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इन पांच नेताओं को पछाड़कर भारत के PM कैसे बने थे मनमोहन सिंह?

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
27/12/24
in राष्ट्रीय, समाचार
इन पांच नेताओं को पछाड़कर भारत के PM कैसे बने थे मनमोहन सिंह?
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नई दिल्ली: तारीख 18 मई और साल था 2004. अटल बिहारी वाजपेई की सरकार को मात देकर कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनने जा रही थी. सोनिया गांधी का प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा था, तभी 10 जनपथ पहुंचे रामविलास पासवान को जानकारी मिली कि सोनिया पीएम नहीं बन रही हैं. उन्होंने खबर कन्फर्म करने के लिए सोनिया गांधी के सलाहकार अहमद पटेल को फोन लगाया तो वहां से भी कोई पॉजिटिव रिस्पॉस नहीं मिला.

रामविलास पासवान अपने बायोग्राफी ‘संघर्ष, साहस और संकल्प’ में कहते हैं- मैं जैसे ही 10 जनपथ से बाहर निकला, यह खबर मीडिया में फ्लैश होने लगी. हम गठबंधन के लोग अचंभित थे कि अब कौन प्रधानमंत्री बनेगा, लेकिन जल्द ही कांग्रेस की तरफ से हमें इसको लेकर सूचित किया. जो नाम हमारे सामने आए, वो काफी चौंकाने वाले थे. वो नाम था मनमोहन सिंह का.

2004 में सोनिया गांधी के पीएम बनने से इनकार करने के बाद मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री की कुर्सी सौंपी गई. सिंह उस वक्त राज्यसभा में कांग्रेस के नेता विरोधी थे. तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने तो यहां तक दावा किया था कि मनमोहन ही पीएम बनेंगे, इसकी आधिकारिक सूचना राष्ट्रपति कार्यालय को आखिरी वक्त में दी गई थी.

सोनिया के इनकार के बाद ये 5 नेता थे दावेदार

सोनिया गांधी ने पीएम की कुर्सी क्यों नहीं ली, इसको लेकर अलग-अलग दावे हैं, लेकिन सोनिया के इनकार के बाद कांग्रेस के सियासी गलियारों में 5 नेताओं को पीएम इन वेटिंग बताया गया. जिन नेताओं के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा शुरू हुई. उनमें प्रणब मुखर्जी, अर्जुन सिंह, एनडी तिवारी, शिवराज पाटील और पी चिदंबरम का नाम प्रमुख था.

प्रणब मुखर्जी क्यों- कांग्रेस के सबसे सीनियर नेता थे. इंदिरा के जमाने से केंद्र में मंत्री पद पर रह चुके थे. पार्टी के अधिकांश नेता उन्हें इस कुर्सी पर बैठाना चाह रहे थे, लेकिन प्रणब पीएम नहीं बन पाए. पीएम न बनने को लेकर प्रणब ने कई बार अफसोस भी जताया. प्रणब मनमोहन सरकार में वित्त और रक्षा मंत्री रहे.

अर्जुन सिंह क्यों- गांधी परिवार के करीबी माने जाते थे. राजीव और सोनिया गांधी से बेहतरीन ताल्लुकात थे. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अर्जुन सिंह सहयोगी पार्टियों की भी पसंदीदा नेता थे. बाद में अर्जुन सिंह मनमोहन की सरकार में शिक्षा मंत्री बनाए गए.

एनडी तिवारी क्यों- उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद पर रह चुके एनडी तिवारी भी पीएम पद के प्रमुख दावेदार थे. तिवारी को भी गांधी परिवार का काफी क्लोज माना जाता था. हालांकि, तिवारी को पीएम की कुर्सी नहीं मिल पाई.

शिवराज पाटिल क्यों- महाराष्ट्र के कद्दावर नेता शिवराज पाटिल भी पीएम के प्रमुख दावेदार थे. मुंबई अर्थव्यवस्था का केंद्र माना जाता है. पाटिल की मुंबई में मजबूत पकड़ थी. बाद में पाटिल मनमोहन सिंह की सरकार में गृह मंत्री बनाए गए.

पी चिदंबरम- अर्थशास्त्री पी चिदंबरम भी पीएम पद के प्रमुख दावेदार थे. उस वक्त कहा जा रहा था कि दक्षिण को साधने के लिए कांग्रेस चिदंबरम को पीएम बना सकती है. चिदंबरम कई सरकार में मंत्री रह चुके थे. मनमोहन की सरकार में चिदंबरम गृह और वित्त मंत्री बनाए गए.

सवाल- मनमोहन ने कैसे मारी बाजी?

पीएम बनने के लिए मनमोहन के पक्ष में 3 प्रमुख फैक्टर काम कर रहा था. पहला फैक्टर मनमोहन सिंह का किसी गुट से न होना था. कांग्रेस में उस वक्त दक्षिण और उत्तर के साथ-साथ कई गुट सक्रिय था. नरसिम्हा राव की सरकार में इसी गुटबाजी की वजह से कांग्रेस पस्त हो गई थी. सोनिया फिर से रिस्क नहीं लेना चाह रही थी.

मनमोहन सिंह का राजनीतिक व्यक्ति न होना भी उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ. 2004 में राहुल गांधी की राजनीति में एंट्री हो गई थी. कांग्रेस के लोग उनके लिए सियासी पिच तैयार कर रहे थे. ऐसे में मनमोहन के अलावा किसी राजनीतिक व्यक्ति को पीएम की कुर्सी सौंपी जाती तो राहुल के लिए भविष्य की राह आसान नहीं रहता.

तीसरा फैक्टर मनमोहन का कामकाज था. वित्त मंत्री रहते मनमोहन ने भारत को आर्थिक तंगी से बाहर निकाला था. 2004 में भी कांग्रेस ने आर्थिक नीति और रोजगार से जुड़े से कई वादे किए थे, जिसे पूरा करने के लिए विजनरी नेता की जरूरत थी. मनमोहन इसमें अव्वल साबित हुए.

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