पटना : बिहार में बहार है। सभी ओर कदाचार है। योग्य नौजवान बेरोजगार है। पढल-लिखल बेकार है। नौकरी के लेल पैसा और पैरवी के जोगाड़ है। हां, भईया यहां भाजपा और जदयू मॉडल की सरकार है ! उपरोक्त ट्वीट बिहार राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता चितरंजन गगन ने 8 मई 2022 को किया था। उस समय बिहार में महागठबंधन की नहीं, एनडीए की सरकार थी। अब एक बार फिर बिहार में बीपीएससी का क्वेश्चन पेपर व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल होने का मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि ये क्वेश्चन उसी परीक्षा का है, हालांकि, परीक्षा खत्म होने के बाद अधिकांश वायरल प्रश्न पत्रों को फर्जी करार दिया जाता है। साल 2022 में 73वीं बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। हंगामा हुआ और बाद में परीक्षा को रद्द कर दिया गया। एसआईटी का गठन हुआ और जांच शुरू कर दी गई। बिहार में बीपीएससी और कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान में RPSC के पेपर लीक की कहानी हाल के दिनों में चर्चा का विषय बन गई। ताजा पेपर लीक की घटना एक बार फिर बिहार और राजस्थान में हुई है।
छात्रों ने लगाया गंभीर आरोप
बिहार में एक बार फिर पेपर लीक की बात सामने आ रही है। छात्रों ने ये आरोप लगाया है कि जब उन्होंने वायरल पेपर से परीक्षा हॉल में मिले पेपर को मिलाया, तो वो सेम था। उसके बाद अभ्यर्थियों ने हंगामा शुरू कर दिया। आपको बता दें कि पहली शिफ्ट मॉर्निंग 10 बजकर 15 मिनट से 12 बजकर 15 मिनट तक थी। इसी दौरान 11 बजे के आस-पास पेपर वायरल होने की बात सामने आई। बीपीएससी पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों ने मीडिया को बताया कि बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) का पेपर लीक हुआ है। छात्रों ने कहा कि उनके मोबाइल पर ये पेपर 11 बजे के बाद आ गया। जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों को ये भेज दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभ्यर्थियों के मुताबिक बोरिंग रोड एएन कॉलेज सेंटर के पास पहुंचकर छात्रों ने परीक्षार्थियों से पूछा कि क्या यही सवाल आया था? उसके बाद परीक्षार्थियों ने कहा कि हूबहू वायरल प्रश्न पत्र ही आया था। कहा जा रहा है कि सचिवालय सहायक का प्रश्न पत्र लीक हो चुका है।
अभ्यर्थियों का सपना टूटा
इस घटना के बाद सचिवालय सहायक बनने का सपना देखने वाले लोग आहत हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि बिहार में स्थिति बहुत भयानक हो गई है। हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। छात्रों ने बिहार में शिक्षा तंत्र में माफियाओं के कब्जे की बात कही है। अभ्यर्थी पहले से ही बिहार में हो रहे पेपर लीक वाले पाप की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं। छात्रों ने आरोप लगाया है कि परीक्षार्थियों के साथ धोखा हो रहा है। आपको बता दें कि बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग की तीसरी स्नातक स्तरीय परीक्षा में लगभग 9 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल हुए हैं। छात्रों का कहना है कि इस वैकेंसी से उन्हें काफी उम्मीद थी, क्योंकि ये वैकेंसी 2014 के बाद आठ साल बाद सामने आई थी। कयास लगाये जा रहे हैं कि प्रश्न पत्र लीक होने के बाद एक बार फिर परीक्षा रद्द की जाएगी और इसका खामियाजा वर्षों तक तैयारी करने वाले छात्र भुगतेंगे।
पेपर लीक के पीछे कौन?
बीपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र मनमोहन पांडेय ने बताया कि पेपर लीक होने से अभ्यर्थियों में घोर निराशा है और अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। सरकार से आग्रह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं को फुल प्रूफ कराए, जिससे स्वच्छ प्रक्रिया के तहत मेरिट वाले बच्चे चुन कर आएं और सेवा प्रदान करें। सरकार की ये जिम्मेदारी है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगे अभ्यर्थियों को असुरक्षा की भावना से बाहर निकाले। आपको बता दें कि बिहार के 528 केंद्रों पर हुई ये परीक्षा 23 और 24 दिसंबर को आयोजित की गई। उसके बाद अचानक इसके पेपर लीक की बात सामने आई। उधर, राज्य कर्मचारी चयन आयोग की ओर से एक पत्र जारी किया गया है, जिसमें ये मान लिया गया है कि पेपर लीक हुआ है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बिहार कर्मचारी चयन आयोग के सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि सत्यापन और जांच के क्रम में प्रश्न पुस्तिका के पन्नों से संबंधित परीक्षा केंद्र और इस घटना से संबंधित अन्य जानकारी प्राप्त की गई है। आयोग की ओर से सूचना जारी की गई है कि पूरे मामले को आर्थिक अपराध ईकाई से साझा कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर छात्र सवाल उठाते हैं कि जब आयोग को ये पता है कि पेपर लीक हुआ है, फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
