नई दिल्ली : 2024 का लोकसभा चुनाव मोदी बनाम केजरीवाल होगा। केजरीवाल ही मोदी का विकल्प बन सकते हैं। पिछले कुछ महीनों में आम आदमी पार्टी (आप) ने कई मौकों पर इस तरह की बातें कहीं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, आधिकारिक प्रवक्ता से लेकर कार्यकर्ता तक मीडिया के सामने ऐलान करते रहे कि केजरीवाल मोदी का मुकाबला करने को तैयार हैं। हालांकि, अब अचानक पार्टी अपना रुख बदलती दिख रही है। बुधवार को केजरीवाल ने तेलंगाना में के चंद्रशेखर राव की ओर से आयोजित रैली में हिस्सा लिया और कई दलों के साथ मंच साझा किया। मोदी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की कवायद करने वाले केसीआर के मंच पर केजरीवाल की मौजूदगी के बाद माना जा रहा है कि ‘आप’ ने मोदी के खिलाफ अकेले मुकाबले का प्लान बदल लिया है।
2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर एक तरफ जहां नीतीश कुमार विपक्षी मोर्चा बनाने की कोशिश में जुटे हैं तो दूसरी तरफ हाल ही में अपनी पार्टी का तेलंगाना राष्ट्र समिति से बदलकर बदलकर भारत राष्ट्र समिति करने वाले केसीआर इससे अलग धुरी बनाने की कोशिश में है। नीतीश कुमार के मोर्चे से कन्नी काटते रहे केजरीवाल ने केसीआर के गुट में शामिल होते दिख रहे हैं। बुधवार को तेलंगाना के खम्मम में केजरीवाल ने केसीआर के अलावा केरल के सीएम पिनाराई विजयन और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के साथ मंच साझा किया।
केजरीवाल ने एकजुटता को बताया उम्मीद की किरण
खुद अरविंद केजरीवाल ने भी इस बात को शुभ संकेत बताया कि कई राज्यों के मुख्यमंत्री और नेता एक मंच पर साथ आए हैं। केजरीवाल ने 2024 में मोदी को सत्ता से हटाने की अपील की तो एकजुटता को उम्मीद की किरण बताया। उन्होंने मंच से कहा,’पहली बार इस देश के अंदर एक उम्मीद की किरण जागने लगी है। इस देश के अंदर कुछ मुख्यमंत्री एक साथ आ रहे हैं। अखिलेश यादव जी जैसे नेता एक साथ आ रहे हैं। हम सब मिलकर इस देश की विकास की चर्चा कर रहे हैं। हमने पूरे दिन चर्चा कि देश के अंदर शिक्षा अच्ची कैसे होनी चाहिए, अस्पताल अच्छे कैसे होने चाहिए, सिंचाई कैसे अच्छी हो, मजदूरों और किसानों के लिए क्या कर सकते हैं। देश के कुछ मुख्यमंत्री इकट्ठे होने लगे हैं।’
‘सबको मिलकर मोदी को हटाना है’
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी के कहने पर विपक्षी पार्टियों को गवर्नर तंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली से फोन करके अड़चने डालने को कहा जाता है। उन्होंने कहा, ‘जिस देश का प्रधानमंत्री 24 घंटे बैठकर सोचता है कि मुझे अब इसे तंग करना है अब उसे तंग करना है वह देश तरक्की कैसे करेगा?’ बेरोजगारी और महंगाई की समस्या को लेकर केजरीवाल ने कहा कि पीएम को इनसे लेना देना नहीं है। केजरीवाल ने कहा कि देश की जनता ने उम्मीद के साथ एक नहीं दो बार उन्हें जितवाया। लेकिन अब देश बदलाव मांग रहा है। लोगों को पता चल गया है कि ये देश बर्बाद करने आए हैं। 10 साल हो गए हैं और कितना इंतजार करेंगे। 2024 में सारे देश को मिलकर इन्हें उखाड़ फेंकना है।
विपक्षी एकता पर पहले क्या बोले थे केजरीवाल?
गुजरात, हिमाचल विधानसभा और एमसीडी चुनाव के दौरान जहां आम आदमी पार्टी ने कई बार इस बात का ऐलान किया कि केजरीवाल ही मोदी के खिलाफ चेहरा हो सकते हैं तो खुद आप संयोजक ने कहा था कि वह भाजपा को हराने के मकसद से बने किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं होना चाहिए। केजरीवाल ने नवंबर में एक टीवी इंटरव्यू में कहा, ‘मैं इस गठजोड़ और गठबंधन की राजनीति को नहीं समझता। मैं इस देश की उम्मीद बनना चाहता हूं। गठबंधन की जब भी बात होती है, विपक्षी एकजुटता की बात होती है तो कहते हैं कि सबको साथ आना चाहिए। क्यों? बीजेपी को हराने के लिए। बीजेपी को या किसी भी पार्टी को हराने या जितवाने का काम जनतंत्र में जनता करती है।’
क्यों बदला प्लान?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो आम आदमी पार्टी ने गुजरात और हिमाचल में चुनाव नतीजों के बाद 2024 में अकेले लड़ने के प्लान बदल लिया है। दावों और उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिलने के बाद पार्टी ने मोदी विरोधी गठबंधन का हिस्सा बनने का फैसला किया है। पार्टी के कुछ रणनीतिकारों का यह भी कहना है कि दिल्ली और पंजाब के अलावा किसी और राज्य में पार्टी का संगठन 2-4 सीटें लाने में सक्षम नहीं है। ऐसे में अकेले सभी सीटों पर लड़ने का फैसला, 2014 की गलती को दोहराना होगा। लोकसभा में पार्टी के पास अभी एक भी सांसद नहीं है। पार्टी के एक नेता ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर कहा कि गुजरात चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए भी ‘मोदी बनाम केजरीवाल’ की बातें कहीं गईं, लेकिन 300 से अधिक सांसदों वाली पार्टी के खिलाफ अकेले उतरना अति उत्साही कदम होगा। अभी चुनाव में एक साल का समय बचा है और पार्टी काफी सोच-विचार के साथ कदम आगे बढ़ाएगी।
