस. फारूक

फ्रंटियर डेस्क by फ्रंटियर डेस्क
24/01/26
in देहरादून
दुर्लभ पौधों को संरक्षण प्रदान करना जरूरी : डॉ. एस. फारूक
Share on FacebookShare on WhatsappShare on Twitter

देहरादून। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के कृषि संकाय (स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर) के एम.बी.ए (एग्री बिज़नेस) के 80 छात्र एवं 4 संकाय सदस्य औद्योगिक प्रबंधन की व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त करने के लिये हिमालया के औद्योगिक दौरे पर थे।

छात्रों को हिमालया वेलनेस कंपनी के इतिहास पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई, जिसकी स्थापना 1930 में देहरादून से हुई थी और जो आज विश्व के 102 देशों में अपनी सेवाएँ प्रदान कर रही है। इसके साथ ही उन्हें निर्माण क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स, भंडारण आदि की जानकारी भी दी गई।

हिमालया के अध्यक्ष डॉ. एस. फारूक ने छात्रों से संवाद करते हुए बताया कि उत्तराखंड में 8524 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अल्पाइन वनस्पति पाई जाती है, इसके अलावा, कई हज़ार वर्षों से वन उत्पादों का उपयोग होता आ रहा है, इस बारे में डॉ. सुमन लता, डॉ. दीक्षित एवं डॉ. ज़फ़र ने भी जानकारी दी। छात्रों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि खेती के लिए हिमालया तीनों तरीकों को अपनाता है।

हमारी स्वयं की खेती कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग विक्रेताओं/बाज़ार तक हम तीनों तरीकों को अपनाते हैं, क्योंकि मिट्टी और मौसम की परिस्थितियों के कारण सभी कच्चे पदार्थ एक ही स्थान पर उगाए नहीं जा सकते। अब तक औषधीय एवं सुगंधित पौधों की 144 प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है। आधुनिक समय में हमें उनका संरक्षण और विकास तरीके से करना चाहिए तथा स्थानिक (एंडेमिक) और दुर्लभ पौधों का संरक्षण करना चाहिए।

अंत में, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. हेमंत चौहान ने डॉ. एस. फारूक एवं उनकी टीम को धन्यवाद ज्ञापित किया, जिन्होंने युवा छात्रों को व्यवसाय प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराने हेतु अपना बहुमूल्य समय दिया तथा उत्कृष्ट आतिथ्य प्रदान किया।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About

नेशनल फ्रंटियर

नेशनल फ्रंटियर, राष्ट्रहित की आवाज उठाने वाली प्रमुख वेबसाइट है।

Follow us

  • About us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Sitemap

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .

  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .